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Budget 2020: एक सधी हुई आर्थिक कसरत

Jagdish Upasane | News18Hindi
Updated: February 1, 2020, 11:10 PM IST
Budget 2020: एक सधी हुई आर्थिक कसरत
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन ने अपना दूसरा बजट पेश किया (फाइल फोटो, PTI)

इंडस्ट्री और बड़े निवेशकों, जो छोटे निवेशकों की आर्थिक ताकत के कारण शेयर सूचकांक (Stock index) के एक तरह से नियंता होते हैं, का यह निरूत्साह समझा जा सकता है, क्योंकि मुख्य रूप से यह बजट किसानों, महिलाओं, नये उद्ममियों (New Entrepreneurs) समेत कुल मिलाकर आम नागरिकों (Common Citizens) पर केंद्रित नजर आता है.

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  • Last Updated: February 1, 2020, 11:10 PM IST
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वित्त मंत्री (Finance Minister) निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) के आज पेश किए बजट के दो विरोधाभासी परिणाम देखने को मिले. निम्न मध्यम वर्ग (Lower Middle Class) और मध्यम वर्ग (Middle Class) का करदाता यानी आम आदमी अमूमन जहां खुश है कि वित्त मंत्री ने टैक्स छूट के जरिए उनके हाथों में 40 हजार करोड़ रुपये सौंप दिए वहीं शायद इंडस्ट्री और बिजनेस (Business) को बहुत बड़ी छूट नहीं दिखने से शेयर बाजार (Share Market) धड़ाम हो गये. अर्थव्यवस्था की वर्तमान हालत में वित्त मंत्री दरअसल एक अनुशासित, सधा हुआ और सभी वर्गों को कुछ न कुछ देने वाला बजट (Budget) बनाया है.

इंडस्ट्री और बड़े निवेशकों, जो छोटे निवेशकों की आर्थिक ताकत के कारण शेयर सूचकांक (Stock index) के एक तरह से नियंता होते हैं, का यह निरूत्साह समझा जा सकता है, क्योंकि मुख्य रूप से यह बजट किसानों, महिलाओं, नये उद्ममियों (New Entrepreneurs) समेत कुल मिलाकर आम नागरिकों पर केंद्रित नजर आता है. हालांकि बजट की विस्तारित व्याख्या के बाद इंडस्ट्री के निरूत्साह का यह नजारा कुछ बदल सकता है.

बजट के केंद्र में समाज का अंतिम व्यक्ति
जिन आलोचकों को लगता है कि यह न तो विनिर्माण, न निर्यात बढ़ाने वाला और न ही जॉब क्रिएशन (Job Creation) करने वाला बजट है, उनको बजट के एनेक्स्चर और विस्तृत व्याख्या तथा बजट बाद वित्त मंत्री की प्रेस वार्ता को ध्यान से देखने की जरूरत है. वित्त मंत्री ने अपने बजट कि अलग-अलग थीमों के अंतर्गत पेश किया लेकिन इसका मूल मंत्र 'सबका साथ, सबका विकास' ही है. हरेक योजना या पुरानी योजनाओं के नये, संवर्धित या परिवर्तित स्वरूप में समाज का अंतिम व्यक्ति केंद्र में है.



वित्त मंत्री (Finance Minister) के बजट का मौलिक स्वर सुनना हो तो उनके बजट भाषण में देश के प्रत्येक वर्ग, तबके के लिए कुछ न कुछ तय करने के संदर्भ में कही गयी कश्मीरी कवि पंडित दीनानाथ कौल की अपने देश पर केंद्रित कविता की पंक्तियां, तमिल कवि वुआया के भूमि के संतुलित तथा समुचित उपयोग पर कथ्य का उद्धरण, तिरुवल्लुर के बताए एक समर्थ राष्ट्र के पांच मानदंड तथा राजस्व संग्रहण और करारोपण के संदर्भ में 'रघुवंशम' के उल्लेख पर गौर करना चाहिए.

वित्त मंत्री ने अपनी सरकार का विजन कहीं नजरअंदाज नहीं होने दिया
वित्त मंत्री ने कृषि, सिंचाई, समग्र ग्रामीण विकास, जल संरक्षण, पशुधन संवर्धन तथा संरक्षण, ऑर्गेनिक खेती, खेती में रसायनों के इस्तेमाल को कम करने पर ध्यान, उद्यानिकी, दूध और दुग्ध उत्पाद, मछली पालन, ब्यू इकोनॉमी, मनरेगा, पंचायती राज पर अपना 16 सूत्रों का एक्शन प्लान (16 point action plan) न सिर्फ विस्तार से बताया और उसको बढ़ाने के लिए अपने सूत्र बताए बल्कि उसके लिए जहां तक संभव है, अधिकतम कोष की व्यवस्था भी की. अतीत के आवंटनों से तुलना करने वालों को यह कम लग सकता है लेकिन वित्त मंत्री ने विशेषकर प्रधानमंत्री मोदी और अपनी सरकार का विजन कहीं नजरअंदाज नहीं होने दिया.

पोषण आहार, स्वच्छ भारत अभियान, आयुष्मान भारत योजना, जन औषधि केंद्रों, छोटे-कुटीर उद्यमियों से सामान और सेवाएं लेने के जेम पोर्टल, पाइप्ड वाटर प्रोजेक्ट्स, नेशनल गैस ग्रिड, स्वच्छ जलवायु कार्यक्रम, स्टार्ट अप्स, एमएसएमई सेक्टर (MSME Sector) को अति वांछित रियायतों, बंजर जमीन समेत रेलवे ट्रैक के इर्दगिर्द की खाली जमीन पर सौर उर्जा उत्पादन को बढावा, स्किल विकास पर जोर जैसे उपायों में प्रधानमंत्री के सोच का प्रतिबिंब देखा जा सकता है. सीतारमन का यह बजट विकेंद्रित अर्थव्यवस्था की आदर्श बानगी पेश करता है.

मोदी सरकार जितना प्रोद्योगिकी का इस्तेमाल सिर्फ दुनिया के विकसित देश करते हैं
नौकरियों का सृजन करने के उपाय न होने का रोना रो रहे लोगों को इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और उसे मजबूत करने के विभिन्न कदमों-प्रावधानों तथा इनके एफडीआइ फंड को दी गयी छूट को नहीं भूलना चाहिए. नेशनल लाॅजिस्टिक पाॅलिसी लाने का ऐलान हवाई बात नहीं. और नॉन-गजेटेड नौकरियों (Non-gazetted jobs) के लिए नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी क्या यों ही खडी की जा रही है?

मोदी सरकार प्रौद्योगिकी का जितना और जैसा इस्तेमाल कर रही है, वैसा और उतना इस्तेमाल दुनिया के विकसित देश ही करते हैं. पंचायत स्तर से ऊपर तक की सभी संस्थाओं का डाटा सुरक्षित रखने, मेंटेन करने के लिए निजी कंपनियों को डाटा सेंटर पार्क (Data Center Park) बनाने की अनुमति देने की योजना, एक लाख पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का हिस्सा बनाना, जेनेटिक्स की राष्ट्रीय मैपिंग, प्रौद्योगिकी में अति-उन्नत कुछ देशों की तरह क्वांटम टेक्नोलॉजी मिशन बनाना और टेक्नोलॉजी आधारित फेसलेस टैक्स फाइलिंग की तरह प्रत्यक्ष मतदाताओं के लिए फेसलेस अपील की व्यवस्था इसकी कुछ मिसालें हैं.

LIC का विनिवेश बहुत बड़ा कदम
करदाताओं के लिए टैक्सपेयर्स चार्टर टैक्स एक्ट का हिस्सा बनाने का प्रस्ताव वेल्थ क्रिएटर्स (पूंजी निर्माताओं) की सुरक्षा और उनके प्रति सम्मान का गेमचेंगिंग कदम है. डिविडेंड (लाभांश) डिस्ट्रिब्यूशन टैक्स का खात्मा विदेशी निवेशकों को उत्साहित कर सकता है तो भारतीय कंपनियों को अरसे से चुभता नश्तर भी इससे दूर होगा. इनकम टैक्स (Income Tax) में बढ़िया डिजाइन की गयी छूट की व्यवस्था प्रत्यक्ष कर व्यवस्था को चुस्त और करसंग्रहण को परिणामकारी बनाने की दिशा में उठाया गया बडा कदम है.

अर्थव्यवस्था की अपेक्षित ग्रोथ कठिन होने की हालत में धन जुटाना एक चुनौतीपूर्ण काम है. वित्त मंत्री ने विनिवेश का एक बडा लक्ष्य भी रखा है, ओर जिस तरह इस पर लेगवर्क किया गया है, उसके मद्देनज़र इसे वे हासिल कर सकती है. एल.आई. सी. (LIC) का विनिवेश बहुत बड़ा कदम है, क्योंकि यह समय-समय पर अनेक राज्य सरकारों की तारणहार बनती रही है. उम्मीद है, उसमें विश्वास जताने वाले करोड़ों भारतीयों के भरोसे की रक्षा होगी. कुल मिलाकर वित्त मंत्री ने अर्थव्यवस्था कि नाजुक डोर ओर बढिया संतुलन साधा है. आशा है, इससे विकास की रफ्तार लौटेगी.

डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं.

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First published: February 1, 2020, 11:10 PM IST
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