कर्नाटक विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने के बाद भी येडियुरप्पा के सामने हैं ये तीन चुनौतियां

येडियुरप्पा ने चौथी बार कर्नाटक के सीएम पद की शपथ लेने से कुछ घंटे पहले ही अपने नाम की स्पेलिंग बदल डाली. तीन दिन बाद वह विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने में सफल रहे. अब भी उनके कार्यकाल पूरा करने की राह में कई अड़चनें हैं, जिनसे उन्हें पार पाना ही होगा.

News18Hindi
Updated: July 30, 2019, 9:26 PM IST
कर्नाटक विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने के बाद भी येडियुरप्पा के सामने हैं ये तीन चुनौतियां
विधायकों के इस्तीफों के बाद खाली हुई 17 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होंगे. बीजेपी को बहुमत के लिए जरूरी 113 विधायकों का आंकड़ा हासिल करने के लिए इनमें कम से कम 8 सीटों पर जीत दर्ज करनी ही होगी. अगर ऐसा नहीं हुआ तो कर्नाटक में बीजेपी सरकार मुश्किल में पड़ जाएगी.
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Updated: July 30, 2019, 9:26 PM IST
कर्नाटक के सीएम बीएस येडियुरप्पा ने कई सप्ताह चले सियासी नाटक और तनाव भरे माहौल के बीच सोमवार को राज्य विधानसभा में बहुमत साबित कर दिया. बावजूद इसके उनकी चिंताएं खत्म नहीं हो रही हैं. चौथी बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से कुछ घंटे पहले ही उन्होंने अपने नाम की स्पेलिंग भी बदल दी. तीन दिन बाद वह विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने में भी सफल रहे. हालांकि, उन्हें आने वाले समय में कम से कम तीन चुनौतियों का सामना तो करना ही होगा.

निर्दलीय विधायक के साथ से येडियुरप्पा की राह हुई आसान

येडियुरप्पा ने 14 कांग्रेस और 17 जदएस विधायकों के इस्तीफे के बाद सदन में बहुमत साबित करने में सफलता हासिल की. दरअसल, विधायकों के इस्तीफे के बाद विधानसभा में कुल सदस्यों की संख्या 225 से घटकर 208 रह गई यानी बहुमत के लिए 105 विधायकों के समर्थन की दरकार रह गई. कर्नाटक विधानसभा में बीजेपी के 105 विधायक ही हैं. वहीं, पार्टी को एक निर्दलीय विधायक का साथ मिलने से येडियुरप्पा की राह बहुत आसान हो गई.

बीजेपी को हर हाल में जीतनी होंगी कम से कम 8 सीटें

अब कांग्रेस और जदयू विधायकों के इस्तीफे से खाली हुई 17 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होंगे. बीजेपी को बहुमत के लिए जरूरी 113 विधायकों का आंकड़ा हासिल करने के लिए इनमें कम से कम 8 सीटों पर जीत दर्ज करनी ही होगी. अगर बीजेपी 8 से कम सीटें जीतती है तो येडियुरप्पा के लिए मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी. येडियुरप्पा को कर्नाटक का सीएम बने रहने के लिए उपचुनाव की इस चुनौती पर हर हाल में पार पाना होगा.

बीजेपी का 75 साल उम्र सेवानिवृत्ति का अलिखित नियम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में बीजेपी ने नेताओं की सेवानिवृत्ति के लिए 75 साल की उम्र का अलिखित नियम बनाया है. इसी प्रक्रिया के तहत पार्टी के वरिष्ठ नेता एलके आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और शांता कुमार को मोदी सरकार 1.0 से बाहर रखा गया था. पार्टी ने 2014 में एक मार्गदर्शक मंडल बनाकर आडवाणी और जोशी को उसमें जगह दे दी.
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बीजेपी ने नेताओं की सेवानिवृत्ति के लिए 75 साल की उम्र का अलिखित नियम बनाया है. अगर यह नियम येडियुरप्पा पर भी लागू हुआ तो वह एक बार फिर बतौर सीएम अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएंगे.


मोदी मंत्रिमंडल में एक भी नेता 75 साल से ज्यादा का नहीं

बीजेपी ने 75 की दहलीज लांघने वाले वेंकैया नायडू और नजमा हेपतुल्ला जैसी मोदी सरकार की मंत्रियों को मंत्रिमंडल से हटा दिया. नजमा हेपतुल्ला को राज्यपाल बना दिया गया और नायडू को देश का उपराष्ट्रपति बना दिया गया. इस समय मोदी मंत्रिमंडल में एक भी नेता 75 साल से ज्यादा उम्र का नहीं है. वहीं, येडियुरप्पा पहले ही 76 साल के हो चुके हैं. फिलहाल वह बीजेपी के इस अलिखित नियम के लिए अपवाद हैं. अगर इस बार वह मुख्यमंत्री के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा कर पाते हैं तो वह 2023 में 80 साल के हो जाएंगे.

कर्नाटक में होने वाले सियासी बदलावों पर नजर रखेगी बीजेपी

ऐसा लगता नहीं है कि येडियुरप्पा को अपना कार्यकाल पूरा करने दिया जाएगा. हालांकि, बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा का कहना है कि सीएम पद के लिए येडियुरप्पा पार्टी का स्वाभाविक चयन है. वह कर्नाटक में बीजेपी विधायक दल के नेता थे. वह विधायक दल के चुने हुए नेता हैं. यह सतत प्रक्रिया है और पार्टी समय-समय पर होने वाले बदलावों पर नजर रखेगी. अगर पार्टी आयुसीमा के अपने नियम पर रहती है तो आज या कल येडियुरप्पा को भी हेपतुल्ला या नायडू की तरह हटा दिया जाएगा.

उम्र के कारण हटाया तो चौथी बार होगा येडियुरप्पा का दुर्भाग्य

अगर येडियुरप्पा को उम्र के आधार पर हटाया जाता है तो यह चौथी बार उनका दुर्भाग्य होगा. वह पिछली तीन बार भी बतौर सीएम अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए थे. उन्होंने पहली बार नवंबर, 2007 में कर्नाटक के सीएम की शपथ ली. सात दिन बाद ही जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने समर्थन वापस लेकर सरकार गिरा दी. इसके बाद 2008 में येडियुरप्पा फिर सीएम बने. इस बार अवैध खनन के मामले में नाम आने के बाद जुलाई, 2011 में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. तीसरी बार वह मई, 2018 में मुख्यमंत्री बने और महज तीन दिन बाद ही विधानसभा में बहुमत साबित नहीं करने के कारण पद छोड़ना पड़ा.

इस्तीफा देने वाले और बीजेपी के दावेदारों को साधना होगा

बीजेपी उपचुनाव में सभी 17 सीटों पर अपने उम्मीदवारों को उतार सकती है. पिछले विधानसभा चुनाव में इन सीटों पर बीजेपी के हारे हुए उम्मीदवार फिर दावा ठोक सकते हैं. येडियुरप्पा के सामने इस्तीफा देने वाले 17 विधायकों और अपनी ही पार्टी के दावा करने वाले नेताओं को साधने की बड़ी चुनौती होगी. हालांकि, अगर इस्तीफा देने वाले सभी विधायकों को चुनाव लड़ने से रोक दिया जाता है तो येडियुरप्पा की मुश्किल आसान हो सकती है. कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर केआर रमेश कुमार ने पद छोड़ने से पहले सभी 17 विधायकों को पूरे कार्यकाल के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था. इनमें कुछ ने फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. अगर सुप्रीम कोर्ट विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को बरकरार रखता है तो येडियुरप्पा राहत की सांस लेंगे.

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First published: July 30, 2019, 9:26 PM IST
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