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टावर तोड़ने से सिर्फ आर्थिक रफ्तार को ही नुकसान नहीं, देश की छवि पर भी पड़ रहा असर: विशेषज्ञ

 तोड़फोड़ को लेकर देश में टेलीकॉम कंपनियों की सबसे बड़ी संस्था सेलूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी सीओएआई ने भी कड़ी आलोचना की है. (सांकेतिक तस्वीर)
तोड़फोड़ को लेकर देश में टेलीकॉम कंपनियों की सबसे बड़ी संस्था सेलूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी सीओएआई ने भी कड़ी आलोचना की है. (सांकेतिक तस्वीर)

Farmer Protest: देश को आर्थिक गति देने में इन कंपनियों की बड़ी भूमिका है. ये न केवल विकास को रफ्तार देती हैं, बल्कि उस इलाके में रोजगार के नए आयाम भी पैदा करते हैं. अब ऐसे में ये सवाल उठता है कि इस तरह कि तोड़फोड़ से किसे फायदा हो रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 29, 2020, 7:54 PM IST
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नई दिल्ली. किसान आंदोलन (Farm Laws) के नाम पर पंजाब (Punjab) में कई इलाकों में टेलीकॉम कंपनियों (Telecom Companies) के टावर तोड़ने की खबरें आ रही हैं. इससे ये सवाल उठना लाजिमी है कि इसका खामियाजा तो पंजाब के आम लोगों को ही उठाना पड़ रहा है. एक तरफ लोगों को परेशानी तो दूसरी ओर इसका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि पर भी असर पड़ रहा है. बड़ी और मल्टीनेशनल कंपनियां (Multinational Companies) किसी भी देश में निवेश करते समय इस तरह की घटनाओं का खास खयाल रखती हैं. शायद यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने भी आज तोड़फोड़ की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ये संपत्ति किसी नेता या दल की नहीं, बल्कि देश की है.

किसी भी आंदोलन के दौरान इस तरह के दृश्य आम हैं. राजनीतिक फायदों के लिए लोगों को उकसा कर हिंसा का प्रयोग होता रहा है. लेकिन हर बार इस तरह की घटनाओं से आम लोगों को ही नुकसान होता रहा है. मोबाइल टावर की तोड़फोड़ से भी सीधा नुकसान इस कोरोना काल में घर से ऑनलाइन कक्षाएं लेने वाले बच्चों को भुगतना होगा, छोटे व्यवासायी और किसान जो सीधे तौर पर तकनीक से जुड़े हैं, उन्हें महरूम रहना होगा. यही नहीं, देश की छवि को लेकर एक ऐसा संदेश भी जाएगा, जो भारत जैसा विकासशील देश कभी नहीं चाहेगा. कोई भी मल्टीनेशनल कंपनी या बड़ा औद्योगिक घराना जब कहीं निवेश करता है, तो इस तरह की घटनाओं पर बारीकी से नजर रखता है. यही कारण है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने भी आज इस तरह की तोड़फोड़ पर कड़ी चिंता जाहिर की.

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देश की आर्थिक रफ्तार को नुकसान के साथ दुश्मनों को हो रहा नुकसान
देश को आर्थिक गति देने में इन कंपनियों की बड़ी भूमिका है. ये न केवल विकास को रफ्तार देती हैं, बल्कि उस इलाके में रोजगार के नए आयाम भी पैदा करते हैं. अब ऐसे में ये सवाल उठता है कि इस तरह कि तोड़फोड़ से किसे फायदा हो रहा है. जानकारों की मानें तो इस तोड़फोड़ से देश की आर्थिक रफ्तार को तो नुकसान पहुंच ही रहा है, देश की तरक्की पर आंख लगाए देश के दुश्मनों को भी सीधा फ़ायदा होता है. आज अगर देश के उद्योग जगत को नुकसान होगा, तो चीन की कंपनियों को उसका फ़ायदा होगा.



तोड़फोड़ को लेकर देश में टेलीकॉम कंपनियों की सबसे बड़ी संस्था सेलूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी सीओएआई ने भी कड़ी आलोचना की है. सीओएआई (COAI) का कहना है कि मोबाइल सेवाएं आम लोगों के जीवन से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं. लोगों को अपना विरोध करने का अधिकार हैं, लेकिन टेलीकॉम नेटवर्क को नुकसान पहुंचा कर दूसरों को परेशान करना चिंताजनक है.

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संस्था का ये भी कहना है कि इस कोरोना काल में आम आदमी अपनी स्वास्थ्य सेवाओं, छात्र अपनी पढ़ाई और लाखों प्रोफेशनल अपनी नौकरी घर से इंटरनेट के सहारे ही कर रहे हैं, उन सभी पर इनका प्रतिकूल असर पड़ रहा है. सवाल ये भी है कि ऐसे हमले क्या सीधा कोरोना काल के बाद उठने की कोशिश कर रही देश की अर्थव्यवस्था पर हमला नहीं है. क्या देश के टेलीकॉम इंडस्ट्री पर हमला कर सीधा फ़ायदा देश के दुश्मनों जैसे चीन का नहीं है, जिसे भारतीय कंपनियां कड़ी चुनौती दे रही हैं.

साल 2020 के कोरोना काल में देश वासियों की हर जरूरत को पूरा करने में इंटरनेट की बड़ी भूमिका रही है. फिर चाहे वो बच्चों की पढ़ाई हो, या इंटरनेट के जरिए चल रहे छोटे बड़े उद्योग धंधे, या फिर घर बैठे ही डाक्टरों से सलाह मशवरा लेना हो. हिंसा का शिकार हुए मोबाइल टावर के जरिये ही ये सब संभव था..
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