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OPINION | क्या कांग्रेस के लिए अगले मनमोहन सिंह बनेंगे रघुराम राजन?

News18Hindi
Updated: November 3, 2019, 4:44 PM IST
OPINION | क्या कांग्रेस के लिए अगले मनमोहन सिंह बनेंगे रघुराम राजन?
कांग्रेस को देश के सामने एक अच्छे आर्थिक विजन को पेश करने की जरूरत है और यहां राजन फिट बैठते हैं.

मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) और रघुराम राजन (Raghuram Rajan) के बीच कई समानताएं हैं. दोनों भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़े पदों पर काबिज रहे हैं. दोनों के पास बड़े विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की डिग्री है. दोनों रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे हैं...

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  • Last Updated: November 3, 2019, 4:44 PM IST
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(कल्याणी शंकर)

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन (Raghuram Rajan) एक बार फिर से सुर्खियों में हैं. इस बार उन्होंने देश की खराब इकॉनमी (Economy) और बैंकिंग सेक्टर के हालात को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) पर निशाना साधा है. पिछले दिनों कोलंबिया विश्वविद्यालय में सीतारमण ने कहा था कि राजन के गवर्नर रहते हुए सिर्फ एक फोन कॉल पर बड़े नेताओं को लोन दे दिए जाते थे. उन्होंने यह भी कहा कि भारत के सरकारी बैंक मुश्किल दौर से निकलने के लिए सरकारी मदद का इंतज़ार करते हैं.

राजन ने बाद में वित्त मंत्री को जवाब देते हुए कहा कि वो तीन साल गवर्नर (2013-2016) थे और इस दौरान करीब दो साल तक बीजेपी की सरकार थी. उन्होंने इसके बाद ये भी दावा किया कि उनके कार्यकाल के दौरान ही बैंकों में 'फंसे हुए लोन' (Bad Loan) के खिलाफ सफाई अभियान की शुरुआत हुई थी. बता दें कि वित्त मंत्री ने आलोचना करते हुए मनमोहन सिंह के साथ-साथ राजन को भी घसीटा था.

कई लोगों को यह लग रहा है कि रघुराम राजन कांग्रेस के लिए तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं और पार्टी के लिए अगले मनमोहन सिंह साबित हो सकते हैं. कांग्रेस को एक विश्वसनीय चेहरे की भी तलाश हैं और राजन इसमें बिल्कुल फिट बैठते हैं. सोनिया गांधी ने साल 2004 में 'आम आदमी' का नारा दिया था. अगले 10 साल तक इस नारे का असर दिखा, लेकिन पिछले पांच साल से पार्टी के पास कोई जवाब नहीं है.


कांग्रेस को देश के सामने एक अच्छे आर्थिक विजन को पेश करने की जरूरत है और यहां राजन फिट बैठते हैं. खास बात ये है कि कांग्रेस के बड़े नेताओं से उनके रिश्ते भी अच्छे हैं. याद रहे कि 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कई ऐसे लेख छपे, जिसमें रघुराम राजन को अगले प्रधानमंत्री के तौर पर अच्छे विकल्प की तरह पेश किया गया. कहा गया कि राजन पीएम मनमोहन सिंह के चुने हुए सबसे अच्छे लोगों में से थे.

रघुराम राजन कांग्रेस के लिए पीएम का चेहरा होंगे या नहीं, फिलहाल ये कहना काफी जल्दबाजी होगी. लेकिन ये सच है कि राजन पिछले कुछ समय से पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी की आलोचना कर रहे हैं.

आपको याद होगा 1991 में पीवी नरसिंह राव जब पीएम थे उस वक्त उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाने-माने चेहरे मनमोहन सिंह को अपनी सरकार में कई अहम रोल दिए थे. दरअसल उन दिनों भारत की आर्थिक मोर्चे पर हालात अच्छे नहीं थे. देश को वर्ल्ड बैंक और इंटरनैशनल मॉनेट्री फंड (IMF) से लोन की जरूरत थी. ऐसे में मनमोहन सिंह को ये जिम्मेदारी दी गई.

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उन दिनों आर्थिक मोर्चे पर देश के हालात अच्छे नहीं थे. सबसे पहले राव ने वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी देने के लिए आईजी पटेल को याद किया. पटेल उन दिनों लंदन स्कूल ऑफ इकॉनोमिक्स के डायरेक्टर थे. लेकिन उन्होंने इस पोस्ट के लिए मना कर दिया. इसके बाद उन्होंने ये जिम्मेदारी मनमोहन सिंह को दे दी. जल्द ही वो देश में आर्थिक उदारीकरण का चेहरा बन गए.

इसके बाद मनमोहन सिंह के करियर ने नई उड़ान भरी. उन्हें लोग राजनेता नहीं बल्कि एक टेक्नोक्रैट के तौर पर जानने लगे. साल 2004 में जब सोनिया गांधी ने पीएम बनने से मना कर दिया तो मनमोहन सिंह को सबसे बड़ा पोस्ट मिल गया. उन दिनों मनमोहन सिंह सरकार का कामकाज देख रहे थे तो सोनिया गांधी पार्टी का. साल 2009 में जीत के बाद भी सोनिया ने मनमोहन सिंह को पीएम बने रहने के लिए कहा. पूरे 10 साल तक मनमोहन सिंह गठबंधन की सरकार चलाते रहे.

मनमोहन सिंह और रघुराम राजन के बीच कई समानताएं हैं. दोनों भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़े पदों पर काबिज रहे हैं. दोनों के पास बड़े विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की डिग्री है. दोनों रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे हैं. दोनों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े इकॉनॉमिस्ट रहे हैं. इतना ही नहीं दोनों मिडिलक्लास के बीच काफी लोकप्रिय भी हैं.


राजन का आर्थिक विज़न काफी बोल्ड और साफ है. हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था. 'भारत को एक मजबूत ग्रोथ की जरूरत है. यहां बड़े रिफॉर्म की जरूरत है. अच्छी खबर यह है कि सरकार के पास राजनीतिक मजबूती है और आर्थिक उदारीकरण लागू करने की ताकत है. लेकिन बुरी खबर ये है कि सरकार ने अभी तक कुछ नहीं किया है.'

लेकिन यहां दो बिंदुओं पर सोचने की जरूरत है. पहला ये कि क्या कांग्रेस उन्हें अगले मनमोहन सिंह के तौर पर चुनेगी. दूसरा ये कि ये जरूरी नहीं है कि कोई कामयाब आरबीआई गवर्नर देश का एक अच्छा नेता साबित हो सकता है. इस साल मार्च में एक बुक लॉन्च के दौरान राजन ने कहा था कि अगर उन्हें मौका मिलता है तो फिर वो उसका इस्तेमाल करेंगे. इससे ये संकेत मिलते हैं कि वो इस चुनौता के लिए तैयार हैं. बस उन्हें एक अच्छे लक की जरूरत है.

(लेखक राजनीतिक राजनीतिक विश्लेषक हैं, ये उनके अपने विचार है.)

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First published: November 3, 2019, 1:03 PM IST
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