OPINION: चुनावी साल में 'कुछ हटके' बजट से कितना फायदा कमा पाएगी बीजेपी?

पिछले 5 बजटों से मोदी सरकार ने आयकर में इतनी बड़ी छूट नहीं दी. आय बचत निवेश योजनाओं से अब 6.50 लाख रुपए तक सालाना आय वालों पर कोई टैक्स नहीं लगेगा.

फर्स्टपोस्ट.कॉम
Updated: February 1, 2019, 9:56 PM IST
OPINION: चुनावी साल में 'कुछ हटके' बजट से कितना फायदा कमा पाएगी बीजेपी?
(फाइल फोटो- पीयूष गोयल)
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Updated: February 1, 2019, 9:56 PM IST
राजेश रपरिया

अंतरिम वित्त मंत्री पीयूष गोयल के पेश फुल चुनावी बजट की नीयत, नीति और निष्ठा से साफ है कि यह प्रधानमंत्री बचाओ बजट है, लेकिन पेश बजट ने मोदी सरकार के दावों पर विफलता का ठप्पा लगा दिया है. बजट के कल्याणकारी प्रावधानों का स्पष्ट संदेश है कि प्रधानमंत्री मोदी का आत्मविश्वास सिरे से हिला हुआ है. अंतरिम चुनावी बजट में अंतरिम वित्त मंत्री पीयूष गोयल की कौन-सी राहत या घोषणा सबसे बड़ी मानी जाए, यह तय करना मुश्किल है.

पिछले चार साढ़े चार सालों से प्रधानमंत्री मोदी किसानी-खेती पर बड़े-बड़े दावे करते रहे हैं कि कृषि और उससे संबंधित बजट कांग्रेस के 2009-2014 से दोगुना हुआ है. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को युगांतरकारी योजना बताया गया था. 13 करोड़ मृदा कार्ड बनाए गए हैं. किसानों को मिलने वाला कर्ज रिकॉर्ड स्तर पर है. बीज से बाजार किसानी बदलने के दावे थे. लेकिन गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ के चुनावों से साफ हो गया था कि किसानों में गहरा असंतोष है. इसका नतीजा है किसान सम्मान निधि योजना.

इसके तहत 5 एकड़ जोत वाले किसानों को सालाना छह हजार रुपए दो-दो हजार की किस्तों में दिए जाएंगे. इस योजना का खर्च पूरी तरह केंद्र सरकार वहन करेगी, यानी गैर-बीजेपी राज्यों में चुनावों में भुनाने का पूरा स्कोप मोदी सरकार ने अपने हाथ में रखा है. वित्त मंत्री ने इस योजना के लिए वर्तमान वित्त वर्ष में 20 हजार करोड़ रुपए और 2019-20 के लिए 75 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है. वित्त मंत्री का आकलन है कि इससे 12 करोड़ किसान परिवारों को फायदा होगा.

सिंचाई परियोजनाओं पर कोई विशेष कदम इस बजट भाषण में नहीं दिखाई दिए
वित्त मंत्री के भाषण से साफ है कि इसमें खेतिहर मजदूर और बेरोजगार शामिल नहीं हैं. यह इस योजना की सबसे बड़ी खामी है. मोदी सरकार का यह मास्टर स्ट्रोक किसानों के असंतोष को कितना को कितना दूर कर पाएगा, इसका पता तो केवल आगामी लोकसभा चुनावों के नतीजों से चलेगा. पर इतना तय है कि 6 हजार रुपए सालाना की मदद से किसानों की माली हालत नहीं बदलेगी.

हमारी कृषि विकास दर में कितनी वृद्धि होगी, इस बारे में वित्त मंत्री ने एक शब्द कहना भी मुनासिब नहीं समझा. मोदी राज में औसत कृषि विकास दर मनमोहन सिंह राज से आधी है. किसानों को उपजों का उचित दाम दिलाने के लिए सरकार ने कोई घोषणा बजट में नहीं की है. सिंचाई परियोजनाओं पर कोई विशेष कदम इस बजट भाषण में नहीं दिखाई दिए हैं, जिस पर मोदी सरकार को नाज था.
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लेकिन 5 लाख रुपए सालाना आय पर कोई टैक्स नहीं होने की घोषणा ने सबको चकित कर दिया है. पिछले 5 बजटों से मोदी सरकार ने आयकर में इतनी बड़ी छूट नहीं दी. आय बचत निवेश योजनाओं से अब 6.50 लाख रुपए तक सालाना आय वालों पर कोई टैक्स नहीं लगेगा. इससे 5 लाख रुपए सालाना आय वालों को तकरीबन 12,500 रुपए की सीधी टैक्स बचत होगी. आयकर को 5 लाख रुपए तक कर मुक्त करने का वायदा भी बीजेपी ने पिछले लोकसभा चुनावों में किया था. इसके अलावा मानक कटौती भी 40,000 रुपए से बढ़ाकर 50,000 रुपए सालाना कर दी है.

(यह भी पढ़ें-  कैसा रहा अंतरिम बजट 2019 जानने के लिए यहां करें क्लिक.)

यह बजट मोदी बचाओ बजट के रूप में याद किया जाएगा
बीमा और पेंशन जैसे शब्दों से प्रधानमंत्री मोदी का भारी लगाव है. लेकिन बीमा और पेंशन योजनाओं का कोई लाभ चुनावों में बीजेपी को नहीं मिला है. इस बार असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए पेंशन योजना लाई गई है. इससे 60 साल की उम्र तक कामगार को 100 रुपए महीना देना होगा, लेकिन जो 18 साल की उम्र से पेंशन योजना का हिस्सा बनेंगे, उनको 55 रुपए महीना ही देना होगा. 60 साल के बाद रिटायर होने पर तीन हजार रुपए की पेंशन हितधारक को मिलेगी.

सब मिलाकर यह योजना काबिले-तारीफ है. वित्त मंत्री का अनुमान है कि इससे असंगठित क्षेत्र के 10 करोड़ लोगों को लाभ होगा. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि रोजगार होगा, तभी पेंशन योजना का लाभ होगा. दूसरा बेरोजगारी पिछले 45 साल में सर्वोच्च स्तर पर है. मोदी सरकार रोजगार संबंधी रिपोर्ट पर कुंडली मार कर बैठी हुई है.

बजट के आय-व्यय पर वित्त मंत्री ने कुछ खास नहीं बताया है. राजकोषीय नीति के अनुसार अगले वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद का 3.1% होना चाहिए था, जिसे 3.4% रखा गया है. आय-व्यय का कोई भरोसेमंद ब्यौरा नहीं है. बजट का हिसाब-किताब पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के ड्रीम बजट की तरह ही कच्चा दिखाई देता है. छोटे उद्योगों के लिए, आपदाग्रस्त किसानों के लिए ब्याज सहायता देने की बात बजट में कही गई है. अंतरिम बजट में इतनी चुनावी घोषणाएं कभी नहीं की गईं. कुल मिलाकर यह बजट मोदी बचाओ बजट के रूप में याद किया जाएगा.

(यह लेखक के स्वतंत्र विचार हैं. लेखक वरिष्ठ पत्र​कार और आर्थिक मामलों के जानकार हैं.)

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