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बुराड़ी कांड: कौन था वो तांत्रिक, जिसके बहकावे में आकर भाटिया परिवार ने लगा ली फांसी

बुराड़ी के भाटिया परिवार के 11 लोगों ने एक साथ कर ली थी आत्‍महत्‍या.
बुराड़ी के भाटिया परिवार के 11 लोगों ने एक साथ कर ली थी आत्‍महत्‍या.

बुराड़ी में भाटिया परिवार के 11 लोगों की मौत के रहस्‍य से पर्दा उठने का नाम ही नहीं ले रहा है. दो दिन पहले बिसरा रिपोर्ट आने के बाद ये तो तय हो गया है कि ये मामला सामूहिक हत्‍या का नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 22, 2018, 1:16 PM IST
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बुराड़ी में भाटिया परिवार के 11 लोगों की मौत के रहस्‍य से पर्दा उठने का नाम ही नहीं ले रहा है. दो दिन पहले विसरा रिपोर्ट आने के बाद ये तो तय हो गया कि ये मामला सामूहिक हत्‍या का नहीं है. रिपोर्ट आने के बाद लगने लगा है कि ये पूरा मामला तंत्र-मंत्र के कारण ही हुआ है. अगर भाटिया परिवार तंत्र-मंत्र के चक्‍कर में नहीं पड़ता तो आज परिवार का हर सदस्‍य जिंदा होता.

बुराड़ी में भाटिया परिवार से जुड़े एक करीबी ने पुलिस को बताया था कि उसने कई बार भाटिया परिवार के सदस्‍यों को एक तांत्रिक के पास आते-जाते देखा था. पुलिस को लिखे एक खत में इस शख्‍स ने बताया था कि भाटिया परिवार कराला स्‍थित एक तांत्रिक के पास आता-जाता था, जो एक मंदिर में बैठा करता था. शख्‍स ने बताया कि तांत्रिक की पत्‍नी भी तंत्र-मंत्र किया करती थी और किसी को मारने या फिर परेशान करने के लिए पैसे लिया करती थी. खत लिखने वाले ने कहा था कि वह तांत्रिक का भंडाफोड़ करना चाहता है और भाटिया परिवार की मौत का सच सामने लाना चाहता है. हालांकि क्राइम ब्रांच के ज्‍वाइंट सीपी आलोक कुमार ने कहा कि उनके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है.

बिसरा रिपोर्ट के मुताबिक किसी ने नहीं खाया जहर
दिल्ली के बुराड़ी में एक ही परिवार के 11 सदस्यों की मौत के राज से पर्दा उठ गया है. विसरा रिपोर्ट के मुताबिक बुराड़ी कांड में मारे गए किसी भी सदस्‍य के पेट से कोई जहरीला पदार्थ नहीं मिला है. इसी के साथ रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आत्‍महत्‍या से पहले कुछ लोगों ने खाना खाया था लेकिन कुछ लोग भूखे थे. इस पूरे मामले की जांच क्राइम ब्रांच की टीम कर रही है. विसरा रिपोर्ट आने के बाद यह साफ हो गया है कि परिवार के 11 लोगों ने एक साथ आत्‍महत्‍या की थी.
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ललित के कहने पर बाकी लोगों ने लगाई फांसी
पुलिस का कहना है कि घर का छोटा बेटा होने की वजह से ललित भाटिया अपने पिता भोपाल सिंह का लाडला था और उनके बेहद करीबी था. पिता की मौत का असर उसपर सबसे ज्यादा पड़ा. ललित सदमे में था. पास-पड़ोस के लोगों ने पुलिस को बताया कि एक हादसे में ललित की आवाज चली गई थी. काफी इलाज के बाद आवाज नहीं लौटी. तब से वह अपनी बातें लिखकर बताने लगा. परिवार के करीबियों के मुताबिक, इसी दौरान ललित ने परिवार को बताया कि पिता भोपाल सिंह उसे दिखाई देते और बात करते हैं.

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पुलिस को मिले थे हैंड नोट्स
पुलिस को कुछ और हाथ से लिखे नोट्स भी मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि किस तरह सामूहिक खुदकुशी की पूरी योजना बनाई गई. 30 जून 2018 की आखिरी एंट्री इस घटना का राज़ खोलती है. डायरी में अंतिम एंट्री में एक पन्ने पर लिखा है 'घर का रास्ता. 9 लोग जाल में, बेबी (विधवा बहन) मंदिर के पास स्टूल पर, 10 बजे खाने का ऑर्डर, मां रोटी खिलाएगी, एक बजे क्रिया, शनिवार-रविवार रात के बीच होगी, मुंह में ठूंसा होगा गीला कपड़ा, हाथ बंधे होंगे.' इसमें आखिरी पंक्ति है- 'कप में पानी तैयार रखना, इसका रंग बदलेगा, मैं प्रकट होऊंगा और सबको बचाऊंगा.'
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