आम्रपाली केस: सवालों के घेरे में बिल्डर्स, बैंक, प्राधिकरण और धोनी दंपति

पूरे मामले में ऐसा लग रहा है, जैसे पूरा सिस्टम आम आदमी की गाढ़ी कमाई को उसके सिर पर छत मुहैया कराने के बजाय कहीं और ही लगाने में जुट गया था. आम आदमी की जिंदगी भर की कमाई के डूबने की इस कहानी के कई खलनायक हैं.

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Updated: July 27, 2019, 7:36 AM IST
आम्रपाली केस: सवालों के घेरे में बिल्डर्स, बैंक, प्राधिकरण और धोनी दंपति
आम्रपाली समूह के प्रोजेक्ट्स में पैसे लगाने वाले आम आदमी की जिंदगी भर की कमाई डूबने की कहानी के कई खलनायक हैं.
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Updated: July 27, 2019, 7:36 AM IST
सिंधू भट्टाचार्य

आम्रपाली बिल्डर केस की हर परत उधड़ने के साथ घर खरीदारों को अहसास हो रहा है कि उनके साथ केवल बिल्डर ही नहीं, हर स्टेकहोल्डर ने छल किया है. पूरे मामले में ऐसा लग रहा है, जैसे पूरा सिस्टम आम आदमी की गाढ़ी कमाई को उसके सिर पर छत मुहैया कराने के बजाय कहीं और ही लगाने में जुट गया था. आम आदमी की जिंदगी भर की कमाई डूबने की इस कहानी के कई खलनायक हैं.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुए फॉरेंसिक ऑडिट के मुताबिक, आम्रपाली समूह के निदेशकों ने फ्लैट खरीदारों की पूंजी एक डायरेक्टर की बेटी की शादी, विदेश यात्राओं, महंगी घड़ियों, गहनों और लग्जरी कारें खरीदने पर खर्च कर दी. इसके अलावा आम लोगों की गाढ़ी कमाई म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार में निवेश कर दी गई. साथ ही समूह के लोगों ने व्यक्तिगत संपत्ति बनाने, और अपने हाउसिंग लोन चुकाने में लोगों की पूंजी का इस्तेमाल किया.

नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर भी सवाल

इस कहानी में आम्रपाली समूह के अधिकारी ही नहीं नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की भी अहम भूमिका है. आरोप है कि प्राधिकरणों ने फ्लैट बनाने के लिए जरूरी भूमि आवंटित करने के बाद कभी जांच नहीं की. समूह ने आवासीय परियोजनाओं को फाइनेंस करने वाली विदेशी फर्म जेपी मॉर्गन से अपनी कंपनियों में निवेश कराया. फिर मॉर्गन का कर्ज उतारने के लिए शेयरों की कीमत वास्तविकता से कहीं अधिक लगाकर भुगतान कर दिया गया. ये तरीका घर खरीदारों का पैसा भारत से बाहर भेजने के लिए अपनाया गया.

एमएस धोनी आम्रपाली समूह के साथ बतौर एंबेस्डर जुडे थे. कथित तौर पर उनकी पत्नी साक्षी धोनी समूह की एक कंपनी के साथ जुड़ी हुई हैं.


बिल्डर को बड़े कर्ज देने पर मुहर लगाने वाले बैंक अधिकारियों ने भी कथित तौर पर इस बात की जांच नहीं की कि घरों के निर्माण के लिए दिया जा रहा पैसा आखिर जा कहां रहा है. इस श्रंखला में शामिल क्रिकेटर एमएस धोनी आम्रपाली समूह के साथ बतौर एंबेस्डर जुडे थे. कथित तौर पर उनकी पत्नी साक्षी धोनी समूह की एक कंपनी के साथ जुड़ी हुई हैं. हालांकि, धोनी दंपति सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर चुके हैं.
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NBCC करेगी प्रोजेक्ट को टेकओवर
अब सुप्रीम कोर्ट हजारों घर खरीदारों के बचाव में खड़ा हो गया है. शीर्ष अदालत ने सरकारी कंपनी नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (NBCC) से कहा है कि वह आम्रपाली समूह के सभी रुके हुए प्रोजेक्ट्स को टेकओवर करे. साथ ही आम्रपाली का लाइसेंस भी रद कर दिया गया है. जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले में एक कोर्ट रिसीवर नियुक्त कर दिया. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने बिल्डर और उसके अधिकारियों के खिलाफ कई अन्य कार्रवाई के भी आदेश दिए है.

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First published: July 27, 2019, 7:28 AM IST
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