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GPR से और मजबूत होगी बीएसएफ, गृह मंत्रालय ने दी फील्ड ट्रायल की मंजूरी

सूचना के बाद बाखासर थानाधिकारी CO चौहटन भी मौके पर पहुंच गए. (फाइल फोटो)

सूचना के बाद बाखासर थानाधिकारी CO चौहटन भी मौके पर पहुंच गए. (फाइल फोटो)

BSF को ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) के फील्ड ट्रायल की अुनमति मिल चुकी है. लेकिन सबसे पहले ये समझना जरूरी है की ये आधुनिक तकनीक से लैस ये किस तरह का उपकरण है और कैसे काम करता है.

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नई दिल्ली. देश की सीमावर्ती इलाकों में तैनात बीएसएफ (BSF ) जिसे फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस भी कहा जाता है. अब बीएसएफ को जल्द ही बेहद आधुनिक उपकरणों से लैस जीपीआर यानी ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार ( Ground Penetrating radar) मिलने वाला है. उसके लिए केन्द्रीय गृह मंत्रालय (Home ministry ) से अनुमित मिल चुकी है. बीएसएफ अब उसका फील्ड ट्रायल करेगी . फील्ड ट्रायल करने से बीएसएफ के जवान इस जीपीआर की तमाम ऑपरेशन और ऑपरेशन को अंजाम देने संबंधी मुश्किलें और जानकारियां से वाकिफ हो जाएगें. जिससे सीमावर्ती इलाकों में काफी मदद मिलने की संभावना है.

गौरतलब है कि सीमावर्ती इलाकों में कई स्थानों पर अक्सर आतंकियों द्वारा तो कभी दूसरे देश के घुसपैठियों और वहां की सेनाओं द्वारा आईईडी विस्फोटक लगाया दिया जाता है. जिसको मॉनिटर करने के लिए और उससे बचने के लिए ये मशीन काफी कारगर साबित हो सकता है. इस फैसले से बीएसएफ मुख्यालय में भी काफी चर्चा है. पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ लगे सीमावर्ती इलाका में सबसे पहले बीएसएफ के जवानों द्वार इसका ट्रायल किया जाएगा. क्योंकि पाकिस्तान से सटी हुई सीमावर्ती इलाके में बीएसएफ की तैनाती है. बीएसएफ द्वारा इसका फील्ड ट्रायल करने के बाद अन्य दूसरे अर्धसैनिक बलों को भी जल्द ही इसकी इजाजत दे दी जाएगी. दरअसल इस मामले में गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बताया था की इसी मामले में 8 जुलाई को एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी. जिसके बाद जीपीआर की फील्ड ट्रायल की अनुमति बीएसएफ को प्रदान की गई.

क्या होता है जीपीआर?
सीमा सुरक्षा बल को ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार के फील्ड ट्रायल की अुनमति मिल चुकी है. लेकिन सबसे पहले ये समझना जरूरी है की ये आधुनिक तकनीक से लैस ये किस तरह का उपकरण है और कैसे काम करता है. दरअसल इस तकनीक से बगैर जमीन की खुदाई के ही ये पता लगाया जा सकता है की जमीन के नीचे क्या कोई आईडी विस्फोटक (IED ) छुपाया गया है या नहीं और अगर छुपाया गया है तो जमीन के कितने नीचे उसे छुपाकर रखा गया है. जो काफी आधुनिक तरीके से कार्य करता है और अगर जमीन के नीचे कोई विस्फोटक होगा तो जीपीआर के मॉनिटरिंग स्क्रीन पर तुरंत अलर्ट करने का संकेत देना शूरू कर देगा. जिससे की सीमावर्ती इलाकों में इससे पेट्रोलिंग और मूवमेंट करने में आसानी होगी. इस मशीन में दो और चार पहिए वाले साइकिल नुमा मशीन होता है. इस पूरे मशीन का वजन करीब पांच किलो होता है. जिसके ऊपर एक lCD मॉनिटर और स्पीकर लगा होता है . ये प्रेशर प्लेट और माइन (Anti personnel- anti vehicle) से संबंधित मसलों को बेहत सटीक समय पर उचित गणना के साथ तमाम जानकारियों से आपको अवगत करा देता है.

इसके फील्ड टेस्टिंग के लिए काफी महत्वपूर्ण मानक भी तैयार किए गए हैं, जो प्रमुख तौर पर इस प्रकार से हैं-
> इसे उच्च तापमान पर रखकर देखा जाएगा की कितने उच्च तापमान तक ये काम कर सकता है और > कितने तापमान से कम या उच्च होने पर ये काम करना बंद कर देता है.
> ट्रांजिट बाइव्रेसन
> ट्रांजिट ड्रॉप
> कम से कम 20 डिग्री तापमान पर इसका प्रयोग.
> ऑपरेशनल करीब 55 डिग्री से ज्यादा पर इसका प्रयोग.
> स्टोरेज की उच्च और निम्न झमता.
> इसकी क्वालिटी यानी गुणवता IP68 की रेटिंग होनी चाहिए.

इसकी क्वालिटी यानी गुणवता IP68 की रेटिंग होनी चाहिए.गृह मंत्रालय के द्वारा इस जीपीआर मशीन और ज्यादा से ज्यादा खरीदने के लिए टेंडर प्रकिया भी जारी कर चुकी है. आने वाले दिनों मे इसकी काफी संख्या में खरीदारी करने की योजना गृह मंत्रालय और बीएसएफ के द्वारा प्रोजेक्ट तैयार हो चुकी है. इस आधुनिक उपकरण से निश्चित ही तौर पर बीएसएफ और हमारी सीमावर्ती इलाकों में पेट्रोलिंग काफी मजबूत और सुरक्षित होगी.

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