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पढ़ें: अरुण जेटली ने अपने बजट में कैसे अमीरों पर बोझ बढ़ाकर गरीबों को दी राहत

पढ़ें: अरुण जेटली ने अपने बजट में कैसे अमीरों पर बोझ बढ़ाकर गरीबों को दी राहत

आज के अरुण जेटली ने भी अमीरों, मालदारों का बोझ बढ़ाकर गरीबों का बोझ हल्का किया। किसानों को राहत दी, स्वास्थ्य दिया औऱ देश को नई सड़कें दीं। इधर का बोझ उधर।

    नई दिल्ली। रॉबिनहुड वो किरदार है जो इंग्लैंड में एक जमाने में जनता का बड़ा हीरो था, वो राजशाही के खिलाफ जनता को एकजुट करता था, अमीरों से पैसा लेकर उन्हें गरीबों में बांट देता था और वो अदभुत तीरंदाज भी था, उसका निशाना कभी नहीं चूकता था। क्या भारत को भी एक ऐसा ही रॉबिनहुड चाहिए था? आज वित्त मंत्री अरुण जेटली जैसे वही रॉबिनहुड बन गए और उन्होंने अपने बजट में अमीरों पर बोझ डालकर गरीबों, किसानों के लिए और देश की नई सड़कों के लिए पैसा जुटाया। इसलिए अरुण जेटली को आज बजट वाले रॉबिनहुड कह रहे हैं। जेटली का पहला तीर चलते ही कारे महंगी हो गईं, सिगरेट गुटखा महंगा हो गया और सोने और हीरे के गहने भी महंगे हो गए।

    सवा सौ करोड़ लोगों का मुल्क बजट के इंतजार में टकटकी लगाए था। 63 साल के वित्त मंत्री के ब्रीफकेस में क्या है, टैक्स बढ़ेगा या छूटेगा, कॉरपोरेट या खेत खलिहान या दोनों का संगम, सुबह 11 बजे बजट की शुरुआत विपक्ष के हंगामे से हुई। लोकसभा अध्यक्ष को हस्तक्षेप करना पड़ा। फिर तो वो हो गया जो पहले शायद ही कभी हुआ हो। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जैसे रॉबिन हुड का चोला पहन लिया, वो रॉबिन हुड जो इंग्लैंड में निरंकुश राजशाही के खिलाफ जनता का लोकप्रिय चेहरा था, जिसका हर तीर निशाने पर लगता था, जो अमीरों से पैसे छीन कर गरीबों में बांट देता था। आज के रॉबिन हुड ने भी अमीरों, मालदारों का बोझ बढ़ाकर गरीबों का बोझ हल्का किया। किसानों को राहत दी, स्वास्थ्य दिया औऱ देश को नई सड़कें दीं। इधर का बोझ उधर, जोखिम उठाया और कार चलाने वालों पर पहली चपत लगाई।

    डीजल और पेट्रोल से चलने वाली कारें महंगी, छोटी पेट्रोल, एलपीजी, सीएनसी कारों पर 1 फीसदी इंफ्रास्क्ट्रचर सेस लगा। जबकि डीजल कारों पर ये सेस 2.5 फीसदी लगा। वहीं महंगी डीजल कारों और एसयूवी पर 4 फीसदी सेस लग गया। यानि हर तरह की कारें महंगी कर दी गईं। इतना ही नहीं सिगरेट, सिगार, गुटखा भी महंगा हो गया।

    कोयला भी महंगा हो गया, मुमकिन है आने वाले दिनों में बिजली के दाम बढ़ जाएं। ब्रांडेड और रेडीमेड कपड़े महंगे हुए। गहने के शौकीन अमीरों के लिए भी बुरी खबर आई। सोना, हीरा महंगे हो गए। इसके अलावा आज के रॉबिन हुड ने सभी कर योग्य सेवाओं पर 0.5 फीसदी कृषि कल्याण सेस लगा दिया। यानि सर्विस टैक्स के दायरे में आने वाली सभी 100 से ज्यादा चीजों के दाम बढ़ जाएंगे। यानी ट्रेन और हवाई यात्रा महंगी। होटल और रेस्तरां में खाना महंगा। ब्यूटी पार्लर और जिम जाना भी महंगा। फिल्म देखना भी ज्यादा खर्चीला हो जाएगा। केबल टीवी का बिल भी बढ़ जाएगा। गाड़ी की सर्विसिंग करवाना महंगा हो जाएगा। एजेंट से सामान्य बीमा या जीवन बीमा लेना महंगा। मूवर्स एंड पैकर्स से सामान शिफ्ट करवाना महंगा। सीए की सेवाएं लेना महंगा। क्लब की सदस्यता, कमर्शियल ट्रेनिंग, कोचिंग भी महंगी। कॉस्मैटिक और प्लास्टिक सर्जरी महंगी। कूरियर महंगा। क्रेडिट, डेबिट कार्ड से जुड़ी सेवाएं महंगी। ड्राई क्लीनिंग, ईवेंट मैनेजमेंट, हेल्थ क्लब, फिटनेस सेंटर, वकील की फीस, लॉटरी, आउटडोर कैटरिंग, पंडाल-शामियाना सर्विस भी महंगी हो जाएंगी।

    जाहिर है आज के रॉबिनहुड ने उन चीजों के दाम बढ़ाए जो पैसे वाले लोग ही ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। यानि सरकार ने किसानों को लाभ देने और सड़कें बनाने केलिए यहां से पैसा उठाया। कुछ चीजों के दाम घटाए भी गए। जूते-चप्पल, सौर ऊर्जा से चलने वाले लैंप, हाइब्रिड इलेक्ट्रिक गाड़ियां, डायलिसिस में काम आने वाले उपकरण, इंटरनेट राउटर, मॉडेम, सेट टॉप बॉक्स, सीसीटीवी कैमरे और डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर, 60 वर्ग मीटर से कम आकार के मकान, माइक्रोवेव ओवन, सैनिटरी पैड सस्ता हो गया।

    बजट में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का भी जिक्र आया। जेटली ने कहा कि राहुल ने सुझाव दिया था कि नेत्रहीनों के लिए ब्रेल पेपर सस्ता होना चाहिए। सरकार ने ये कर दिया। जाहिर है वो इस बजट को भविष्य की झांकी बता रहे हैं, वहीं विपक्ष रटे-रटाए अंदाज में इसे कॉरपोरेट बजट कह रहा है।

    कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि किसानों का कर्ज माफ करने की जिम्मेदारी उनकी थी जो कि उन्होंने किया नहीं। पहले भी कॉर्पोरेट के फेवर थे अभी भी उनके लिए ही है। ये सिर्फ इनकम टैक्स बजट है।

    लेकिन जानकार तो साफ कह रहे हैं कि ये मोदी सरकार का समाजवादी चेहरा है, ये खेत-खलिहानों का बजट है, ये किसानों का बजट है और सरकार का एक नारा है ‘चलो गांव की ओर’।

    Tags: Budget 2016

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