Opinion: PM नरेंद्र मोदी के 2014 से विकसित होते विजन को गति देता है सीतारमण का Budget 2019

बजट में वित्तीय समझदारी के साथ अनुशासन भी दिखता है, इसमें बीजेपी के जनाधार को भी आश्वास्त किया गया है

Jagdish Upasane | News18Hindi
Updated: July 5, 2019, 7:47 PM IST
Opinion: PM नरेंद्र मोदी के 2014 से विकसित होते विजन को गति देता है सीतारमण का Budget 2019
पीएम नरेंद्र मोदी की शब्दावली भी बजट में दिखती है
Jagdish Upasane
Jagdish Upasane | News18Hindi
Updated: July 5, 2019, 7:47 PM IST
देश की पहली महिला वित्त मंत्री के बतौर निर्मला सीतारमण के सर्वस्पर्शी बजट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों, कार्यक्रमों और उद्देश्यों की गहरी छाप साफ देखी जा सकती हैं. यह बजट, जिसमें सबके लिए कुछ न कुछ लेकिन दीर्घकालिक लक्ष्य और निरंरतरता बनाए रखने के इरादे के साथ है, दरअसल 2014 से मोदी के निरंतर विकसित होते विजन को गति देने वाला महत्वपूर्ण कदम है. यह समूचे भारत को संबोधित करता है और उसकी सुध लेता है. दिलचस्प यह कि ऐसा करते हुए वित्तीय समझदारी और अनुशासन का पालन भी करता है.

महज आर्थिक दस्तावेज नहीं रहा बजट

मोदी राज में बजट को मुख्यतः उद्योग-व्यापार-व्ययसाय और मुद्रा के लेनदेन तथा मध्यम वर्ग तक लक्षित रखने की अंग्रेजी राज से चली आ रही परंपरा से हटकर एक नयी लीक डालने की कोशिश 2014 से होती रही है. अब बजट को सिर्फ एक आर्थिक दस्तावेज या आय-व्यय का हिसाब नहीं, बल्कि समाज के सर्वांगीण विकास के सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपकरण के बतौर प्रयोग किया जा रहा है.

कहां से आया ये विजन

मोदी जबसे प्रधानमंत्री पद पर आसीन हुए हैं, उन्होंने देश के गांव, गरीब और किसान को अपनी सरकार की सारी योजनाओं के केंद्र में रखा है. मोदी संभवतः स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद पहले ऐसे नेता है जिन्होंने गरीब के सर्वांगीण विकास को सिर्फ उसकी आर्थिक उन्नति तक सीमित नहीं रखा. आर्थिक के साथ सामाजिक विकास की धारा भी उसी तत्परता और विश्वास से उनके राज में आगे बढी. राजनैतिक नेता अमुमन सामाजिक मुद्दों पर भाषण देने तक सीमित रहते हैं लेकिन मोदी ने सामाजिक विषयों को भी राजनीति एजेंडे पर काम करने जैसी तत्परता से उठाया. स्वच्छता अभियान, 'मन की बात' के जरिए व्यक्ति तथा परिवार के साथ खरी-खरी बात और अब जल बचाओ अभियान. यह भी सामान्य लगभग लोगों को साथ लेकर. इसमें मोदी की पृष्ठभूमि, उनके संस्कारों और गैर-राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में समाज में रहकर लंबे समय काम करने के अनुभव का बहुत बडा योगदान है.

मोदी की शब्दावली

समाज-सुधारक की प्रधानमंत्री की भूमिका उनकी सरकार के हरेक बजट कमोबेश पहले भी दिखी लेकिन सीतारमण ने बडी स्पष्टता से अपने बजट में उसे पेश किया है. उन्होंने मोदी के शब्द दोहराए कि यह दस्तावेज "लोगों की आशा, आकांक्षा और विश्वास" की बानगी है. मोदी ने बजट को 'न्यू इंडिया' की दिशा में एक बडा कदम बताया जो 21वीं सदी के भारत की अपेक्षाएं पूरा करने" में समर्थ होगा. मोदी गरीब, वंचित और शोषितों को अपने संबोधनों, कार्यक्रमों और अभियानों में बार-बार संबोधित और लक्षित करते हैं. ऐसा करते हुए उन्होंने अपनी पार्टी के लिए जो समर्थक वर्ग पिछले पांच वर्ष में खडा किया है, वह भाजपा के परंपरागत समर्थक वर्ग से न सिर्फ अलग है, बल्कि गांवों, झुग्गी-झोंपडियों में, खेत-खलिहानों, गिरि-कंदराओं में बसने वाले "असली भारत" का अंग है. ये समाज के दबे-कुचले, जातिगत पायदान पर नीचे माने जाने वाले लोग हैं, जिनकी गरीबी हटाने तथा उनकी जिंदगी आसान करने का ढोल तो बहुत पीटा गया लेकिन वास्तव में उनकी सुध नहीं ली गयी.
Loading...

सबको समेटा गया

मोदी ने पिछले पांच साल में इसे धडाकेदार ढंग से जिद के साथ चलाया. नतीजतन समाज का, दरअसल पीछे छोड़ दिया गया तीन चौथाई हिस्सा मोदी के साथ उठ खडा हो गया. सीतारमण के बजट में खेती, किसान, गरीब, गांव, परंपरागत कारीगर, ग्रामीण महिला उद्यमी, श्रमिक, छोटे दुकानदार,आदि के लिए उठाए गये छोटे-छोटे कदम मोदी के इस विजन को आगे बढाते हैं. गांव के हर गरीब को छत, उसके घर को जल, शुद्ध कुकिंग गैस, बिजली, सड़क और उसके परंपरागत हुनर को वैश्विक बाजार के लायक मापदंड तथा कर्ज या ब्याज में छूट देकर प्रोत्साहन, एग्रो-इंडस्ट्री के उद्यमी तैयार करने के लिए लाइवलीहुड बिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर जैसे कदम इसे आगे बढाते हैं.

गांव, गरीब किसान, Village, Poor,
गांव, गरीब किसान का खास ध्यान रखा गया


किसानों के लिए खास

किसानों की आय 2020 तक दोगुनी करने का लक्ष्य अभी असंभव-सा दिखता है लेकिन अगर आप इस बजट के नेशनल वेयरहाउसिंग ग्रिड, परंपरागत फसलों की खेती के अलावा कृषि के सहायक उपक्रमों- जैसे मछली, मुर्गी, रेशम के कीड़े, मधुमक्खी पालन आदि को दी गयी छूट को देखें और पिछले पांच साल में मिट्टी की उर्वराशक्ति की जांच, यूरिया के नये रूप, फसल बीमा, बढी हुई एम एस पी, सम्मान निधी जैसे कदमों पर गौर करें तो किसानों का परंपरागत फसलों के अलावा अधिक आय देने वाली फसलों की ओर रूख करने में कोई रुकावट नहीं दिखती. यह दृष्टि महज गांव-गरीब पर केंद्रित नहीं है. नयी तकनीक, नूतन से नूतन प्रौद्योगिकी, डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल जितना पिछले पांच वर्ष में बढा है वैसा पहले कभी नहीं बढा.

युवा भारत पर जोर

मोदी ओर उनकी वित्तमंत्री बखूबी जानती है कि यह युवा भारत है. इसलिए युवाओं से जुड़ी सारी योजनाओं को आर्थिक बल दिया गया. स्टार्टअप, स्टैंड अप, डिजिटल इंडिया, नवाचार-शोध, उच्च शिक्षा को वैश्विक स्तर पर लाना जैसे कदमों में इसकी झलक मिलती है. एम एस एम एम ई सेक्टर के उद्धार पर सीतारमण के बजट में ठोस उपाय भी दिखते हैं. ये सारे कार्यक्रम न केवल विकासोन्मुख हैं, बल्कि स्वयं रोजगार देने वाले भी हैं. मोदी सरकार सशक्त भारत, समर्थ भारत का लक्ष्य लेकर चल रही है. इसलिए सीतारमण ने 'मेक इन इंडिया' को ताकतवर बनाने के लिए बडे कदम उठाए हैं. एक तरफ भारत में निर्माण होने वाली वस्तुओं पर आयात शुल्क बढा दिया तो दूसरी ओर मेक इन इंडिया में सोलर पावर चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर, कंप्यूटर सर्वर, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरण आदि अभिनव प्रौद्योगिकी के उद्योगों, बडी विनिर्माण इकाइयों में विदेशी उद्यमियों को भी न्यौता दिया गया.

छूट लेकिन सावधानियां भी

बुनियादी ढांचा क्षेत्र में 100 लाख करोड निवेश की सीतारमण की महत्वाकांक्षी योजना के सबसे बडा लाभार्थी महानगर, नगर और उनमें रहने वाला मध्यम वर्ग होने वाला है. इस वर्ग को आयकर राहत पहले ही मिल चुकी है, अब घर तथा ई-वाहन खरीदने के कर्ज पर कर छूट भी दी गयी है. यह तबका मोदी के ईमानदारी से अच्छा काम करने की नीयत के साथ निरंतर खडा है. उसके समर्थन का विश्वास ही शायद है कि सीतारमण ने राजमार्गों के लिए पेट्रोल-डीजल पर् सेस लगाया. श्रम कानूनों को चार संहिताओं में सुसंगत बनाने का काम थोडा टेढा है क्योंकि उसमें स्वदेशी अभियान और श्रमिक यूनियनों के सुझावों को नजरांदाज करना कठिन होगा. इसी तरह मीडिया और बीमाक्षेत्र में एफडीआइ का प्रस्ताव बहुत सावधानी से पेश किया गया है, यह ध्यान में रखते हुए कि इनको लेकर भाजपा समर्थक समूह बहुत संवेदनशील हैं.
सीतारमण का बजट बेशक मोदी के न्यू इंडिया को साकार करने की दिशा में ठोस कदम है. और इसके लिए पूंजी जुटाने के लिए भी विदेश में सार्वभौम बॉन्ड जारी करने तथा नॉन-टैक्स रेवेन्यू जैसे अभिनव उपाय अपनाए गये हैं. सीतारमण ने अपने बजट से प्रधानमंत्री के विजन को मजबूत किया है और पार्टी के जनाधार को आश्वस्त भी!
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं )

ये भी पढ़ें: Budget 2019: अब आपको 11.75 लाख रुपये तक इनकम पर नहीं देना होगा टैक्स, यहां देखें

Budget 2019: PM मोदी बोले- इस बजट से गरीबों को मिलेगा बल, युवाओं को बेहतर कल

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: July 5, 2019, 7:30 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...