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नारदा स्टिंग केस: हाईकोर्ट ने 5000 जुर्माना लगाकर ममता को दी हलफनामा दाखिल करने की इजाजत

ममता बनर्जी को मिली अनुमति. (File pic)

ममता बनर्जी को मिली अनुमति. (File pic)

Narada Sting Case: यह हलफनामा पिछले महीने नारदा स्टिंग केस में हुई टीएमसी के तीन नेताओं की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ऑफिस के बाहर हुए घटनाक्रम पर सरकार का पक्ष दाखिल करने के लिए है.

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    कोलकाता. कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने बुधवार को सुनवाई करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee), कानून मंत्री मलय घटक और राज्य सरकार को नारदा स्टिंग केस में कोर्ट के सामने हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दे दी है. मंगलवार को हाईकोर्ट ने इनके आवेदनों पर आदेश सुरक्षित रख लिया था. नारद स्टिंग मामले को ट्रांसफर करने के लिए सीबीआई की याचिका के संबंध में अदालत के सामने हलफनामा दायर करने के लिए सरकार ने आवेदन किया था. इसके साथ ही हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी और राज्‍य सरकार पर समय से हलफनामा न दाखिल करने पर 5000 रुपये का जुर्माना लगाया.

    यह हलफनामा पिछले महीने नारदा स्टिंग केस में हुई टीएमसी के तीन नेताओं की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ऑफिस के बाहर हुए घटनाक्रम पर सरकार का पक्ष दाखिल करने के लिए है. सीबीआई ने नारदा स्टिंग मामले को विशेष सीबीआई अदालत से हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने का अनुरोध किया था. ममता बनर्जी, मलय घटक और राज्य सरकार की ओर से पेश हुए वकीलों और सीबीआई की दलीलें पेश होने के बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल की अध्यक्षता वाली हाईकोर्ट की पांच न्यायाधीशों की पीठ ने मंगलवार को आवेदन पर आदेश सुरक्षित रख लिया था.

    पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने नारदा मामले के संबंध में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और अन्य द्वारा दायर हलफनामों को रिकॉर्ड करने से इनकार करने वाले हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी.

    अदालत ने ममता बनर्जी और बंगाल के कानून मंत्री मलय घटक को नए सिरे से याचिका दायर करने का निर्देश दिया था. 9 जून को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल के नेतृत्व में कलकत्ता हाईकोर्ट की पांच जजों की पीठ ने ममता बनर्जी और मलय घटक द्वारा दायर हलफनामों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था.

    हाईकोर्ट ने कहा था कि तृणमूल नेताओं ने सही समय पर हलफनामा दाखिल नहीं करने का जोखिम उठाया और अब उन्हें अपनी मर्जी से हलफनामा दाखिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती. ममता बनर्जी 21 जून को इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई थीं.

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