ई-कॉमर्स के लिए देश के व्‍यापारी क्‍यों कर रहे रेगुलेटरी बॉडी की मांग?

CAIT ने ई-कॉमर्स के लिए एक रेगुलेटरी बॉडी के गठन की भी मांग की है.

व्‍यापारियों का तर्क है कि बड़ी ई कॉमर्स कंपनियों में निवेश किए गए एफडीआई का उपयोग देश में बुनियादी ढांचा बनाने के लिए नहीं किया जा रहा है, बल्कि इसका उपयोग केवल खुदरा व्यापार को पूरी तरह कुचलने और नियंत्रित करने के लिए ई- कॉमर्स कंपनियों के व्यापार नीति के अपने पूर्ववर्ती उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है.

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नई दिल्‍ली : देशभर के व्‍यापारियों ने मोदी सरकार से ई-कॉमर्स के लिए एक रेगुलेटरी बॉडी के गठन की भी मांग की है. उनका तर्क है कि बॉडी के गठन से ई-कॉमर्स के क्षेत्र में विदेशी कंपनियों द्वारा भारतीय नीतियों और कानून का उल्लंघन नहीं किया जा सकेगा, साथ ही स्‍वदेशी व्‍यापारियों को भी मजबूती मिलेगी. इसके साथ ही उन्‍होंने ई-कॉमर्स क्षेत्र में एफडीआई नीति पर चर्चा शुरू करने के लिए सरकार के कदम का स्वागत किया है.

बड़े स्‍तर पर व्‍यापारियों का प्रतिनिधित्‍व करने वाले संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) लगातार ई-कॉमर्स के दिग्गज अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर एफडीआई नीति और फेमा के उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए लड़ाई लड़ रहा है.

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल कहते हैं कि भारत के ई-कॉमर्स व्यवसाय में कार्यरत ये बहुराष्ट्रीय कंपनियां हमारे देश को 'बनाना कंट्री' मान रही हैं और खुद ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह बर्ताव कर रही हैं. यह अब असहनीय हो चला है.

उनका तर्क है कि वास्तव में इन कंपनियों में निवेश किए गए एफडीआई का उपयोग देश में बुनियादी ढांचा बनाने के लिए नहीं किया जा रहा है, बल्कि इसका उपयोग केवल खुदरा व्यापार को पूरी तरह कुचलने और नियंत्रित करने के लिए ई- कॉमर्स कंपनियों के व्यापार नीति के अपने पूर्ववर्ती उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है. यह भी पूरी तरह स्पष्ट है कि कुछ ई कॉमर्स कंपनियों ने  मानदंडों को दरकिनार करते हुए 2018 में सरकार द्वारा जारी किए गए प्रेस नोट नंबर 2 के प्रावधानों से बचने के मार्ग विकसित कर लिए हैं. हालांकि, यही कारण है कि अब प्रेस नोट नं 2 को नए प्रेस नोट द्वारा बदलने की तत्काल आवश्यकता है. ई कामर्स के क्षेत्र में एफडीआई नीति के सभी खामियों को दूर करना बेहद जरूरी है.

वहीं, संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भारतिया ने भी कहा कि इन कंपनियों को एक बड़े ई कॉमर्स बाज़ार के रूप में संचालित करने की अनुमति है, पर उन्हें ई-कॉमर्स के इन्वेंट्री-आधारित मॉडल में बदल दिया गया है, जो विदेशी निवेश के चलते इस कंपनियों के लिए नियमों में निषिद्ध हैं. इस तरह की एमएनसी की व्यावसायिक प्रथाओं के आधार पर, हमने सरकार को सुझाव दिया है कि ई कॉमर्स में विदेशी कंपनियों या उनके समूह की कंपनियों के विस्तार, सहयोगी कंपनियां, लाभकारी मालिक और संबंधित पक्ष या व्यक्ति की परिभाषा व उनके स्थान को ई-कॉमर्स कंपनियों का साथी माना जाए. इसके अलावा समूह की कंपनियों और विदेशी मार्केटप्लेस संस्थाओं के सहयोगी को अपने उत्पादों को मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म पर, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष, स्वामित्व और मार्केटप्लेस इकाई द्वारा बेचने की अनुमति नहीं दी जाए.

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