मां का पेट भरने खुद 'बैल' बनकर खेतों में काम कर रहे भाई-बहन

कर्नाटक के कारवार जिले के छोटे से गांव में एक परिवार इस कदर आर्थिक तंगी से जूझ रहा है कि परिवार के लोगों के पास खाने के लिए अनाज भी नहीं है.

News18Hindi
Updated: June 13, 2019, 12:55 PM IST
मां का पेट भरने खुद 'बैल' बनकर खेतों में काम कर रहे भाई-बहन
कर्नाटक के कारवार जिले में भाई-बहन अपने हाथों से खेतों को जोतते हैं.
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Updated: June 13, 2019, 12:55 PM IST
कर्नाटक के कारवाड़ जिले के छोटे से गांव में एक परिवार इस कदर आर्थिक तंगी से जूझ रहा है कि परिवार के लोगों के पास खाने के लिए अनाज तक नहीं है. उनके पास खेत तो है, लेकिन उसे जोतने के लिए न तो बैल हैं न ही कोई साधन. यही कारण है कि अपने परिवार की भूख मिटाने के लिए भाई-बहन ने बैल बनकर खेत जोतना शुरू कर दिया है.

जानकारी के अनुसार कारवार जिले के एक छोटे से गांव में रहने वाले गिरिधर गुनागी (30) और उनकी बहन सुजाता गुनागी (25) तेज गर्मी में अपने हाथ से खेतों को जोतते हैं. दोनों भाई-बहन अपने हाथ से खेत को जोतते हैं और बारिश से पहले ही अनाज और सब्जियां भी बो देते हैं. बताया जाता है कि गिरिधर को आर्थराइटिस की दिक्कत है. दर्द होने के बावजूद गिरिधर हर रोज खेत जाते हैं और वो सभी काम करते हैं जो उनके खेत के लिए जरूरी होता है.



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गिरिधर ने बताया कि जब वह तीन साल के थे तब से उन्हें आर्थराइटिस है. उन्होंने किसी तरह आठवीं तक पढ़ाई की लेकिन पैसों की तंगी के कारण वह आगे नहीं पढ़ सके. बीमारी इतनी बढ़ गई है कि वह हर रोज दवा खाकर ही खेतों का काम कर पाते हैं. गिरिधर की बहन सुजाता ने बताया कि मैं और मेरा भाई अपनी मां के साथ रहते हैं. मां की उम्र अब 70 साल हो चुकी है. हम भाई-बहन खेती करते हैं और मां उसे बाजार में बेचने जाती है. हम खेतों में काम करने के लिए पशु या कोई दूसरा साधन नहीं खरीद सकते. यही कारण है कि हम दोनों अपने हाथों से ही पूरे खेत को जोतते हैं. हम रोज सुबह दो घंटे और शाम को दो घंटे खेत जोतने का काम करते हैं.'

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सुजाता ने बताया कि हमारे घर की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है. कृषि विभाग से सब्सिडी वाला टिलर लेने गए थे लेकिन वहां से हमे खाली हाथ लौटना पड़ा. मेरे भाई के शरीर में रोज तेज दर्द होता है. वह चीखता है और दवा खाकर सो जाता है और अगले दिन फिर हम खेतों में काम करने लगते हैं.

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