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निर्भया के गवाह पर FIR के बारे में कोर्ट ने कहा- 'अदालत से बाहर कही बातों से नहीं जांच सकते विश्वसनीयता'

News18Hindi
Updated: December 14, 2019, 5:13 PM IST
निर्भया के गवाह पर FIR के बारे में कोर्ट ने कहा- 'अदालत से बाहर कही बातों से नहीं जांच सकते विश्वसनीयता'
इस मामले में अगली सुनवाई 20 दिसंबर को होगी (सांकेतिक फोटो)

निर्भया गैंगरेप मामले (Nirbhaya Gang rape Case) में एकमात्र चश्मदीद गवाह 23 वर्षीय पीड़िता का दोस्त (Friend) है, जो उस घटनाक्रम के समय बस में उसके साथ था. इस दौरान उसे भी चोटें आई थीं.

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नई दिल्ली. निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले (Nirbhaya gang rape and murder case) के संबंध में एक आवेदन पर सुनवाई करते हुए दिल्ली की एक अदालत ने कहा कि किसी गवाह की विश्वसनीयता (credibility) का पता उसके द्वारा अदालत के बाहर कही गई बात से नहीं लगाया जा सकता है. वकील (advocate) ए. पी. सिंह द्वारा दायर अर्जी पर सुनवाई करते हुए मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार सिरोही ने कहा, "गवाह हलफनामे के तहत बयान दर्ज कराते हैं. जो वे अदालत के बाहर कहते हैं, उसके आधार पर एक गवाह के रूप में उनकी विश्वसनीयता पर सवाल नहीं उठा सकते हैं."

वकील सिंह 2012 में निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले में मौत की सजा (Death Sentence) पाए चार में से एक अपराधी के पिता की ओर से घटनाक्रम के एकमात्र गवाह के खिलाफ एफआईआर (FIR) की मांग कर रहे थे.

23 साल का दोस्त है एक मात्र गवाह, गैंगरेप के दौरान बस में ही था
इस मामले में अगली सुनवाई 20 दिसंबर को होगी. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि एकमात्र गवाह ने पैसे लेकर विभिन्न समाचार चैनलों को साक्षात्कार दिए हैं. उन्होंने यह दावा किया कि मीडिया ट्रायल (Media Trail) के परिणामस्वरूप मामले को प्रभावित किया गया है. एकमात्र चश्मदीद गवाह 23 वर्षीय पीड़िता का दोस्त है, जो उस घटनाक्रम के समय बस में उसके साथ था. इस दौरान उसे भी चोटें आई थीं.

पवन कुमार गुप्ता के पिता हीरा लाल गुप्ता द्वारा दायर की गई शिकायत में कुछ हालिया मीडिया रिपोर्टों का हवाला दिया गया, जिसमें आरोप लगाया गया कि गवाह ने विभिन्न समाचार चैनलों पर साक्षात्कार (Interview) के लिए पैसे लिए थे.

'एकमात्र गवाह होने के चलते उसकी गवाही ने मामले के परिणाम को दृढ़ता से प्रभावित किया'
शिकायत में कहा गया है कि एकमात्र गवाह (sole witness) होने के नाते उसकी गवाही ने मामले के परिणाम को दृढ़ता से प्रभावित किया है, जिसके कारण अभियुक्तों को मौत की सजा दी गई है. मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए वकील सिंह ने कहा कि उक्त तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर यह स्पष्ट है कि उसकी गवाही झूठी और मनगढ़ंत थी.सितंबर, 2013 में ही ट्रायल कोर्ट ने चारों दोषियों को सुनाई थी मौत की सजा
एक 23 वर्षीय युवती का 16 दिसंबर, 2012 को वीभत्स तरीके से दुष्कर्म किया गया और उसके साथ काफी अत्याचार भी किया, जिससे उसकी मौत हो गई. सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर यौन उत्पीड़न और हत्या का मामला दर्ज किया गया. आरोपियों में से एक नाबालिग था, जिसे जुवेनाइल अदालत (Juvenile Justice Court) में पेश किया गया था. इसके अलावा एक अन्य आरोपी ने तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी.

सितंबर 2013 में ट्रायल कोर्ट (Trail Court) द्वारा चारों दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई थी और मार्च 2014 में दिल्ली हाईकोर्ट ने, मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने इस सजा को बरकरार रखा.

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First published: December 14, 2019, 5:13 PM IST
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