UP के बुंदेलखंड में कायम रहेगी BJP लहर या सपा-बसपा गठबंधन लगाएगा सेंध?

News18Hindi
Updated: April 29, 2019, 3:56 AM IST
UP के बुंदेलखंड में कायम रहेगी BJP लहर या सपा-बसपा गठबंधन लगाएगा सेंध?
न्यूज़ 18 क्रिएटिव

बीते चुनावों के आंकड़ों के साथ ही बुंदेलखंड के यूपी वाले हिस्से का छोटा भौगोलिक इलाका ध्यान में रखा जाए तो यहां फिर एकतरफा चुनाव की स्थिति बन सकती है. लेकिन, सवाल है कि इस बार राज्य की दो अहम पार्टियों का गठबंधन नए समीकरण बना सकेगा?

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 29, 2019, 3:56 AM IST
  • Share this:
उत्तर में गंगा के कछार और दक्षिण में विंध्य की पहाड़ियों के बीच दो राज्यों की सीमाओं में बसे बुंदेलखंड का उत्तर प्रदेश वाला हिस्सा आम चुनावों में महत्वपूर्ण होगा क्योंकि यहां चार सीटें हैं, जिन पर मुकाबला दिलचस्प हो सकता है. बांदा, हमीरपुर, जालौन और झांसी, ये चार सीटें भाजपा का किला बन चुकी हैं लेकिन इस बार क्या होने वाला है?

पिछले आम चुनाव यानी 2014 में ये चारों सीटें भाजपा के खाते में गई थीं. वह भी 44.86 फीसदी वोटों के साथ. यूपी के बाकी हिस्सों में भाजपा की जीती कुछ सीटों पर पिछले विधानसभा चुनावों में तो समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने सेंध लगाई लेकिन इन चार सीटों पर ऐसा नहीं हो सका.

2017 में हुए विधानसभा चुनावों में भी भाजपा ने बुंदेलखंड में दबदबा बनाए रखा और इस इलाके की सभी 20 सीटें जीतीं. 2014 के आम चुनावों की तुलना में वोट प्रतिशत में कुछ इज़ाफा हुआ. 2017 के विधानसभा चुनावों में जहां भाजपा का वोट प्रतिशत 45.01 रहा, वहीं बसपा का 22.47 और सपा व कांग्रेस ने साथ में चुनाव लड़कर 24.32 वोट प्रतिशत हासिल किया.

बीते चुनावों के आंकड़े और बुंदेलखंड के यूपी वाले हिस्से का छोटा भौगोलिक इलाका ध्यान में रखा जाए तो यहां एक बार फिर एकतरफा चुनाव होने की स्थिति बन सकती है. वैसे भी, बुंदेलखंड में 2014 चुनावों में भाजपा का इस तरह जीतना ताज्जुब की बात नहीं थी क्योंकि 1991 और 1998 के आम चुनावों में भी पार्टी को भारी जीत हासिल हुई थी.

lok sabha election 2019, bundelkhand lok sabha election, congress, BJP, SP BSP alliance, लोकसभा चुनाव 2019, बुंदेलखंड लोकसभा चुनाव, कांग्रेस, भाजपा, सपा बसपा गठबंधन

देखा जाए तो 90 के पूरे दशक में, बुंदेलखंड में भाजपा का वर्चस्व कायम रहा. राम जन्मभूमि आंदोलन के समय में बने राजनीतिक माहौल के बीच हुए 1991 के आम चुनाव में भाजपा ने बुंदेलखंड की चारों सीटों पर कब्ज़ा किया था. इसके बाद 1996 में सिर्फ बांदा सीट बसपा के खाते में गई और भाजपा ने यहां बाकी तीन सीटें जीतीं और 1998 में फिर चारों सीटें जीतकर अपना वर्चस्व कायम किया.

हालांकि, इसके बाद भाजपा को इस अंचल में एक अरसे के लिए नाकामी हाथ लगी. 1999 से 15 साल के इंतज़ार के बाद मोदी की लहर में 2014 में फिर भाजपा यहां जीत सकी. इंतज़ार के इस अंतराल में भाजपा के हाथ 2004 आम चुनावों में जालौन सीट लगी जबकि, सपा ने बाकी तीन सीटें जीतीं. बसपा ने 1999 में यहां तीन सीटें जीती थीं. 1984 में आखिरी बार यूपी के बुंदेलखंड की चारों सीट जीतने के बाद 1999 और 2009 के चुनावों में कांग्रेस के हाथ झांसी सीट लगी थी.
Loading...

lok sabha election 2019, bundelkhand lok sabha election, congress, BJP, SP BSP alliance, लोकसभा चुनाव 2019, बुंदेलखंड लोकसभा चुनाव, कांग्रेस, भाजपा, सपा बसपा गठबंधन

खेती किसानी के मुद्दे
देश में कृषि अधिकतर जगहों पर बरसात पर निर्भर करती है और सिंचाई की समस्याएं कई इलाकों में भयावह हैं. महाराष्ट्र के, खासतौर से विदर्भ के इलाके की तरह ही बुंदेलखंड भी कई बार सूखे की मार झेल चुका है. हालांकि पिछले साल बुंदेलखंड में अच्छी बारिश हुई लेकिन उससे पहले दो साल तक सूखा झेल रहे इस इलाके में किसानों और खेती के कई मुद्दे अनसुने पड़े हुए हैं.

झांसी लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाले ललितपुर ज़िले के किसान महेंद्र सिंह राजपूत ने न्यूज़18.कॉम से बातचीत करते हुए कहा कि कृषि के लिए सरकार ने सहायता राशि बढ़ाई भी लेकिन ज़्यादातर ज़रूरतमंद किसानों तक यह राशि पहुंच नहीं सकी. राजपूत ने कहा 'सरकारी आधिकारिक केंद्र जब तक किसानों की फसल खरीदना शुरू करते हैं, तब तक छोटे और हाशिए के किसान अपनी ज़रूरतों के लिए सौदा औने पौने दामों में कर चुके होते हैं. सिर्फ दलालों और रसूखदारों की जेब में ही सरकारी फायदा पहुंच पाता है'.

बुंदेलखंड के ग्रामीणों के लिए कर्ज़ चुकाने में असमर्थ होना भी एक मुद्दा है. राजपूत के मुताबिक ये कर्ज़ ज़्यादातर लोग गैर आधिकारिक संस्थाओं या व्यक्तियों से लेते हैं. राजनीतिक शोध करने वाली संस्था सेंटर फॉर स्टडीज़ आफ डेवलपिंग सोसायटीज़ के निदेशक और प्रोफेसर संजय कुमार पहले हुई बातचीत में कह चुके हैं कि अन्य राज्यों की तुलना में उत्तर प्रदेश में खेती किसानी की समस्याएं चुनाव के नतीजों के लिहाज़ से ज़्यादा अहम हैं.

lok sabha election 2019, bundelkhand lok sabha election, congress, BJP, SP BSP alliance, लोकसभा चुनाव 2019, बुंदेलखंड लोकसभा चुनाव, कांग्रेस, भाजपा, सपा बसपा गठबंधन

कुमार का कहना है कि 'किसी राज्य में, इन समस्याओं के चलते लोग अगर बदलाव चाहते भी हैं, तब भी वो सिर्फ इसलिए भाजपा को वोट सकते हैं क्योंकि उन्हें कोई विकल्प नहीं दिखता. लेकिन उप्र में हालात अलग हैं. यहां लोगों के पास विकल्प मौजूद हैं.'

जातीय समीकरण
बुंदेलखंड में मुस्लिमों की आबादी कम है इसलिए उत्तर प्रदेश के बाकी हिस्सों की तुलना में यहां इस समुदाय के वोट अहम नहीं हैं. दूसरी ओर, यहां पूरा फोकस अनुसूचित जाति पर रहता है, जो यहां की कुल आबादी का एक चौथाई हिस्सा है. ये वो वोट बैंक है, जिसे सपा और बसपा का गठबंधन भुनाने की कोशिश कर सकता है. दोनों पार्टियों के बीच हुए समझौते के बाद दोनों दो दो सीट पर चुनाव लड़ने वाली हैं. सपा के उम्मीदवार बांदा और झांसी जबकि, बसपा के उम्मीदवार जालौन और हमीरपुर से चुनाव लड़ेंगे.

इसके अलावा, बांदा और हमीरपुर में ब्राह्मणों के वोट अहम हैं और साथ ही, इन इलाकों में लोढ़ा समुदाय की भी खासी संख्या है. वहीं, बांदा और झांसी में कुर्मी और कुशवाहा समूहों के वोट खास महत्व के हो सकते हैं. झांसी में जहां राजपूतों का भी रसूख है, वहीं यादवों का भी. जालौन में भी यादवों के वोट निर्णायक साबित हो सकते हैं.

आम चुनावों में अगर जातीय समीकरणों ने बड़ी भूमिका अदा की, तो यहां उलटफेर से इनकार नहीं किया जा सकता.

वोटों का गणित
अगर शुद्ध वोट गणित देखा जाए तो, क्या सपा-बसपा गठबंधन यहां कोई फर्क पैदा कर सकेगा?

lok sabha election 2019, bundelkhand lok sabha election, congress, BJP, SP BSP alliance, लोकसभा चुनाव 2019, बुंदेलखंड लोकसभा चुनाव, कांग्रेस, भाजपा, सपा बसपा गठबंधन

अगर सपा और बसपा के वोटों का जोड़ देखा जाए, तो बांदा और झांसी में 2014 के चुनावों में यह भाजपा के वोटों से ज़्यादा बैठता है. वहीं, हमीरपुर और जालौन में भाजपा के वोट सपा बसपा के कुल वोटों से ज़्यादा रहे थे. लेकिन, 2019 में गठबंधन के बाद बने माहौल में कहा नहीं जा सकता कि नतीजा क्या होगा लेकिन, वोटों की पूरी तब्दीली की संभावना से इनकार भी नहीं किया जा सकता.

इसी दौरान यहां चुनाव इन मायनों में भी दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस यहां कोई प्रभाव पैदा करने में कामयाब होगी या हाल में हुए मध्य प्रदेश चुनावों की सफलता के बावजूद उसे इसका कोई फायदा यहां नहीं होगा.

रिपोर्ट : अश्वतेज पुरुषोत्तमन और फाज़िल खान

ये भी पढ़ें:

लोकसभा चुनाव 2019: फेसबुक पेज पर जयाप्रदा बनी 'चौकीदार', आज आएंगी रामपुर
PM मोदी इस मुहूर्त में कर सकते हैं वाराणसी सीट से नामांकन, ऐतिहासिक होगा रोड शो
कुशीनगर लोकसभा सीट: आरपीएन सिंह, विजय दूबे और नथुनी कुशवाहा पर पार्टियों ने लगाया दांव
एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए झांसी से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: April 29, 2019, 3:24 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...