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चार साल बाद रिहा हुईं शशिकला क्या तमिलनाडु चुनाव में साबित होंगी गेमचेंजर?

File photo of Sasikala.
File photo of Sasikala.

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव (Tamil nadu assembly election 2021) से पहले शशिकला (Sasikala) की जेल से वापसी राज्य में कई महत्वपूर्ण बदलाव की वजह बन सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 27, 2021, 1:09 PM IST
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चेन्नई. तमिलनाडु (Tamil nadu assembly election 2021) में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं. इससे पहले शशिकला (Sasikala) की जेल से वापसी राज्य में कई महत्वपूर्ण बदलाव की वजह बन सकती है. हालांकि उनकी राजनीति में वापसी अनिश्चित है, लेकिन उनकी रिहाई का इस साल होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक के प्रति मतदाताओं के मूड पर असर पड़ सकता है.

शशिकला को चार साल की कैद के बाद बुधवार को परप्पाना अग्रहारा केंद्रीय जेल से रिहा कर दिया गया. उन्हें 14 फरवरी, 2017 को बेनामी संपत्ति के मामले में दोषी ठहराया गया था और 10 करोड़ रुपये का जुर्माना देने के बाद रिहा कर दिया गया. अगर वह 10 करोड़ रुपये का जुर्माना नहीं भरतीं तो उन्हें 13 महीने और जेल में काटने पड़ते.

आय से अधिक संपत्ति का था मामला
आय से अधिक संपत्ति के मामले में तमिलनाडु की पूर्व सीएम जयललिता पहली आरोपी थीं. तंजावुर के पास मन्नारगुडी निवासी शशिकला ने थेवर समुदाय के बीच एक व्यापक प्रभाव पैदा किया. सुपरस्टार रजनीकांत के अपनी नई पार्टी के साथ चुनावी राजनीति में ना आने के फैसले से शशिकला की तमिलनाडु की राजनीति में नए सिरे से मौजूदगी हो सकती है.
सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक की सहयोगी भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने पहले ही शशिकला की मदद के लिए एक चुनावी योजना बनानी शुरू कर दी है. हालांकि, अन्नाद्रमुक नेतृत्व इस बात पर अभी कोई फैसला नहीं ले पाया है कि शशिकला को पार्टी में वापस लिया जाए या नहीं.



साल 1984 में जयललिता की मदद से राजनीति में आईं शशिकला को सीएम इके पलानीस्वामी और उनके डिप्टी ओ पन्नीरसेल्वम ने पार्टी से बाहर कर दिया था. जयललिता की मौत के बाद बीते चार साल से दोनों पार्टी और सरकार पर काबिज हैं.

बीजेपी का शशिकला के प्रति क्या है रुख?
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष एल गणेशन ने बीते शुक्रवार बयान जारी कर मीडिया से आग्रह किया कि शशिकला की तबीयत की खबरों को सनसनीखेज नहीं बनाया जाए. भाजपा नेता ने कहा, 'हर कोई जानता है कि जयललिता और शशिकला के बीच दोस्ती और वफादारी की कोई तुलना नहीं है. अगर किसी ने AIADMK और उसके प्रतीक चिह्न को धोखा दिया, तो यह जयललिता से विश्वासघात के बराबर होगा. शशिकला भी इसको जानती होंगी. मुझे आश्चर्य है कि लोग कैसे मान सकते हैं कि वह ऐसा (विश्वासघात) करेगी. हमारा मानना है कि सब अच्छा होगा.'

पति नटराजन के पब्लिक रिलेशन की वजह से ही शशिकला, जयललिता के करीब आ सकीं. साल 1980 के दशक के अंत में दोनों जयललिता के घर शिफ्ट हो गए. एमजीआर के निधन के बाद शशिकला के करीबी रिश्तेदारों ने जयललिता की रक्षा की. नटराजन ही थे जिन्होंने एक किंगमेकर की भूमिका निभाई.
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