रंग सांवला होने के चलते कर दी थी पत्नी की हत्या, कलकत्ता हाईकोर्ट ने लगाई मौत की सजा पर मुहर

कलकत्ता हाईकोर्ट की फाइल फोटो
कलकत्ता हाईकोर्ट की फाइल फोटो

दोषी की अपील को खारिज करते हुए, डिवीजन बेंच (Divisional Bench) ने माज़िदुल मियां को दोषी माना और कूचबिहार सेशन कोर्ट की इस केस में सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा. दोषी के खिलाफ अपनी पत्नी की हत्या के लिए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (Section 302) और धारा 498A के तहत मामला चल रहा था.

  • Share this:
कोलकाता. कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने अपनी पत्नी की हत्या (killing his wife) के मामले में एक व्यक्ति को दी गई मौत की सजा (Life Sentence) को बरकरार रखा है. यह व्यक्ति अपनी पत्नी के सांवले रंग (dark complexion) के चलते उसे प्रताड़ित (tortured) किया करता था. दोषी माज़िदुल मियां ने जिस औरत से शादी (Marriage) की थी, उसे शादी के करीब 7 महीने बाद जून, 1998 में अपने कूचबिहार (Cooch Behar) के घर में फांसी के फंदे पर झूलता पाया गया था.

अदालत ने बताया कि पीड़िता (Victim) के पिता, जो कि एक मामूली इंसान हैं, ने 16 अक्टूबर, 1997 को शादी के दौरान दूल्हे को 11,000 रुपये, चांदी के गहने, एक साइकिल (Cycle) और अन्य कीमती सामान दिए थे. न्यायमूर्ति (Justice) साहिदुल्लाह मुंशी और सुभाषीस दासगुप्ता की खंडपीठ ने कहा कि जब वह अपने ससुराल (matrimonial house) में आई, तो पीड़िता को उसके पति सहित ससुराल वालों की ओर से "उसके सांवले रंग के लिए" क्रूरता, उत्पीड़न और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा.

पिता ने अपनी खराब स्थिति के चलते बेटे को ससुराल जाने को कहा
महिला ने अपने पति द्वारा पिटाई किये जाने की घटना से भी कई बार मायके जाने पर अपने माता पिता को इसके बारे में बताया. पीठ ने कहा कि लेकिन उसके पिता ने अपनी खराब आर्थिक स्थिति के कारण उसे ससुराल जाने के लिए मनाया.
दोषी की अपील को खारिज करते हुए खंडपीठ ने 25 जून को जारी आदेश में माज़िदुल मियां की सत्र अदालत द्वारा दोषसिद्धि और उसे दी गई उम्र कैद की सजा को बरकरार रखा. उसे यह सजा अपनी पत्नी की हत्या करने और उसे प्रताड़ित करने को लेकर भारतीय दंड संहिता की संबद्ध धाराओं के तहत सुनाई गई थी.



यह भी पढ़ें:- कोविड-19 प्रसार रोकने के लिए 6 फीट की शारीरिक दूरी हो सकती है जरूरी- स्टडी

दोषी की मां को हत्या के आरोप से किया बरी लेकिन दोष बरकरार
दोषी की अपील को खारिज करते हुए, डिवीजन बेंच ने माज़िदुल मियां को दोषी माना और कूचबिहार सेशन कोर्ट की इस केस में सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा. दोषी के खिलाफ अपनी पत्नी की हत्या के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और धारा 498A के तहत मामला चल रहा था.

खंडपीठ (Divisional Bench) ने महिला को प्रताड़ित करने के आरोपों में उसकी सास की दोषसिद्धि (conviction) को भी बरकरार रखा, लेकिन हत्या (murder) के आरोप से उसे बरी कर दिया.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज