लॉकडाउन में अस्पताल में डिलिवरी कराने वाली महिलाओं की संख्या 26% घटी: सरकारी रिपोर्ट

लॉकडाउन में अस्पताल में डिलिवरी कराने वाली महिलाओं की संख्या 26% घटी: सरकारी रिपोर्ट
रिपोर्ट में सामने आया है कि लॉकडाउन के दौरान महिलाओं के अस्पताल में प्रसव कराने में 26% की कमी आई है

रिपोर्ट से पता चला कि लॉकडाउन (Lockdown) के पहले 10 हफ्तों के दौरान आवश्यक सेवाओं तक पहुंच एक बड़ी समस्या थी. इन दस हफ्तों के दौरान आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat scheme) का औसतन एक सप्ताह में लाभ उठाने वाले, लॉकडाउन से पहले बारह हफ्तों के दौरान देखे गए साप्ताहिक औसत से 51% कम थे.

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(स्नेहा मोर्दानी)

नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) के प्रसार को रोकने के लिए मार्च में लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन (Nationwide lockdown) के परिणामस्वरूप भारत में मरीजों को अस्पतालों (Hospitals) में भर्ती कराने में बड़े पैमाने पर गिरावट आई है. जिसका सबसे बुरा प्रभाव कैंसर (Cancer) का इलाज करा रहे मरीजों और संस्थागत प्रसव कराने वाली महिलाओं पर हुआ है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (National Health Authority) के एक विश्लेषण में पाया गया कि कैंसर से जुड़ी सेवाओं में 64% की गिरावट देखी गई है, जबकि संस्थागत बाल प्रसव में 26% की गिरावट आई है. PM-JAY अंडर लॉकडाउन: एविडेंस ऑन यूटिलाइजेशन ट्रेंड्स (PM-JAY Under Lockdown: Evidence on Utilization Trends) नाम के सर्वे को 1 जनवरी से 2 जून तक के लिए किया गया था और इसमें लॉकडाउन अवधि का एक बड़ा हिस्सा शामिल था.

News18 ने जब इस रिपोर्ट को देखा तो उससे पता चला कि लॉकडाउन (Lockdown) के पहले 10 हफ्तों के दौरान आवश्यक सेवाओं तक पहुंच एक बड़ी समस्या थी. इन दस हफ्तों के दौरान आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat scheme) का औसतन एक सप्ताह में लाभ उठाने वाले, लॉकडाउन से पहले बारह हफ्तों के दौरान देखे गए साप्ताहिक औसत से 51% कम थे. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लाभ उठाने वालों के दावों के मूल्य में गिरावट और ज्यादा गिरावट देखी गई थी.



सबसे बड़ी गिरावट असम, महाराष्ट्र और बिहार में देखी गई
इसमें कहा गया है, “असम, महाराष्ट्र और बिहार में सबसे अधिक गिरावट (75% से अधिक) के साथ राज्यों में PM-JAY के अंतर्गत दावों में इलाकों के हिसाब से बहुत ज्यादा भिन्नता देखी गई थी. जबकि उत्तराखंड, पंजाब और केरल में बहुत कम गिरावट (लगभग 25% या उससे कम) देखी गई थी."

अलग-अलग जनसंख्या समूहों के बीच, महिलाओं, छोटी उम्र और बड़ी उम्र की आबादी (20 से कम और 60 से अधिक) ने पुरुषों, युवाओं या अधेड़ आयु वर्ग के लोगों ने अपने PM-JAY के अंतर्गत इलाज के उपयोग को कम कर दिया.

"लॉकडाउन में स्वास्थ्य सेवाओं की अनुपलब्धता बाद के लिए लायेगी बुरा असर"
News18 से बात करते हुए, विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने स्वीकार किया कि इन सेवाओं की उपलब्धता को जो झटका लगा, वह बाद के लिए एक बुरा प्रभाव लेकर आयेगा.

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स्वामीनाथन ने कहा, “कोविड-19 के कारण मरने वाले लोगों के अलावा, हम हृदय रोगों, आघात, टीबी जैसी अन्य बीमारियों के कारण लोगों को मरते हुए नहीं देखना चाहते हैं. जबकि इन लोगों को वे सेवाएं तब नहीं मिली, जब उन्हें इनकी आवश्यकता थी. इसके लिए कुछ रणनीतिक योजना और निवेश की जरूरत पड़ने वाली है."
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