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सबरीमाला-तिरुवनंतपुरम पर फोकस कर बीजेपी केरल में पहली जीत हासिल कर पाएगी?

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Updated: April 23, 2019, 12:12 PM IST
सबरीमाला-तिरुवनंतपुरम पर फोकस कर बीजेपी केरल में पहली जीत हासिल कर पाएगी?
सबरीमाला-तिरुवनंतपुरम सीटों पर फोकस कर बीजेपी केरल में पहली जीत सुनिश्चित कर पाएगी?

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी केरल के वायनाड से ही इस बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं. ये उन जगहों में से एक है जिसने 2018 के बाढ़ के दौरान सबसे अधिक भूस्खलन की मार झेली थी.

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  • Last Updated: April 23, 2019, 12:12 PM IST
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अगस्त 2018 को केरल में विनाशकारी बाढ़ ने पूरे राज्य को अपनी चपेट में ले लिया. करीब 500 लोगों की मौत हो गई और 8 लाख लोग बेघर हो गए. संयुक्त राष्ट्र ने पुनर्वास और पुनर्निर्माण में 31 हज़ार करोड़ खर्च होने की बात कही. केरल आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट-2018 के मुताबिक, करीब 3,500 करोड़ रुपये की फसल बर्बाद हुुुई.

आपदा के सात महीने और कुछ दिन बाद केरल की सभी 20 लोकसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. लेकिन, चुनाव मेें सदी की सबसे भयानक बाढ़ का ज़िक्र कमोबेश ना के बराबर है. ऐसा तब है जब कई जिलों के लोग अब भी बाढ़ की बर्बादी से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं. खास बात है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी केरल के वायनाड से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं. ये उन जगहों में एक है, जिसने सबसे अधिक भूस्खलन की मार झेली.

राज्य में गठबंधन

केरल की राजनीति में दो गठबंधनों का वर्चस्व है - सीपीएम के नेतृत्व वालेे लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट और कांग्रेस के नेतृत्व वालेे यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट.

एलडीएफ गठबंधन में सीपीआई, जेडीएस, एनसीपी और कई अन्य छोटी पार्टियां शामिल हैं. वहीं, यूडीएफ में आईयूएमएल, केरल कांग्रेस-एम और कुछ अन्य छोटेे दल शामिल हैं.

राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के नेतृत्व वालेे यूडीएफ के पास सबसे अधिक सीटें रहीं, जबकि राज्यस्तर पर पिछले कुछ दशक में दोनों गठबंधन बारी-बारी सत्ता पर काबिज़ रहे.

सीटों का समीकरण2014 चुनावों में यूडीएफ ने सबसे अधिक सीटों पर जीत दर्ज़ की थी. इनमें कांग्रेस को 8 और आईयूएमएल को दो पर जीत हासिल हुई थी. लोकसभा चुनाव 2009 में भी यूडीएफ ने सबसे ज्‍यादा सीटें जीतीं, जिसमें कांग्रेस का वोट शेयर 40 फीसदी रहा और उसके खाते में 13 सीटें आईं. 2004 में सीपीएम ने 12 और सीपीआई ने 3 सीटें जीतीं, जिससे एलडीएफ सत्ता में आई.

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बाढ़ का मतदाताओं पर कोई असर पड़ता है तो उसका फायदा सीपीएम के पी. विजयन के नेतृत्व वाली वर्तमान एलडीएफ सरकार को होगा. दरअसल, आम धारणा है कि विजयन सरकार ने सही ढंग से राहत और बचाव कार्यों को संभाला.

इससे पहले न्यूज़ 18 ने खबर दिखाई थी कि राज्य के राजस्व और आपदा प्रबंधन सचिव का कार्यालय अपने निवासियों को बचाने के राज्य सरकार के प्रयासों का केंद्र बन गया. करीब 4 हज़ार राहत शिविरों में करीब 14 लाख लोगों को आश्रय दिया गया था. राज्य सरकार, पुलिस, अग्निशमन विभागों और केंद्रीय बलों के बीच पूरे तालमेल के साथ काम किया गया. पुर्नवास के लिए उठाए गए कदमों से भी वोटर नाखुश नहीं हैं.

लड़ाई की रणनीति

2019 में एलडीएफ सभी 20 सीटों पर चुनाव लड़ रहा है, जिसमें सीपीएम 16 और सीपीआई 4 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. यूडीएफ भी सभी सीटों पर चुनाव लड़ रहा है. इनमें कांग्रेस 15 पर, आईयूएमएल 2 और केरल कांग्रेस एम, सोशलिस्ट जनता डेमोक्रेटिक तथा क्रांतिकारी सोशलिस्ट पार्टी एक-एक सीट पर चुनाव लड़ रही हैंं.

इस बार राहुल गांधी केरल के वायनाड से चुनाव लड़ रहेे हैंं. इसकी घोषणा के समय कांग्रेस ने कहा था, इस निर्णय के जरिये दक्षिण के राज्यों को मैसेज पहुंचाया जाए कि उनका बेहद सम्मान और महत्व है. हाालांं‍कि, इस कदम से राष्ट्रीय स्तर पर यूूूूपीए में सहयोगी वामदल राज्‍‍‍य में कांग्रेेेस का विरोधी बन गया.

कांग्रेस का निर्णय राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के खिलाफ

2005 से 2015 के बीच सीपीएम के महासचिव रहे प्रकाश करात ने कहा कि कांग्रेस का यह निर्णय उसके बीजेपी से लड़ाई में राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के खिलाफ है. केरल में बीजेपी के खिलाफ लड़ाई में एलडीएफ मुख्य दल है.

वायनाड में राहुल गांधी के खिलाफ सीपीआई के पीपी सुनीर लड़ेंगे. 2009 और 2014 चुनावों में सीपीआई 31.2% और 38.9% वोट शेयर के साथ इस सीट पर दूसरे स्थान पर रही थी. एनडीए गठबंधन के लिए केरल चुनाव एक परीक्षा के तौर पर है, क्योंकि अब तक किसी भी लोकसभा चुनाव में बीजेपी को राज्य की किसी भी सीट पर जीत नहीं मिली है.

बीजेपी का गठबंधन भारत धर्म जनसेना से है और वह 14 सीट पर चुनाव लड़ रही है. वहीं, बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ आरएसएस राज्य में चुनाव प्रचार और बैठकों का आयोजन करा रहा है.

तिरुवनंतपुरम और पत्‍तनमथिट्टा पर बीजेपी की नज़र

केरल में बीजेपी की लड़ाई दो सीटों पर केंद्रित है - तिरुवनंतपुरम और पत्‍तनमथिट्टा.  इस वक्त तिरुवनंतपुरम सीट पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर का कब्ज़ा है. पिछले दो लोकसभा चुनावों से थरूर इस सीट पर जीत रहे हैं. 2009 में शशि थरूर सीपीआई प्रत्याशी से करीब एक लाख वोटों के अंतर से जीते थे. बीजेपी उम्मीदवार चौथे स्थान पर रहे थे. 2014 में थरूर ने 15 हज़ार वोटों से जीत दर्ज़ की थी, जबकि बीजेपी प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे थे.

1998 से तिरुवनंतपुरम सीट पर बीजेपी का वोट शेयर लगातार बढ़ रहा  है. 1998 में बीजेपी के वर्मा राजा को 12.39% वोट शेयर हासिल हुआ. 1999 में ये बढ़कर 20.93% हो गया. 2004 में बीजेपी का वोट शेयर 29.86% तक पहुंच गया. हालांकि, 2005 उप-चुनावों में गिरकर 3.8% रह गया था. 2009 में वोट शेयर में बढ़ोतरी हुई और ये 11.4% हो गया. 2014 में पार्टी का सर्वाधिक वोट शेयर रहा, जब ओ. राजागोपाल को 32.32% वोट हासिल हुुुए.

तिरुवनंतपुरम में 65-70% हिन्दू

2016 विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने अपनी पहली जीत दर्ज़ की. तिरुवनंतपुरम जिले की नेमोम सीट पर बीजेपी ने सीपीएम उम्मीदवार को हराया था. 2011 जनगणना के मुताबिक तिरुवनंतपुरम में अगड़े नायर समुदाय का वर्चस्व है और यहां 65-70% हिन्दू हैंं.

पत्‍तनमथिट्टा यानी सबरीमाला सीट पर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने जबरदस्त चुनाव प्रचार किया है. यहां कांग्रेस के दो बार के सांसद एंटो एंथनी, सीपीएम की वीना जॉर्ज और बीजेपी के सुरेंद्रन के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है.

पत्‍तनमथिट्टा में 50% हिन्दू और 40% ईसाई 

2011 जनगणना के मुताबिक पत्‍तनमथिट्टा में करीब 50% हिन्दू और 40% ईसाई हैंं. जहां कुछ का मानना है कि ईसाई वोट के एंटो एंथनी और वीना जॉर्ज के बीच बंटने से बीजेपी को फायदा हो सकता है, वहीं, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि केरल में जाति और धर्म के आधार पर बहुत ज्यादा वोटिंग नहीं होती है. वहीं, कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि सबरीमाला मुद्दा वोटरों के लिए महत्व नहीं रखता है. विकास, अर्थव्यवस्था और बाढ़ संबंधित पुनर्वास वोटरों के लिए ज्यादा बड़े मुद्दे हैं.

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First published: April 23, 2019, 12:12 PM IST
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