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गणतंत्र दिवस स्पेशल: ‘विजयंत टैंक’ जैसे बुलंद हौसले वाले थे कैप्टन विजयंत थापर, जिनकी बहादुरी के किस्से हमेशा याद रहेंगे

फोटो- वीर चक्र विजेता कैप्टन विजयंत थापर.

फोटो- वीर चक्र विजेता कैप्टन विजयंत थापर.

वीर चक्र विजेता और तोलोलिंग चोटी के नायक विजयंत ने लड़ाई के दौरान कई पाकिस्तानी घुसपैठियों को मार गिराया था और एक के बाद एक कई चोटियों पर फतेह हासिल की थी.

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आज का दिन हर देशवासी और देश के लिए बहुत ही खास है. ये वो दिन है जब हम अपनी आज़ादी का जश्न मना रहे हैं. लेकिन हमे ये दिन मिला है उन रणबांकुरों के बलिदान से जिन्होंने अंग्रेजों से लड़ते हुए अपनी जान गंवा दी और शहीद हो गए. वहीं आज कुछ वीर सपूत ऐसे भी हैं जो अपनी जान की कीमत पर हमारी इस आज़ादी को सुराक्षित रखे हुए हैं. ऐसे ही एक वीर कैप्टन विजयंत थापर की बहादुरी के किस्से हम आपको यहां बता रहे हैं.

करगिल की लड़ाई के दौरान शहीद हुए कैप्टन विजयंत थापर का आज जन्मदिन है. 26 दिसंबर 1976 को जन्मे विजयंत का बुलंद हौसला ही था कि हिन्दी फिल्मों के गाने गुनगुनाते हुए उनकी टीम ने तोलोलिंग चोटी को फतेह किया था. वीर चक्र विजेता और तोलोलिंग चोटी के नायक विजयंत ने लड़ाई के दौरान कई पाकिस्तानी घुसपैठियों को मार गिराया था और एक के बाद एक कई चोटियों पर फतेह हासिल की थी.

कैप्टन विजयंत थापर से जुड़े कुछ ऐसे ही किस्सों को न्यूज18 हिन्दी के साथ साझा कर रहे हैं उनके पिता कर्नल रिटायर्ड वीएन थापर और उनकी मां तृप्ता थापर.

तोलोलिंग जीतने पर विजयंत ने मां को किया था आखिरी फोन
‘तोलोलिंग पर 12 जून 1999 को फतेह करने के बाद शहीद कैप्टन विजयंत थापर ने मुझे (तृप्ति थापर) फोन किया था. उसने बताया था कि हमारी बटालियन ने तोलोलिंग पर जीत हासिल कर ली है. अब पंद्रह हजार फीट ऊंची और माइनस 15 डिग्री तापमान में नॉल (तोलोलिंग और टाइगर हिल के बीच की पहाड़ी) पर विजय हासिल करने जाना है. उसने कहा था कि मम्मी अब हमारी बीस दिन तक बात नहीं हो पाएगी, मम्मी आप इंतजार मत करना. लेकिन बीस दिन से पहले ही बेटे का पार्थिव शरीर आ गया. मेरा बेटे के लिए इंतजार सिर्फ इंतजार बनकर ही रह गया.'



पास में जाकर बनाया दुश्मनों को निशाना और शहीद हो गए
तोलोलिंग जीतने के बाद, विजयंत को ब्लैक रॉक कॉम्प्लेक्स में थ्री पिमपल्स और नॉल को कैप्चर करने का टास्क मिला. तोलोलिंग और टाइगर हिल के बीच की ये बेहद ही खतरनाक और सबसे मुश्किल चोटियां थीं. इस दौरान कैप्टन विजयंत के कई जवान शहीद हो गए. टुकड़ी थोड़ी बिखर गई थी. लेकिन विजयंत ने फिर से सबको इकट्ठा किया और फिर नॉल की चोटी का एक छोटा हिस्सा भी अपने कब्ज़े में ले लिया. लेकिन उस वक़्त तक कंपनी के कमांडर मेजर पी आचार्य शहीद हो चुके थे. सिर्फ 15 मीटर की दूरी से दुश्मन दो मशीन गन से एक साथ इन पर गोलियां बरसा रहे थे.

फोटो- वीर चक्र विजेता कैप्टन विजयंत थापर.


लगभग डेढ़ घंटे से ज्यादा समय तक ये सब कुछ चलता रहा. कैप्टन थापर बिना जान की परवाह किए दुश्मनों को निशाना बनाते हुए नॉल चोटी पर विजय प्राप्त करते हुए शहीद हो गए.

कैप्टन विजयंत थापर के पिता वीएन थापर और मां तृप्ति थापर.


- कैप्टन विजयंत ने साढ़े पांच साल की उम्र में पहली बार गोली चलाई थी.

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- विजयंत के परदादा, दादा और पिता सहित परिवार के कई लोग आर्मी में थे.

- विजयंत किसी भी सूरत में प्राइवेट नौकरी नहीं करना चाहते थे.

- विजयंत का नाम विजयंत टैंक के नाम पर पड़ा था.

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कुपवाड़ा में तैनाती के दौरान कैप्टन विजयंत  का एक किसान की चार साल की बेटी से बहुत लगाव हो गया था. जब भी समय मिलता तो वे उसके साथ खूब खेला करते थे. आज भी विजयंत के पिता हर वर्ष उस बच्ची की मदद करते हैं. रुखसाना अब 22 साल की हो चुकी है.’

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