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  • CAPTAIN REMAINS IN CHARGE SIDHU GETS IMPORTANT RESPONSIBILITY CONGRESS PANEL SUBMITTED REPORT TO SONIA GANDHI

कैप्टन रहें प्रभारी, सिद्धू को मिले अहम जिम्मेदारी; कांग्रेस पैनल ने सोनिया गांधी को सौंपी रिपोर्ट

पंजाब में कांग्रेस के लिए परेशानी का कारण बन रहा अमरिंदर सिंह और सिद्धू के बीच का झगड़ा. (फाइल फोटो)

Punjab Congress Dispute: केवल तीन राज्य हैं, जहां कांग्रेस बगैर गठबंधन के सरकार में है. इनमें से दो में आंतरिक विवाद जारी है. ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह दुश्मनी अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकती है.

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    नई दिल्ली/चंडीगढ़. पंजाब कांग्रेस में जारी सियासी तनातनी के बीच पार्टी पैनल ने अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) को रिपोर्ट सौंप दी है. खबर है कि इसमें मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Captain Amarinder Singh) की लीडरशिप को बनाए रखने और पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) को अहम भूमिका दिए जाने की सिफारिश की गई है. इस बात की जानकारी मामले के जानकारों ने गुरुवार को दी है. दोनों बड़े नेताओं के बीच लंबे समय से जुबानी जंग जारी है.

    हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में पैनल के एक सदस्य के हवाले बताया गया है कि कमेटी ने पांच बड़ी सिफारिशें की हैं. इनमें सिंह को प्रभारी बनाए रखने, सिद्धू को पार्टी में बड़ा पद या शीर्ष मंत्री बनाया जाए, पार्टी संगठन में सुधार, हाशिये पर पहुंची जातियों के साथ संपर्क और दलितों को अहम पद देने और बोर्ड्स और कॉर्पोरेशन में पार्टी नेताओं की नियुक्ति की बात शामिल है.

    यह भी पढ़ें: पंजाब कांग्रेस कमेटी ने 4 पन्नों की रिपोर्ट सोनिया को सौंपी, कहा- CM अमरिंदर के काम के स्‍टाइल से कई MLA नाराज

    पैनल सदस्य ने बताया कि पंजाब के 80 विधायकों से मिले फीडबैक के बाद सिद्धू को जगह देने की सिफारिश की गई है. उन्होंने कहा, 'सभी यह कह रहे थे कि केवल मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ही नहीं, दोनों नेताओं का होना बहुत जरूरी है.' कुछ विधायकों ने सिद्धू को दो में से एक डिप्टी सीएम बनाने की बात भी कही है. हालांकि, सीएम सिंह ने इस बात का विरोध किया था. मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा था कि सिंह, सिद्धू को मंत्री बनाए जाने के पक्ष में थे, लेकिन सिद्धू को बड़ी भूमिका चाहिए थी.

    रिपोर्ट के मुताबिक, जानकारों ने बताया कि सिद्धू को प्रचार समिति का प्रभारी बनाया जा सकता है, लेकिन वे पार्टी की यूनिट में दिलचस्पी दिखा रहे हैं. फिलहाल यह पद सुनील जाखड़ संभाल रहे हैं. सिंह ने इस बात का भी विरोध किया था. पैनल के एक दूसरे सदस्य ने जानकारी दी कि सिद्धू, जलंधर कैंट विधायक परगटसिंह और अमरगढ़ विधायक सुरजीत सिंह धीमान समेत कई विधायकों और नेताओं ने सीएम के काम करने के तरीके की शिकायत की है. इनमें पहुंच की कमी, सीमित नौकरशाहों पर निर्भरता जैसी बातें शामिल हैं. इन्होंने नेतृत्व में बदलाव की भी मांग की है.

    केवल तीन राज्य हैं, जहां कांग्रेस बगैर गठबंधन के सरकार में है. राजस्थान में भी आंतरिक कलह जारी है. ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये विवाद अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि पंजाब सरकार को बचे हुए महीनों में जमकर काम करना होगा. साथ ही यह चेतावनी भी दी गई है कि अकाली दल और बीजेपी को हल्के में ना लिया जाए. पैनल में राज्यसभा सदस्य मल्लिकार्जुन खड़गे, पंजाब के पार्टी प्रभारी हरीष रावत और पूर्व दिल्ली सांसद जय प्रकाश अग्रवाल शामिल हैं.