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कृषि कानूनों को निरस्त कराने के लिए लोकसभा में गैर सरकारी विधेयक लाएंगे पंजाब के कांग्रेस सांसद

किसान आंदोलन (Kisaan Andolan) के जरिए किसान कृषि बिल (Farm Laws) का विरोध कर रहे हैं.  (Photo- AP)
किसान आंदोलन (Kisaan Andolan) के जरिए किसान कृषि बिल (Farm Laws) का विरोध कर रहे हैं. (Photo- AP)

Farm Laws: इस गैर सरकारी विधेयक को पेश करने वाले सांसदों में तिवारी, परनीत कौर, जसबीर सिंह गिल और संतोख चौधरी शामिल होंगे.

  • भाषा
  • Last Updated: February 10, 2021, 12:07 AM IST
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नई दिल्ली. पंजाब से ताल्लुक रखने वाले कांग्रेस के कुछ सांसद विवादों में घिरे तीनों नये कृषि कानूनों (Farm Laws) को निरस्त कराने के लिए लोकसभा में गैर सरकारी विधेयक लाएंगे. पार्टी के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सदस्य मनीष तिवारी ने संवाददाताओं को बताया कि पंजाब के कांग्रेस सांसदों के एक समूह की ओर से इसी सत्र में ‘निरसन एवं संशोधन विधेयक-2021’ पेश किया जाएगा. इस गैर सरकारी विधेयक को पेश करने वाले सांसदों में तिवारी, परनीत कौर, जसबीर सिंह गिल और संतोख चौधरी शामिल होंगे.

तिवारी ने कहा कि वे दूसरे दलों के उन सांसदों का भी समर्थन हासिल करने का प्रयास करेंगे जो किसानों के लिए सहानुभूति रखते हैं और नए कृषि कानूनों को लेकर उनके रुख का समर्थन करते हैं. यह पूछे जाने पर कि क्या इसी तरह का गैर सरकारी विधेयक राज्यसभा में भी लाया जाएगा तो कांग्रेस नेता ने कहा कि वे उच्च सदन के अपने साथियों से ऐसा करने का आग्रह करेंगे.

उल्लेखनीय है कि कृषि कानूनों के खिलाफ हजारों किसान दिल्ली के निकट दो महीने से अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे हैं. ये कानून पिछले साल सितंबर में अमल में आए थे.



नये कृषि कानूनों संबंधी याचिका पर शीर्ष न्यायालय का केंद्र को नोटिस
वहीं उच्चतम न्यायालय ने विवादास्पद नये कृषि कानूनों को लागू करने और सरकार एवं आंदोलनरत किसानों के बीच गतिरोध खत्म करने के लिए शीर्ष न्यायालय द्वारा नियुक्त समिति में एक सदस्य के तौर पर शामिल करने की मांग करने वाली एक कंपनी की याचिका पर केंद्र को मंगलवार को नोटिस जारी किया.

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना तथा न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यन की पीठ ने याचिका को इसी तरह की अन्य याचिकाओं के साथ संलग्न करते हुए कानून एवं न्याय मंत्रालय और कृषि मंत्रालय को नोटिस जारी किये.

शीर्ष न्यायालय अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश) की एक कंपनी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसके जरिए केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश को केंद्र के तीनों नये कृषि कानूनों को लागू करने के लिए फौरन निर्देश देने का अनुरोध किया गया है.

याचिका रामवे फूड्स लिमिटेड एवं अन्य ने दायर की है. याचिका में कहा गया है, ‘‘पूरे देश में करीब 2000 रोलर आटा मिल हैं, जो आटा, मैदा, सूजी और चोकर तैयार करते हैं. ये मिल कच्चे माल के तौर पर गेहूं का इस्तेमाल करने वाले बड़े उपभोक्ता हैं.’’ याचिका में कहा गया है, ‘‘चूंकि याचिकाकार्ता कृषि उपज के बड़े हितधारक हैं इसलिए वे न्यायालय द्वारा गठित समिति का एक सदस्य बनने के हकदार हैं, ताकि समिति के कोई रिपोर्ट सौंपने से पहले सुनवाई के दौरान उसकी शिकायतों पर उचित विचार किया जा सके. ’’

शीर्ष न्यायालय ने 12 जनवरी को नये कृषि कानूनों के क्रियान्यवयन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी.
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