नागरिकता कानून का विरोध: आखिर सुप्रीम कोर्ट को क्यों करनी पड़ी इतनी सख्त टिप्पणी!

नागरिकता कानून का विरोध: आखिर सुप्रीम कोर्ट को क्यों करनी पड़ी इतनी सख्त टिप्पणी!
सुप्रीम कोर्ट ने आंदोलन के दौरान हुई हिंसा पर कड़ी आपत्ति जताई है.

अगर हम भारत में आंदोलन के दौर में हिंसा और आगजनी के कारण हुए नुकसान को देखेंगे तो साफ हो जाएगा कि आखिर सुप्रीम कोर्ट ने हिंसा के खिलाफ ये सख्त टिप्पणी क्यों की है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 16, 2019, 1:43 PM IST
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नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ देशभर में प्रदर्शनों का दौर जारी है. नार्थ-ईस्ट से शुरू हुआ विरोध-प्रदर्शन दिल्ली और उत्तर प्रदेश पहुंच गया है. इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने इस आंदोलन में हिंसा पर सख्त टिप्पणी की है. कोर्ट ने साफ कहा कि हिंसा किसी भी कीमत पर रुकनी चाहिए. वरिष्ठ वकील इंदिरा जय सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने छात्रों के खिलाफ भी कड़ी टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि सिर्फ छात्र होने के कारण हिंसा करने का अधिकार नहीं मिल जाता. साफ है सुप्रीम कोर्ट, हिंसा को किसी तरह रोकना चाहता है. चाहे वह हिंसा किसी भी कारण से हो रही हो. अगर हम भारत में आंदोलन के दौर में हिंसा और आगजनी के कारण हुए नुकसान को देखेंगे तो साफ हो जाएगा कि आखिर सुप्रीम कोर्ट ने हिंसा के खिलाफ ये सख्त टिप्पणी क्यों की है.

आखिर आंदोलनों पर कैसे भारी पड़ती है हिंसा
दरअसल आंदोलनों के दौरान इस तरह कि हिंसा आमलोगों के साथ-साथ आंदोलन को भी नुकसान पहुंचाती है. आंदोलन के दौरान सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने, पुलिस पर हमला, पुलिस और सरकार को ये अधिकार देता है कि वो उस आंदोलन को किसी तरह समाप्त करा दे. उसके बाद होता यही है कि हर सरकार पुलिस के प्रयोग से आंदोलन खत्म करा लेती है. इस बार भी देशभर में ऐसा ही कुछ हो रहा है. सीएए (CAA) के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन हिंसा के बाद इतना वीभत्स हो गया है कि सुप्रीम कोर्ट तक को ये कहना पड़ा कि सुनवाई से पहले हिंसा खत्म हो. दरअसल आंदोलनों की रूपरेखा पर जाएं, तो हर आंदोलन की शुरुआत भले ही शांतिपूर्ण तरीके से होती है, लेकिन कुछ शरारती तत्व उसमें शामिल होकर उसे हिंसात्मक बना देते हैं, जिसमें सबसे ज्यादा नुकसान सरकारी सपंत्तियों का होता है. साथ ही आमलोगों के जीवन पर भी इसका खासा असर पड़ता है और अंत में वो आंदलन बिना किसी बदलाव के खत्म हो जाता है.

देश के आर्थिक ढांचे को नुकसान पहुंचा रहे हिंसात्मक आंदोलन



दरअसल हमारे देश में आंदोलन के दौरान हिंसा का चलन बहुत तेजी से बढ़ा है और हर आंदोलन में कुछ खास लोगों का लक्ष्य सिर्फ सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना ही होता है, एसोचैम की रिपोर्ट की मानें तो 2015-16 में सिर्फ हरियाणा में हुए जाट आंदोलन में करीब 20 हजार करोड़ का नुकसान हुआ. साथ ही इस नुकसान के कारण हरियाणा से सटे दिल्ली, पंजाब, राजस्थान उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में लंबे अरसे तक जो व्यापार रुका रहा, उस आकड़े को जोड़ लें तो घाटा और बढ़ जाएगा. ये सिर्फ एक आंदोलन का आंकड़ा है. हर साल इस तरह के छोटे-बड़े सैकड़ों आंदोलन इस देश में हो रहे हैं, जिनमें सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है.



(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं. यहां व्यक्त विचार उनके निजी हैं.)

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