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OPINION: क्‍या शिवसेना-NCP-कांग्रेस नेताओं के असंतोष से उबरकर सुशासन दे पाएंगे उद्धव?

महाराष्‍ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार के मंत्रिमंडल विस्‍तार के बाद  शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं में मंत्रिपद नहीं मिलने से खासी नाराजगी है.

महाराष्‍ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार के मंत्रिमंडल विस्‍तार के बाद शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं में मंत्रिपद नहीं मिलने से खासी नाराजगी है.

महाराष्‍ट्र की उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के नेतृत्‍व वाली शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी (Shiv Sena-NCP-Congress) गठबंधन सरकार के लिए ये कहावत थोड़ी कठोर, लेकिन एकदम सही है- 'मुट्ठी भर ज्वार और खाने वाले हजार.'

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    धवल कुलकर्णी

    महाराष्‍ट्र की उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के नेतृत्‍व वाली शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी (Shiv Sena-NCP-Congress) गठबंधन सरकार के लिए ये कहावत थोड़ी कठोर तो हो सकती है, लेकिन एकदम सही है - 'मुट्ठी भर ज्वार और खाने वाले हजार.' उद्धव के मुख्‍यमंत्री बनने के एक महीने बाद महाराष्‍ट्र सरकार का मंत्रिमंडल विस्‍तार हुआ. इसके बाद तीनों ही दलों के मंत्री पद नहीं पाने वाले नेताओं में असंतोष बढ़ने लगा. कई नेताओं ने इस्‍तीफे की पेशकश तक कर दी. कई ने सार्वजनिक तौर पर गुस्‍सा जाहिर किया. यही नहीं, मंत्री बनाए गए नेताओं में भी विभागों को लेकर खींचतान रही. इसके चलते एक हफ्ते तक विभाग आवंटन भी नहीं हो सका. हालांकि, सीएम उद्धव ठाकरे ने शपथ के दिन 30 दिसंबर को दावा किया था कि विभागों का बंटवारा एक या दो दिन में कर दिया जाएगा.

    शिवसेना भी अपने नेताओं के असंतोष से अछूती नहीं रही
    मंत्रिमंडल विस्‍तार के बाद फैले असंतोष को काबू करना काफी मुश्किल था. शिवसेना भी इस अंदरूनी असंतोष से अछूती नहीं रही. तीनों ही पार्टियां अपने-अपने नाराज नेताओं की मान-मनौव्‍वल में जुट गईं. शिवसेना विधायक भास्‍कर जाधव (Bhaskar Jadhav) मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से खासे नाराज हो गए थे. जाधव साल 2004 में टिकट नहीं मिलने पर शिवसेना छोड़कर एनसीपी में शामिल हो गए थे. वह विधानसभा चुनाव 2019 (Maharashtra Assembly Election 2019) से कुछ समय पहले ही शिवसेना में लौटे थे. वापसी के समय उनसे कहा गया था कि सरकार बनने पर उन्‍हें मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा.

    राज्‍यसभा सदस्‍य संजय राउत के भाई भी नहीं बने मंत्री
    शिवसेना ने राज्‍यसभा सांसद और पार्टी के वरिष्‍ठ नेता संजय राउत (Sanjay Raut) के छोटे भाई सुनील राउत को भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी. संजय राउत ने बीजेपी से अलग होकर एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर महाराष्‍ट्र में शिवसेना की सरकार बनवाने में अहम भूमिका निभाई थी. सुनील राउत के अलावा देवेंद्र फडणवीस सरकार में पर्यावरण मंत्री रहे रामदास कदम और तानाजी सावंत को भी मंत्री नहीं बनाया गया. शिवसेना विधायक निर्दलीय विधायक ओमप्रकाश कडु, शंकरराव घड़क और राजेंद्र पाटिल को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने से नाराज हैं. वहीं, हाल ही में पार्टी में शामिल हुए अब्‍दुल सत्‍तार (Abdul Sattar) को मंत्री बनाए जाने से भी पार्टी में नाराजगी है.

    शिवसेना नेताओं ने स्‍वीकार किया है कि पार्टी आदित्‍य ठाकरे को आगे बढ़ाना चाहती है.


    किसी ने दी धमकी तो किसी के समर्थकों ने मचाया उत्‍पात
    बीड से विधायक एनसीपी नेता और पूर्व मंत्री प्रकाश सोलंकी मंत्री नहीं बनाए जाने से इतना नाराज हो गए कि उन्‍होंने पार्टी ही छोड़ने की धमकी दे डाली. हालांकि, पार्टी नेताओं के मनाने पर वह मान भी गए. कांग्रेस विधायक संग्राम थोप्‍टे के समर्थकों ने उन्‍हें मंत्री नहीं बनाए जाने के बाद पुणे के कांग्रेस भवन में जमकर तोड़फोड़ की. वहीं, कोल्‍हापुर से कांग्रेस विधायक पीएन पाटिल के समर्थकों ने बड़ी संख्‍या में एकसाथ पार्टी छोड़ने की धमकी दी. उनके समर्थकों ने भी विरोध प्रदर्शन किया. कांग्रेस के मुस्लिम नेता भी अपने समुदाय का एक और मंत्री चाहते थे. इसके बाद मलाड से कांग्रेस विधायक असल शेख को कपड़ा मंत्री बनाया गया.

    गृह मंत्रालय पर आमने-सामने आ गए थे शिवसेना-एनसीपी
    विभागों के बंटवारे को लेकर भी तीनों दलों में बगावती सुर उठे. शिवसेना गृह मंत्रालय अपने पास रखना चाहती थी, ताकि राज्‍य की पुलिस और निगरानी की शक्ति उसके पास रहे. इस विभाग को लेकर एनसीपी ने दावेदारी ठोक दी. एनसीपी ने नागपुर से विधायक अनिल देशमुख को इस पद के लिए आगे कर दिया. बीजेपी नेताओं का कहना है कि हम इसी आपसी खींचतान का इंतजार कर रहे थे. बीजेपी का कहना है कि विचारधारा के आधार पर अलग तीन दलों ने सत्‍ता पर काबिज रहने के लिए गठबंधन किया है. ये सरकार ऐसे ही मतभेदों और आपसी खींचतान के कारण एक दिन गिर जाएगी. बता दें कि शिवसेना और एनसीपी राज्‍य की सियासत में हमेशा एकदूसरे के खिलाफ रही हैं.

    बीजेपी नागरिकता संशोधन कानून, एनआरसी जैसे मुद्दों को उछालकर शिवसेना को उलझन में डालती रहेगी.


    कई मुद्दों पर शिवसेना को मुश्किल में डालती रहेगी बीजेपी
    बीजेपी सूत्रों का दावा है कि तीनों पार्टियों को कर्नाटक के 'ऑपरेशन कमल' की तर्ज पर लुभाया जा सकता है. इस पर पलटवार करते हुए शिवसेना के एक मंत्री ने कहा कि अगर गठबंधन की सरकार छह महीने तक चल गई तो बीजेपी के कई नेता सत्‍ता में रहने के लिए पार्टी बदल सकते हैं. बीजेपी नागरिकता संशोधन कानून (CAA 2019), एनआरसी (NRC), वीडी सावरकर को भारत रत्‍न और हिंदुत्‍व के खिलाफ कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के बयानों को मुद्दा बनाकर शिवसेना को उलझन में डालती रहेगी. इस बीच, कांग्रेस के एक मंत्री ने दावा किया कि तीनों पार्टियों में चल रही उठापटक जल्‍द ही शांत हो जाएगी.

    शिवसेना नेताओं ने माना-आदित्‍य को आगे बढ़ाना चाहती है पार्टी
    शिवसेना नेताओं ने स्‍वीकार किया है कि पार्टी आदित्‍य ठाकरे को आगे बढ़ाना चाहती है. इसीलिए उन्‍हें मंत्रिमंडल में शामिल किया गया. वह ठाकरे परिवार की ओर से पहले व्‍यक्ति हैं, जो चुनाव मैदान में उतरे और जीते. साथ ही माना कि इससे पार्टी के कुछ पुराने वफादार युवा नेताओं के लिए किनारे हो जाएंगे. गठबंधन के तीनों दलों के शीर्ष नेतृत्‍व के अपने नेताओं की नाराजगी को दूर करने के बीच ये सवाल अपनी जगह खड़ा है कि क्‍या उद्धव ठाकरे आपसी खींचतान को काबू में रख पाएंगे? नए राजनीतिक समीकरणों से उबरकर क्‍या उद्धव ठाकरे महाराष्‍ट्र को सुशासन दे पाएंगे? इस सब का जवाब आने वाला समय ही दे सकता है.
    (लेखक पत्रकार और 'द कजिंस ठाकरे: उद्धव, राज एंड ए शैडो ऑफ देयर सेनाज' के लेखक हैं. लेख उनके निजी विचार हैं.)

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