क्या कोविड-19 और ब्लैक फंगस एकसाथ बना सकता है शिकार? जानें क्या कहती है रिपोर्ट

ब्लैक फंगस नए तरह का संक्रमण नहीं है, लेकिन यह बहुत ही कम फैलता देखा गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

ब्लैक फंगस नए तरह का संक्रमण नहीं है, लेकिन यह बहुत ही कम फैलता देखा गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

Black Fungus in India: ब्लैक फंगस की बीमारी आमतौर पर उन लोगों में देखी जा रही, जो ऐसी ऐसी दवाएं ले रहे हैं, जो बीमारियों से लड़ने की शरीर की क्षमता को बढ़ाती हैं. अब सवाल उठता है कि क्या कोई व्यक्ति कोविड-19 और ब्लैक फंगस का शिकार एकसाथ हो सकता है.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) के बीच भारत में म्यूकरमाइकोसिस (Mucormycosis) नाम की मुश्किल ने भी दस्तक दी है. इसे आम भाषा में ब्लैक फंगस (Black Fungus) भी कहा जा रहा है. इसके चलते मरीजों की नाक और आंख खासतौर से प्रभावित हो रहे हैं. डॉक्टर्स और सरकार ब्लैक फंगस का शिकार मरीजों के उपचार और कारणों का पता लगाने में जुटे हुए हैं. हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि डायबिटीज वाले मरीजों को इस फंगल इंफेक्शन का खतरा ज्यादा है.

अब तक सामने आए म्यूकरमाइकोसिस के मामले में देखने को मिला है कि कोविड-19 से उबरने के बाद मरीज इस बीमारी का शिकार हो रहे हैं. अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, म्यूकरमाइकोसिस एक गंभीर, लेकिन दुर्लभ संक्रमण है. इसका मुख्य कारण म्यूकरमाइसीट्स नाम के मोल्ड्स के समूह से होता है. ये मोल्ड्स पूरे पर्यावरण में रहते हैं.

ये बीमारी आमतौर पर उन लोगों को अपनी जकड़ में लेती है, जो ऐसी ऐसी दवाएं ले रहे हैं, जो जर्म्स और बीमारियों से लड़ने की शरीर की क्षमता को बढ़ाती हैं. अब सवाल उठता है कि क्या कोई व्यक्ति कोविड-19 और ब्लैक फंगस का शिकार एकसाथ हो सकता है.

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मीडिया रिपोर्ट्स में MedicineNet के हवाले से कहा जा रहा है कि कोविड-19 के साथ-साथ व्यक्ति ब्लैक फंगस का शिकार भी हो सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे मरीज जिनकी हालत बेहद गंभीर बनी हुई है या HIV और डायबिटीज जैसी बीमारी से जूझ रहे मरीजों के बीच इनका खतरा ज्यादा है. कोविड-19 के साथ फंगल इंफेक्शन का शिकार होना कई बार घातक साबित हो सकता है.


ICMR के अनुसार, कोविड-19 के मरीजों को इस तरह के फंगल इंफेक्शन का जोखिम ज्यादा है. इनमें वे मरीज भी शामिल हैं, जो उपचार के दौरान स्टेरॉयड्स ले रहे थे और लंबे समय तक अस्पताल को ICU में थे. जानकार इस बीमारी के तार डायबिटीज से जोड़कर देख रहे हैं. इसमें नाक के ऊपर के हिस्से में कालापन या रंग बदलने वाली इस बीमारी से धुंधला दिखना, सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी या खांसी में खून आने जैसी परेशानी हो सकती हैं.

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