कोलकाता के लाल ने ढूंढ़ा ऐसा बैक्टीरिया, ट्यूमर-कैंसर तक का हो सकता है इलाज

ब्रेस्ट कैंसर, स्किन कैंसर भी बैक्टीरिया के कारण होते हैं. लेकिन इलाज भी एक खास किस्म के बैक्टीरिया से संभव है.

News18Hindi
Updated: July 5, 2019, 3:38 PM IST
कोलकाता के लाल ने ढूंढ़ा ऐसा बैक्टीरिया, ट्यूमर-कैंसर तक का हो सकता है इलाज
कोलकाता के लड़के ने किया कमाल.
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Updated: July 5, 2019, 3:38 PM IST
कोलकाता के एक रिसर्च स्कॉलर ने ट्यूमर से निपटने वाला बैक्टीरिया ढूढ़ निकाला है. यह शरीर में जाकर इसके इंसानों के रोग प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है. साथ ही कैंसर समेत बड़े ट्यूमर से निपटने में सहायक होता है. इस पीएचडी स्कॉलर का नाम श्रेयान चौधरी है. वे न्यूयॉर्क के कोलंब‌िया विश्वविद्यालय से शोध कर रहे हैं. इन्होंने ई-कोली नाम की बैक्टीरिया ढूंढ़ी है, जिसे एंटी-ट्यूमर कहा जा रहा है.

हालांकि अभी उनके लैब ने इसे बस प्रयोगों तक ही सीमित रखा है. बता रहे हैं कि इसमें कुछ तरह कैंसर के इलाज की क्षमता है. हालांकि इसके इस्तेमाल से एक लीम्फोमा नाम की बीमारी को दूर किया जा चुका है. इसके बारे में हाल ही में कोलंबिया यूनिवर्सिटी के रिसर्च जनरल नेचर मेडिसीन में छपा है.

इसके बारे में श्रेयान चौधरी कहते हैं, 'ज्यादातर ट्यूमर के फैलने का कारण शरीर की कोशिकाओं में एक खास तरह का प्रोटीन है. इसका नाम CD47 होता है. किसी शख्स में ट्यूमर की समस्या शुरू होते ही, हमारी इम्यून सिस्टम शरीर को कुछ ‌सिग्नल भेजता है, वह इस खास तरह के प्रोटीन को खाने से मना करता है. लेकिन आम लोग इसे समझ नहीं पाते हैं. हम इसी प्रोटीन के इर्द-गिर्द काम रहे हैं. अभी ज्यादा प्रभावी काम सामने आया आएगा.'

श्रेयान चौधरी, शोध छात्र


श्रेयान चौधरी का जन्म कोलकाता में हुआ था. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई सेंट जेम्स स्कूल से की है. लेकिन उन्होंने अपना ग्रेजुएशन अमेरिका से किया है. इसके बाद उन्होंने अमेरिका की बायोलॉजिकल इंजीनियरिंग के असिस्टेंट प्राफेसर टाल डानिनो और कोलंबिया विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर निकोलस ऑर्फिया की देखरेख में पीएचडी शुरू किया.

उनका विषय लीफोमा के इलाज और बै‌क्टीरिया पर शोध था. आमतौर पर ब्रेस्ट कैंसर, स्किन कैंसर भी बैक्टीरिया के कारण होते हैं. इतना ही नहीं आमतौर पर इलाज के बाद कैंसर के बैक्टरिया किसी भी इंसान में 80 तक जिंदा होते हैं और दोबारा हमले की कोशिश करते हैं.

लेकिन अगर ट्यूमर का सही इलाज हो रहा है तो प्लैक्बो बैक्टीरिया जैसे खतरनाक वायरस भी 30 दिन के भीतर दम तोड़ देते हैं. कोलंबिया यूनिवर्सिटी से जुड़े कई वैज्ञानिक इन बैक्टीरिया के ऊपर लगातार काम कर रहे हैं.

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First published: July 5, 2019, 3:38 PM IST
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