दिल्ली की 80 प्रतिशत इमारतें आग से नहीं सेफ, ऐसे जानें कितनी सुरक्षित है आपकी बिल्डिंग

News18Hindi
Updated: May 27, 2019, 10:59 AM IST
दिल्ली की 80 प्रतिशत इमारतें आग से नहीं सेफ, ऐसे जानें कितनी सुरक्षित है आपकी बिल्डिंग
फाइल फोटो.

दिल्ली में रहे दमकल विभाग के एक पूर्व डायरेक्टर का कहना है कि दिल्ली की 80 प्रतिशत इमारतें भी आग से सुरक्षित नहीं हैं. इमारत का डिजाइन भी इस बात पर निर्भर करता है कि वहां आग कितनी तेजी से फैलेगी.

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आग से बचने के लिए बिल्डिंग से छलांग लगाते बच्चों के उस वीडियो को अभी तक लोग भूल नहीं पा रहे हैं. सूरत की उस घटना ने लोगों को झकझोर दिया है. वहीं दिल्ली में रहे दमकल विभाग के एक पूर्व डायरेक्टर का कहना है कि दिल्ली की 80 प्रतिशत इमारतें भी आग से सुरक्षित नहीं हैं.

पूर्व डायरेक्टर का कहना है कि किसी भी इमारत का डिजाइन भी इस बात पर निर्भर करता है कि वहां आग कितनी तेजी से फैलेगी, कितना नुकसान पहुंचाएगी, वहां आग बुझाने के इतंजाम कैसे हैं और लगी हुई आग को कैसे बुझाया जा सकता है.

पूर्व डायरेक्टर का कहना है कि जगह-जगह फायर एक्सटिंविशर लगा देने से ही आग से बचाव या कम नुसकान होने की गारंटी नहीं मिल जाती है. इसके लिए स्ट्रक्चरल लाइफ सेफ्टी सबसे अहम है और दिल्ली की 80 प्रतिशत से ज्यादा इमारतें इस पैमाने पर खरी नहीं उतरती.

इसके अलावा इमारत की सीढ़ियों का हिस्सा और उसमें फायर चेक डोर, इमारत का कंपार्टमेंटेशन और स्मोक मैनेजमेंट सिस्टम भी आग को फैलने से रोकने और जानमाल के नुकसान को कम करने में खास भूमिका निभाता है.

वहीं जानकारों की मानें तो दिल्ली में बड़ी संख्या में इमारतों पर फायर सेफ्टी कानून लागू ही नहीं होता है. इसकी वजह है दिल्ली में फायर सेफ्टी लॉ. ये लॉ 1983 में आया था, जिसमें 15 मीटर से ऊंची इमारतों के लिए कानून बनाया गया था. लेकिन लोगों ने इस कानून का तोड़ निकालते हुए फायर सेफ्टी के दायरे में आने से बचने के लिए साढ़े 14 मीटर या 14.9 मीटर ऊंची इमारतें बनाने लगे.

इसके बाद 2010 में एक और कानून लाया गया. नए कानून के तहत 15 मीटर से कम ऊंची इमारतों को भी फायर सेफ्टी के दायरे में लाया गया. कुछ वर्ष पहले खुद एमसीडी ने अदालत में एफिडेविट दाखिल करके यह जानकारी दी थी कि दिल्ली में 60 लाख से ज्यादा छोटी-बड़ी इमारतें हैं.

लेकिन इसमे से सिर्फ 25 हजार के करीब ही ऐसी इमारतें होंगी, जिसमे स्ट्रक्चर के लिहाज से फायर सेफ्टी के उपाय किए गए हैं और फायर एनओसी मिली हुई है. अनधिकृत कॉलोनियों और लाल डोरा वाले इलाकों पर भी फायर सेफ्टी कानून लागू नहीं होने से वहां भी धड़ल्ले मानकों को ताक पर रखकर इमारतें बनाई जा रही हैं.
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First published: May 27, 2019, 10:42 AM IST
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