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BYJU'S Young Genius: कच्ची उम्र में शौर्य और अनिर्बान ने पहचाना अपना हुनर, एक रोबोटिक्स, दूसरा संगीत में है माहिर

अनिर्बान रॉय और शॉर्य भसीन

अनिर्बान रॉय और शॉर्य भसीन

BYJU'S Young Genius: टैलेंट से भरपूर दोनों जीनियस अनिर्बान रॉय और शौर्य भसीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के मंचों पर पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 5, 2021, 12:42 PM IST
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नई दिल्ली. BYJU'S Young Genius में दर्शक पहले भी देश के हुनरमंद बच्चों को देख चुके हैं. इस शनिवार आपकी मुलाकात बांसुरी वादन में उस्ताद पश्चिम बंगाल के अनिर्बान रॉय और रोबोटिक्स में माहिर राजधानी दिल्ली के शौर्य भसीन से होने जा रही है. रॉय महज साढ़े चार साल की उम्र से ही संगीत की दुनिया में डेब्यू कर चुके हैं. दूसरी ओर शौर्य रोबोटिक्स, इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी को ही अपनी दुनिया मानते हैं. टैलेंट से भरपूर ये दोनों जीनियस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के मंचों पर पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं.

शौर्य को नई चीजें बनाने से है प्यार
14 साल के शौर्य कहते हैं कि कम उम्र में ही पेरेंट्स ने उन्हें रोबोटिक्स क्लब में दाखिल करा दिया था. तब उन्होंने पहली बार रोबोट्स का अनुभव किया. इसके बाद से उनकी तकनीक और इंजीनयरिंग के साथ यात्रा जारी है. उन्होंने घर में ही अपनी एक वर्कशॉप तैयार कर रखी है. वे इसे D&T यानि डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी लैब कहते हैं. वे कई खास चीजें इस वर्कशॉप में तैयार कर चुके हैं.

उनके पिता राजेश भसीन बताते हैं कि शौर्य ने ऑस्ट्रेलिया के रोबोटिक्स इवेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया. वहीं, मां राधिका भसीन का कहना है कि इस कार्यक्रम में शौर्य को ग्रेशियस प्रोफेशनलिज्म के लिए पहला प्राइज मिला था. माता-पिता को बेटे की उपलब्धियों पर गर्व है. शौर्य कहते हैं कि वह खुद को एक कंप्यूटर इंजीनियर के तौर पर देखते हैं और कहते हैं कि रोबोटिक्स का इंसानों पर काफी प्रभाव होगा.
पूरी दुनिया को बांसुरी की धुन सुनाना चाहते हैं अनिर्बान


क्या आप इस बात को मानेंगे कि महज 10 साल के अनिर्बान बीते करीब 6 सालों से बांसुरी बजा रहे हैं. वह बताते हैं कि उनके पिता लोकनाथ रॉय भी एक फ्लूट आर्टिस्ट हैं और उन्हें संगीत परिवार से ही मिला है. अनिर्बान के परिवार में ही संगीत बसता है. पिता के अलावा उनकी मां शास्त्रीय संगीत गाती हैं और बहन नॉर्थ इंडियन क्लासिकल की छात्रा हैं.

अनिर्बान पिता को ही अपना गुरु मानते हैं. लोकनाथ बताते हैं कि उनके बेटे को सुदेश वाडेकर से प्रतिष्ठित मास्टर मगन अवॉर्ड मिल चुका है. इसके अलावा अनिर्बान को एम एस सुबुलक्ष्मी फेलोशिप भी मिल चुकी है. पिता अनिर्बान की लोकप्रियता का श्रेय सोशल मीडिया को देते हैं. अनिर्बान कहते हैं, 'मुझे यकीन है कि भगवान ने मेरे लिए कुछ अच्छा प्लान किया है. मैं बहुत ही आभारी हूं, क्योंकि सभी का आशीर्वाद मेरे साथ है.'
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