Exit Poll: असम में NRC और CAA बेअसर, विकास की बहार पर खिलेगा कमल!

असम चुनावों में इस बार CAA, NRC और बांग्लादेशी घुसपैठ जैसे मुद्दे छाए रहे.

असम चुनावों में इस बार CAA, NRC और बांग्लादेशी घुसपैठ जैसे मुद्दे छाए रहे.

Assam Elections Exit Poll Result 2021: असम में इस बार भी मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच में ही रहा है. एग्जिट पोल के मुताबिक एजीपी, एआईयूडीएफ और बीपीएफ को छोड़कर, अन्य सभी पार्टियां पिछले चुनाव के विपरीत अधिक सीटें हासिल कर रही हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 29, 2021, 11:08 PM IST
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नई दिल्ली. असम समेत देश के 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे 2 मई को आने वाले हैं. हालांकि एग्जिट पोल (Assam Elections Exit Poll Results 2021) से पहले कुछ तस्वीर साफ हो गई हैं. राज्य में 126 विधानसभा सीटें के एग्जिट पोल बता रहे हैं कि एक बार फिर बीजेपी सत्ता में वापसी कर सकती है.

एग्जिट पोल के नतीजों को देखकर ये कहा जा सकता है कि राज्य में एनआरसी और सीएए का मुद्दा विकास पर हावी नहीं हो रहा है. सभी एग्जिट पोल के परिणाम पर ध्यान दें तो ये साफ होता है कि बीजेपी को 65 से 85 सीटों के मिलने का अनुमान है. वहीं कांग्रेस को 40 से 65 सीटें मिलने के आसार है. यानि कांग्रेस को फायदा जरूर मिलता दिख रहा है, हालांकि बीजेपी बहुमत के साथ सरकार बना लेगी.

इस बार भी कांग्रेस और बीजेपी के बीच मुकाबला

असम में इस बार भी मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच में ही रहा है. एग्जिट पोल के मुताबिक एजीपी, एआईयूडीएफ और बीपीएफ को छोड़कर, अन्य सभी पार्टियां पिछले चुनाव के विपरीत अधिक सीटें हासिल कर रही हैं.
CAA, NRC पर विकास का मुद्दा हावी

असम चुनावों में इस बार CAA, NRC और बांग्लादेशी घुसपैठ जैसे मुद्दे छाए रहे. विपक्ष CAA, NRC जैसे मुद्दे पर बीजेपी को पूरी तरह से घेरने में जुटी रही है. लेकिन इस बार के चुनाव में असम के मुस्लिम नेता बदरुद्दीन अजमल की पार्टी की कांग्रेस के साथ गठबंधन ने कई नए समीकरण और गणित बिठाए. बदरुद्दीन अजमल के कांग्रेस के साथ गठबंधन ने बीजेपी को बड़ा मुद्दा हाथ थमा दिया और बीजेपी ने अपना पूरा चुनावी कंपेन बांग्लादेशी घुसपैठ और उनकी सरकार के कामकाज पर केंद्रीय रखा.

पीएम ने की असम में ताबड़तोड़ 7 रैलियां



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम जैसे छोटे राज्य में भी एक के बाद एक 7 रैलियां की. असम में चुनाव की घोषणा के बाद पीएम ने अपनी पहली रैली 18 मार्च को करीमगंज में की. उसके बाद 20 मार्च को छबुआ, 21 मार्च को बोकाखात, 24 मार्च को बिहपुरिया, 28 मार्च को सिलपथर, 1 अप्रैल को बिजनी और 3 अप्रैल को तामूलपुर में जनसभा को संबोधित की.

प्रधानमंत्री नरेंद्र ने अपनी सारी रैलियों में बीजेपी सरकार के कामकाज पर लोगों से फिर से सरकार बनाने की अपील की. पीएम ने हर रैली में कांग्रेस के जमाने मे हुए भरष्टाचार और कुशासन की ओर लोगो को ध्यान केंद्रित करवाया.

अमित शाह और नड्डा भी कर चुके हैं बीजेपी के लिए रैलियां

पीएम के अलावा गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी असम में लगातार रैलियां की. बीजेपी ने असम के चुनाव में केंद्र की योजना और राज्य में उनके विकास के कार्यक्रम पर फोकस रखा. बीजेपी का पूरा चुनावी कंपेन असम के विकास के इर्द गिर्द रखा.



क्या कहता है असम का समीकरण

असम देश का एक ऐसा राज्य है, जहां औसतन 34 फीसदी आबादी मुसलमानों की है, जिनमें असम के मूल निवासी असमिया मुसलमान और बांग्लादेशी घुसपैठिये शामिल हैं. राज्य की 126 सीटों में से निचले असम की 43 सीटों पर मुस्लिम आबादी किसी का भी सियासी गणित बना और बिगाड़ सकती है, ये इलाका अजमल का गढ़ माना जाता है, जहां से पिछली बार 2011 को एआईयूडीएफ ने 18 सीटें जीती थीं.

लेकिन जातिगत राजनीति पर बीजेपी के विकास का मॉडल हावी रहा. विकास का एजेंडा, पीएम मोदी के विज़न का फायदा बीजेपी का चुनाव में होता दिखा रहा है और यही वजह है कि एग्जिट पोल के परिणाम की माने तो बीजेपी एक बार फिर राज्य में सरकार बनाने जा रही है.
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