राजस्थान में क्या गिर जाएगी अशोक गहलोत की सरकार? ये तीन रास्ते सुलझा सकते हैं सियासी संकट

राजस्थान में क्या गिर जाएगी अशोक गहलोत की सरकार? ये तीन रास्ते सुलझा सकते हैं सियासी संकट
अशोक गहलोत और सचिन पायलट की फ़ाइल फोटो

Rajasthan Political Crisis: अगले कुछ घंटों में राजस्थान की सियासी तस्वीर साफ हो सकती है. आईए एक नजर डालते हैं उन विकल्पों पर जिससे राजस्थान के सियासी संकट के नतीजे निकल सकते हैं...

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नई दिल्ली. राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार पर संकट के बादल गहराते दिख रहे हैं. कांग्रेस में सरकार बचाने की पुरजोर कोशिश जारी है. हालांकि सचिन पायलट के बगावती तेवर से अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के लिए सरकार बचाना मुश्किल चुनौती प्रतीत हो रहा है. सचिन पायलट (Sachin Pilot) के समर्थकों का दावा है कि उनके साथ 25 से 30 विधायक हैं. उधर कांग्रेस इन दावों को खारीज कर रही है. पार्टी का कहना है कि उन्हें अभी भी सारे विधायकों का समर्थन हासिल है. जाहिर है अगले कुछ घंटों में राजस्थान (Rajasthan) की सियासी तस्वीर साफ हो सकती है. आईए एक नजर डालते हैं उन विकल्पों पर जिससे राजस्थान के सियासी संकट के नतीजे निकल सकते हैं.

क्या है सीटों का सियासी गणित?
सबसे पहले बात राजस्थान में विधानसभा की ताजा तस्वीर पर. यहां 200 सदस्यीय विधानसभा में मैजिक नंबर है 101. फिलहाल कांग्रेस वहां 125 विधायकों के समर्थन के साथ सरकार चला रही है, जिसमें से 107 विधायक कांग्रेस के हैं. इसके अलावा सरकार को CPM और BTP के 2 , RLP के 1 और 13 निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है. वहीं, बीजेपी के पास अपने कुल 72 विधायक हैं, इसके अलावा पार्टी को आरएलपी के 3 सदस्यों का समर्थन भी प्राप्त है. बता दें कि सचिन पायलट के खेमे 25-30 विधायकों के आने की बात कही जा रही है. लेकिन फिलहाल इस पर अभी कुछ भी साफ-साफ नहीं कहा जा सकता है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजस्थान में फिलहाल 3 विकल्प दिख रहे हैं.

पहला विकल्प
कांग्रेस के बड़े नेता सचिन पायलट को मना सकते हैं. अशोक गहलोत को ये आदेश दिया जा सकता है कि वो पायलट को बिना किसी रोक-टोक के काम करने दें. कांग्रेस के सीनियर लीडर कपिल सिब्बल इस बारे में पहले ही कह चुके हैं कि पार्टी को समस्या का समाधान तलाशना चाहिए. हालांकि पार्टी के कुछ लोगों का कहना है कि पायलट अब किसी का फोन नहीं उठा रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस को ये फैसला 6 महीने पहले करना चाहिए थे. अब काफी देर हो चुकी है.



दूसरा विकल्प
कहा जा रहा है कि मौजूदा हालात में पार्टी के कई और नेता विद्रोह कर सकते हैं. ऐसे में अगर 25-30 विधायक पायलट के खेमे में आ जाय तो फिर गहलोत की सरकार अल्पमत में आ जाएगी. कई विधायक इस्तीफा दे सकते हैं. यानी मध्य प्रदेश जैसे हालात बन सकते हैं. ऐसे में विधानसभा की ताकत घट जाएगी और सरकार बनाने के लिए 101 नहीं बल्कि सिर्फ 85-90 विधायकों की जरूरत पड़ेगी. लिहाजा यहां बीजेपी की सरकार बन बन सकती है और फिर 6 महीने के अंदर उपचुनाव कराए जा सकते हैं.

तीसरा विकल्प
सचिन पायलट अपने विधायकों के साथ तीसरा मोर्चा बना सकते हैं. ऐसे में गहलोत निर्दलीय और कुछ अन्य दलों के साथ सरकार में बने रह सकते हैं. लेकिन सरकार काफी कमजोर हो जाएगी. कहा ये भी जा रहा है कि पायलट तीसरा मोर्चा बनाकर बीजेपी के साथ आ सकते हैं, लेकिन इस बात की गांरटी नहीं है कि उन्हें सीएम का पद मिलेगा.
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