भारी युद्धक टैंकों की आवाजाही के लिए खास बनाए गए हैं नए पुल, सह सकते हैं 70 टन तक भार

ये पुल भारत के सबसे भारी युद्धक टैंकों की आवाजाही का सामना करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं. (सांकेतिक तस्वीर)
ये पुल भारत के सबसे भारी युद्धक टैंकों की आवाजाही का सामना करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

India-China Standoff: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को जिन 44 पुलों का उद्घाटन किया गया है उनमें से 30 पुल लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक वास्तविक नियंत्रण रेखा के रास्ते में पड़ते हैं.

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  • Last Updated: October 13, 2020, 12:25 AM IST
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नई दिल्ली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) ने गुरुवार को सेना के सीमा सड़क संगठन (Border Road Organization) या बीआरओ (BRO) द्वारा निर्मित 44 पुलों का औपचारिक रूप से उद्घाटन किया. ये 44 पुल बीआरओ द्वारा बनाए जा रहे 102 पुलों में से हैं. ये पुल भारत के सबसे भारी युद्धक टैंकों की आवाजाही का सामना करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं. एक अधिकारी ने कहा कि सोमवार को जिन 44 पुलों का उद्घाटन किया गया है उनमें से 30 पुल लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक वास्तविक नियंत्रण रेखा के रास्ते में पड़ते हैं. ये क्लास 70 के पुल हैं; ऐसे पुलों के लिए ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है जिसके बाद वह 70 टन वाहनों के वजन को सहन कर सकते हैं.

भारत का सबसे भारी युद्धक अर्जुन टैंक (Arjun Tank) लगभग 60 टन का है. चीन (China) की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (People's Liberation Army) के वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line of Actual Control) से पीछे न हटने के रुख को देखते हुए भारत ने लगभग 45 टन वाले टी -90 भीष्म टैंक को पूर्वी लद्दाख सेक्टर के स्थानों में स्थानांतरित कर दिया था. ये पुल कनेक्टिविटी में सुधार करेंगे और सैनिकों व सहायक तत्वों के तेजी से विकास की क्षमता देंगे जिससे कि एलएसी पर किसी भी स्थिति का जवाब देने के लिए सशस्त्र बलों की क्षमता में काफी सुधार होगा.

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रणनीतिक गतिविधियों के साथ स्थानीय लोगों को भी होगा फायदा
बीआरओ के चीफ इंजीनियर विजयक ने कहा कि पहले पुल 24 टन वजन सहन कर सकता था. निम्मू पुल 70 टन का भार वहन कर सकता है. यह तीन नए पुलों में से एक है, जिसने NH-I, पर बने सभी पुलों को 70-टन का वजन उठाने की क्षमता वाला बना दिया है. इससे सेना की रणनीतिक गतिविधियों में सुधार होगा और स्थानीय लोगों को संभावित आर्थिक लाभ भी मिलेगा. विजयक ने आगे कहा कि 7 अन्य पुलों का भी आज उद्घाटन किया गया है. इनमें से 1 लेह से मनाली को जोड़ने वाली सड़क पर है, 2 पुल सियाचिन बेस कैंप की सड़क पर हैं, जबकि 1 कारगिल जिले में और 1 दौलत-बेग-पुराना रोड पर है.

इन पुलों में 10 जम्मू-कश्मीर में, आठ लद्दाख में, दो हिमाचल प्रदेश में, पंजाब और सिक्किम में चार-चार तथा उत्तराखंड एवं अरुणाचल प्रदेश में आठ-आठ पुल हैं.

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एक बार में 44 पुलों का उद्घाटन अपने आप में रिकॉर्ड
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उद्घाटन समारोह के अपने संबोधन में सरहदी इलाकों में अवसंरचना में सुधार की उपलब्धि के लिए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की तारीफ की और कहा कि एक बार में 44 पुलों को समर्पित करना अपने आप में एक रिकॉर्ड है. उन्होंने कहा कि बीआरओ का वार्षिक बजट 2008 से 2016 के बीच 3,300 करोड़ रुपये से 4,600 करोड़ रुपये का था. 2021 में 11,000 करोड़ से ज्यादा का हो गया है.

सिंह ने कहा कि कोविड-19 के बावजूद इस बजट में कोई कमी नहीं की गई. सिंह ने कहा कि इन पुलों का निर्माण क्षेत्र में आम लोगों के साथ-साथ सेना के लिए भी फायेदमंद होगा. रक्षा मंत्री ने कहा, " हमारे सशस्त्र बल के कर्मी उन इलाकों में बड़ी संख्या में तैनात हैं जहां साल भर परिवहन उपलब्ध नहीं रहता है." उन्होंने रेखांकित किया कि सीमा अवसंरचना में सुधार से सशस्त्र बलों को काफी मदद मिलेगी.
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