क्या महाराष्ट्र में राज-राहुल और पवार की तिकड़ी बीजेपी के विजयी रथ को रोक पाएगी?

महाराष्ट्र में बीजेपी को पूरी उम्मीद है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में आसानी से उन्हें दोबार जीत मिलेगी. फडणवीस ये दावा कर रहे हैं कि बीजेपी और शिव सेना के गठबंधन को 288 सीटों में से कम से कम 220 पर जीत मिलेगी.

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Updated: July 12, 2019, 3:16 PM IST
क्या महाराष्ट्र में राज-राहुल और पवार की तिकड़ी बीजेपी के विजयी रथ को रोक पाएगी?
राज ठाकरे के साथ सोनिया गांधी
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Updated: July 12, 2019, 3:16 PM IST
(वेंकटेश केसरी)

कुछ महीने पहले किसी को भी इस बात की संभावना नहीं थी कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के मुखिया राज ठाकरे और यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी के बीच कोई मीटिंग भी हो सकती है. लेकिन राजनीति में हर चीज़ मुमकिन है.



पिछले दिनों दिल्ली में 10 जनपथ यानी सोनिया गांधी के आवास पर इन दोनों नेताओं की बैठक हुई थी. इन दोनों नेताओं की मुलाकात से कई तरह राजनीति मायने निकाले जा रहे हैं. इस साल मई में लोकसभा चुनाव में बीजेपी की जीत और फिर नरेंद्र मोदी के दोबारा प्रधानमंत्री बनने के बाद राजनीतिक तस्वीर थोड़ी बदल गई है. सोनिया और ठाकरे की मुलाकात से ये साफ है कि अब MNS कांग्रेस के लिए अछूत नहीं है.

महाराष्ट्र में बीजेपी को पूरी उम्मीद है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में आसानी से उन्हें दोबार जीत मिलेगी. फडणवीस ये दावा कर रहे हैं कि बीजेपी और शिव सेना के गठबंधन को 288 सीटों में से कम से कम 220 पर जीत मिलेगी. महाराष्ट्र में अक्टूबर के आखिर में चुनाव होने हैं. इन्हीं दिनों झारखंड और हरियाणा विधानसभा के भी चुनाव होंगे. इन तीनों राज्यों में इस वक्त बीजेपी की सरकार है.

पिछले महीने बॉम्बे हाईकोर्ट ने 27 जून को मराठा समुदाय के लिए नौकरी और शिक्षण संस्थाओं में आरक्षण के लिए राज्य सरकार के फैसले पर मुहर लगाई थी. चुनाव में इसका फायदा बीजेपी और शिवसेना को मिल सकता है. दरअसल राज्य में 32 फीसदी लोग इसी समुदाय से हैं.

हालांकि यहां शिवसेना बीजेपी की सहयोगी पार्टी है. लेकिन 2019 के चुनाव में 303 सीट जीतने के बाद महाराष्ट्र में वो छोटे भाई की भूमिका में है. केंद्र में उनके कोई मंत्री भी नहीं है. लेकिन उनके पास फिलहाल चुप रहने के अलावा कोई चारा भी नहीं है.

लोकसभा चुनाव के दौरान MNS ने अपना कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं किया था. लेकिन राज ठाकरे ने कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के लिए प्रचार किया था. वो रैली में भीड़ जमा करने में कामयाब रहे थे. हालांकि उनका प्रचार वोट में तब्दील नहीं हुआ.
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ठाकरे को जब लगा कि चुनाव से पहले गठबंधन के लिए राज्य स्तर पर कांग्रेस के नेताओं से बातचीत कर कोई फायदा नहीं होने वाला है तो उन्होंने सीधे दिल्ली का रुख किया. अगर प्रचार में ठाकरे की मदद ली जा सकती है तो फिर ये तय है कि कांग्रेस-एनसीपी के साथ वो चुनाव लड़ने के लिए गठबंधन भी कर सकते हैं.

महाराष्ट्र में बीजेपी की जीत ने वहां की राजनीति बदल दी है. एक तरफ विपक्षी पार्टियां एकजुट हो रही है. तो दूसरी तरफ उन्होंने शिवसेना का 'मराठी मानुस और हिन्दुत्व' का मुद्दा कमज़ोर कर दिया है.

यहां कांग्रेस के लिए अगला चुनाव करो या मरो की लड़ाई है. पार्टी के पास कोई बड़ा नेता नहीं है और साथ ही उनके समर्थकों की संख्या भी लगातार कम हो रही है. ऐसे में अगर MNS और कांग्रेस एक साथ आ जाए और शरद पवार भी इनके साथ हाथ मिला तो ये मुकाबला दिलचप्स हो सकता है.

राहुल गांधी पहले ही कह चुके हैं को वो बीजेपी से लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है. इसके लिए वो महाराष्ट्र में एक महीने के लिए चुनावी प्रचार भी करने को तैयार है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या राज ठाकरे- राहुल गांधी और पवार की तिकड़ी बीजेपी को हराने में कामयाब होगी.

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं ये उनके निजी विचार हैं)

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