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प्रदर्शन के नाम पर व्यावसायिक संपत्तियां नष्ट होती रहीं तो क्या भारत विकास कर पाएगा?

राष्ट्रीय जांच एजेंसी की नोटिस की टाइमिंग ने किसान आंदोलनकारियों को सवाल उठाने का मौका दे दिया है. (पीटीआई फोटो)

राष्ट्रीय जांच एजेंसी की नोटिस की टाइमिंग ने किसान आंदोलनकारियों को सवाल उठाने का मौका दे दिया है. (पीटीआई फोटो)

किसी के भी मन में यह सवाल उठ सकता है कि क्या व्यावसायिक इंफ्रास्ट्रक्चर (Business Assets) को नुकसान पहुंचाने के पीछे कोई और मकसद काम कर रहा है? वो भी ऐसे वक्त में जब भारत अपनी अर्थव्यवस्था से चीन को अलग करने की कोशिश कर रहा है.

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    नई दिल्ली. किसान आंदोलन के नाम पर हजारों टेलिकॉम टावर (Telecom Towers) तोड़ने का फायदा आखिर किसे होगा? आईफोन (Iphone) के कॉन्ट्रैक्ट मैन्यूफैक्चरर की फैक्टरी में हिंसा से आखिर किसे फायदा होगा? वो भी ऐसे वक्त में जब सरकार वैश्विक कंपनियों को चीन से भारत में अपना उत्पादन बेस शिफ्ट करने के लिए प्रयास कर रही है. भारत के बड़े बिजनेस घरानों के खिलाफ जानबूझकर चलाए गए भ्रामक अभियान से आखिर कौन फायदा उठाएगा? अगर निवेशकों का भारत में भरोसा टूटता है तो आखिर किसका फायदा होगा?

    रिलायंस की ऐतिहासिक घोषणा
    आइए एक नजर डालते हैं. अक्टूबर 2020 में रिलायंस ने घोषणा की कि उसने चिप मेकर Qualcomm के साथ कोलैबरेशन किया है. इसी महीने की शुरुआत में मुकेश अंबानी ने इंडियन मोबाइल कांग्रेस में घोषणा की कि रिलायंस जियो 2021 की दूसरी छमाही में 5G लॉन्च करेगी. भारत में मोबाइल फोन के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था जब किसी भारतीय कंपनी ने एक नए युग की घोषणा की थी. इसके बाद भारत को नेटवर्क डेवलपमेंट के लिए चीनी टेलिकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. वास्तविकता में भारत के लिए ये गर्व का क्षण था.

    महामारी के बीच वैश्विक आर्थिक संकट में जियो में हुआ सबसे बड़ा निवेश
    यहां तक कि कोरोना महामारी की भयावहता के दौरान भी वैश्विक आर्थिक संकट के बीच रिलायंस जियो ने 25 प्रतिशत हिस्सा बेच कर 1.18 लाख करोड़ का निवेश करवाया. इससे कंपनी की इंटरप्राइज वैल्यू 5.16 लाख करोड़ की हो गई. ये हाल-फिलहाल किसी भी भारतीय कंपनी में आने वाला सबसे बड़ा विदेशी निवेश था.

    इससे पहले भी रिलायंस जियो टेलिकॉम रेट और डेटा चार्जेस में जबरदस्त कमी लाकर पूरी इंडट्री में क्रांति ला चुका था. और शायद यही वजह थी कि कम आय वाले भारतीय लोगों के लिए ब्रॉडबैंड की सुविधा का इस्तेमाल करना और ज्यादा आसान हो गया.

    लेकिन इन सब के बाद यह देखकर आश्चर्य होता है कि टेलिकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर को बर्बाद किया जा रहा है. क्या रिलायंस जैसी कंपनी को 5G की तमन्ना के लिए निशाने पर लिया जा रहा है?

    व्यावसायिक इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाने के पीछे किसके हित
    इसलिए किसी के भी मन में यह सवाल उठ सकता है कि क्या व्यावसायिक इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाने के पीछे कोई और मकसद काम कर रहा है. वो भी ऐसे वक्त में जब भारत अपनी अर्थव्यवस्था से चीन को अलग करने की कोशिश कर रहा है. देश कोशिश कर रहा है कि अर्थव्यवस्था की रफ्तार दहाई में हो जिससे देश ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी क्लब का हिस्सा बन सके.

    सभी राजनीतिक पार्टियों को आलोचना करनी चाहिए
    ऐसे वक्त में जब विश्व नए उद्यमियों का जमकर सम्मान कर रहा है. साथ ही उसने भारत के कुछ बड़े उद्यमियों और व्यावसायिक घरानों को मान्यता देना शुरू किया है. वो भी ऐसे उद्योगपति जिन्होंने बेहद सामान्य परिवेश से अपनी शुरुआत की थी और भारत को आर्थिक शक्ति बनाने में मदद की है. ऐसे में भारतीय उद्योगपतियों को निशाने पर लेना और इंफ्रास्ट्रक्चर नष्ट करने की सभी राजनीतिक पार्टियों को आलोचना करनी चाहिए. चाहे वो किसी भी विचारधारा से ताल्लुक रखती हों.

    (Pathikrit Payne का यह लेख मूलत: अंग्रेजी में है. इसे यहां क्लिक कर पूरा पढ़ा जा सकता है.)

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