CCD के फाउंडर सिद्धार्थ को दी गई विदाई, चिकमगलूर में हुआ अंतिम संस्कार

भारी संख्या में लोगों की मौजूदगी और गमगीन माहौल में सिद्धार्थ के बेटे अमर्त्य ने मुखाग्नि दी.

News18Hindi
Updated: August 1, 2019, 11:03 AM IST
CCD के फाउंडर सिद्धार्थ को दी गई विदाई, चिकमगलूर में हुआ अंतिम संस्कार
भारी संख्या में लोगों की मौजूदगी और गमगीन माहौल में सिद्धार्थ के बेटे अमर्त्य ने मुखाग्नि दी.
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Updated: August 1, 2019, 11:03 AM IST
देश के सबसे बड़े कॉफी चेन 'कैफे कॉफी डे' (CCD) के संस्थापक वी.जी सिद्धार्थ का उनके गृह जिले चिकमगलूर स्थित उनके एस्टेट में बुधवार को अंतिम संस्कार किया गया, जहां सैकड़ों लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी. सिद्धार्थ सोमवार को लापता हो गए थे, जिसके दो दिन बाद नेत्रावती नदी के किनारे से उनका शव बरामद किया गया.

59 वर्षीय सिद्धार्थ की मौत ने कारोबार जगत को स्तब्ध कर दिया है. दरअसल, उनकी मौत के बारे में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. एक ओर जहां पुलिस इसे प्रथम दृष्टया आत्महत्या के तौर पर देख रही है, वहीं दूसरी ओर कर अधिकारियों की प्रताड़ना को उनकी कथित आत्महत्या का एक संभावित कारण बताया जा रहा है.

भारी संख्या में लोगों की मौजूदगी और गमगीन माहौल में सिद्धार्थ के बेटे अमर्त्य ने उन्हें मुखाग्नि दी. वोक्कालिगा समुदाय की परंपराओं के मुताबिक उनका अंतिम संस्कार किया गया. वह इसी समुदाय से थे. कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा और पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी सहित कई नेता भी अंत्येष्टि स्थल पर मौजूद थे.

वहां काफी गमगीन माहौल देखने को मिला. सिद्धार्थ के ससुर एवं कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता एसएम कृष्णा और उनकी सास प्रेमा भी कई बार अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए. सिद्धार्थ के परिवार में उनकी पत्नी मालविका और दो पुत्र-- अमर्त्य और ईशान हैं.

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पुलिस अधिकारी ने बताया कि...
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एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि हर चीज 'आत्महत्या' की ओर इशारा करती है लेकिन जांच पूरी होने तक कुछ नहीं कहा जा सकता. अपने कैफे की श्रृंखला से शहरी इलाकों को लाते, कैपेचिनो, अमेरिकैनो और एस्प्रेसो समेत कॉफी के विभिन्न स्वाद से परिचित कराने वाले सिद्धार्थ 59 वर्ष के थे.

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अपने सपनों को पूरा करने के लिए पिता से पांच लाख रूपये उधार लेकर अपना नया कारोबार खड़ा करने वाले ‘कॉफी किंग’ सिद्धार्थ ने हजारों युवाओं के लिए रोजगार का सृजन किया. उनके परिवार के पास 350 एकड़ में फैला कॉफी एस्टेट है और उनका परिवार 140 साल से इस कारोबार में है.

दक्षिण कन्नड़ जिले के उपायुक्त शशिकांत सेंथिल ने बताया कि सिद्धार्थ के मित्रों ने उनके शव की पहचान की. करीब 36 घंटे के तलाश अभियान के बाद सिद्धार्थ के शव का पता लग सका. कथित तौर पर उनके द्वारा अपनी कंपनी ‘कॉफी डे इंटरप्राइजेज’ के निदेशक मंडल और कर्मचारियों को लिखे गए एक पत्र से यह जाहिर होता है कि वह कर्ज, कर (टैक्स) और शेयरों को वापस खरीदने के लिए मजबूर किये जाने को लेकर वित्तीय संकट का सामना कर रहे थे.

इस पत्र में पूर्व डीजी आयकर द्वारा काफी प्रताड़ित करने की शिकायत की गई है. हालांकि, आयकर विभाग ने आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि उसने आयकर अधिनियम के प्रावधानों के मुताबिक कार्रवाई की.



तलाश अभियान में कई एजेंसियां लगाई गई

अधिकारियों ने बताया कि तलाश अभियान में कई एजेंसियां लगाई गई थीं जिन्होंने नेत्रावती नदी पर स्थित एक पुल के नीचे पानी में उतारा गया था. इसी स्थान पर उन्हें कथित तौर पर आखिरी बार सोमवार रात देखा गया था. वेनलॉक हॉस्पिटल में पोस्टमार्टम किये जाने के बाद शव को चिकमगलूर जिला स्थित उनके घर ले जाया गया.

कॉफी एस्टेट और आस-पास के गांवों से काफी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए उमड़ पड़े. बताया जाता है कि सिद्धार्थ ने इनमें से कई लोगों की जिंदगी संवारी थी. चेतनाहल्ली से पहले शव को लोगों के अंतिम दर्शन के लिए चिकमगलूर में रखा गया.

सिद्धार्थ के लापता होने के दो दिन बाद दक्षिण कन्नड़ जिले में स्थानीय मछुआरों और गश्त कर रही पुलिस ने CCD के संस्थापक का शव मंगलुरू के पास नेत्रावती नदी के तट पर पाया. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, 'जांच चल रही है. प्रथम दृष्टया हर चीज सिर्फ आत्महत्या की ओर इशारा कर रही है. लेकिन हम अब भी किसी चीज से इनकार नहीं कर सकते. हमें पहले जांच पूरी करनी होगी.'

येदियुरप्पा ने बेंगलुरू में कहा, 'हमने शव ढूंढ लिया...उनके परिवार को दिलासा दिलाने के लिए मेरे पास कोई शब्द नहीं है.' आयकर विभाग द्वारा प्रताड़ित किये जाने के सिद्धार्थ के आरोपों को लेकर एक राजनीतिक वाक् युद्ध भी छिड़ गया है.



'ईज ऑफ इंडिंग बिजनेस...'

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, 'सिद्धार्थ की मौत चिंता पैदा करने वाली प्रवृत्ति को प्रदर्शित करती है.' उन्होंने ट्वीट किया, 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बीजेपी ने ईज ऑफ इंडिंग बिजनेस में तब्दील कर दिया.' कर्नाटक कांग्रेस ने सिद्धार्थ के निधन को लेकर ट्वीट किया, 'यह आईटी अधिकारियों द्वारा परेशान किए जाने और कर आतंक छाने एवं अर्थव्यवस्था के ढहने के साथ भारत में उद्यमियों की गिरती स्थिति का परिणाम है.' प्रदेश कांग्रेस ने कहा, 'जो कंपनियां संप्रग के कार्यकाल में फली-फूलीं, वे बंद हो रही हैं और कई लोग बेरोजगार हो रहे हैं.'

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धरमैया ने कहा कि सिद्धार्थ की मौत 'व्यथित करने वाली और संदेहास्पद' है. उन्होंने कथित रूप से सिद्धार्थ के पत्र का जिक्र करते हुए कहा, 'जिन वजहों और अदृश्य लोगों की वजह से उनके जीवन का दुखद अंत हुआ, उसका निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच से खुलासा होना चाहिए.'

सिद्धरमैया ने कहा कि पत्र में 'कर आतंक' की बात की गई है जो 'राजनीति से प्रेरित संस्थाओं का बदसूरत चेहरा है'. उन्होंने कहा, 'हम उभरते उद्यमियों को सुधार की कोशिश किए बिना क्या संकेत दे रहे हैं?'



पूर्व पीएम देवगौड़ा बोले...

पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा ने भी ट्वीट किया, 'मैं वी जी सिद्धार्थ के निधन से स्तब्ध हूं. वह बहुत सरल व्यक्ति थे. मैं पिछले 35 साल से उन्हें जानता हूं. उन्होंने हजारों लोगों के रोजगार का मार्ग प्रशस्त किया. सरकार को उनकी त्रासदीपूर्ण मौत के कारण की उचित तरीके से जांच करानी चाहिए.' कथित तौर पर सिद्धार्थ द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया है, 'मैं एक उद्यमी के रूप में नाकाम रहा.'

इसमें कहा गया है, 'मैंने काफी समय तक लड़ाई लड़ी लेकिन आज मैं हार गया क्योंकि मैं निजी इक्विटी साझेदार के और अधिक दबाव को नहीं झेल सकता जो मुझे शेयरों को वापस खरीदने के लिए मजबूर कर रहा है.... जबकि मैंने 6 महीने पहले एक दोस्त से बड़ी रकम उधार लेकर इस लेनदेन का कुछ हिस्सा पूरा किया है.'

उन्होंने पत्र में कहा है, 'अन्य ऋणदाताओं के अत्यधिक दबाव ने हालात के आगे हार मानने के लिए मजबूर कर दिया है. '

भाषा इनपुट के साथ

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First published: August 1, 2019, 5:04 AM IST
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