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सचिन पायलट को हटाने से हुए नुकसान की भरपाई के लिए कांग्रेस ने जातियों को साधा

सचिन पायलट को हटाने से हुए नुकसान की भरपाई के लिए कांग्रेस ने जातियों को साधा

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की फाइल फोटो

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की फाइल फोटो

राजस्थान (Rajasthan) में कांग्रेस ने खुद को सचिन पायलट (Sachin Pilot) के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त करने के प्रयास के साथ ही जाति के गणित (caste calculations) पर भी ध्यान दिया है.

    (सुहास मुंशी)

    राज्य का इकाई का कांग्रेस (Congress) की ओर से नेतृत्व करने वाले सचिन पायलट (Sachin Pilot) और पार्टी के सभी महत्वपूर्ण पदों पर उनके वफादारों को बदलने के बाद बड़े पैमाने पर पुनर्गठन की कवायद में ग्रैंड ओल्ड पार्टी (Grand Old Party) ने सावधानीपूर्वक जातिगत संतुलन बनाने की कोशिश की है. प्रदेश अध्यक्ष, युवा कांग्रेस अध्यक्ष, सेवादल प्रमुख और NSUI अध्यक्ष की पूरी तरह से नई टीम की नियुक्तियों के माध्यम से, पार्टी ने खुद को पायलट के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त करने के प्रयास के साथ ही अपनी जाति की गणित (Caste Calculations) पर भी ध्यान दिया है.

    कांग्रेस (Congress) राज्य इकाई के सभी विभागों को भंग करने का फैसला करने से कुछ समय पहले ही नियुक्तियां की गई थीं. नए कांग्रेस पीसीसी प्रमुख (PCC Chief) गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasara) की नियुक्ति को देखकर शुरुआत की जा सकती है. राजस्थान में यह पहली बार है कि कांग्रेस और भाजपा (BJP) दोनों के प्रमुख जाट हैं.

    बीजेपी का पहला जाट अध्यक्ष, जबकि कांग्रेस का छठवां
    लंबे समय तक संघ से जुड़े रहे जाट नेता, सतीश पूनिया, जो आमेर विधानसभा सीट से जीते थे, राज्य में भाजपा का नेतृत्व करते हैं. हालांकि पूनिया के विपरीत, जो राज्य इकाई में बीजेपी के पहले जाट प्रमुख हैं, डोटासरा कांग्रेस पार्टी के छठे जाट राज्य प्रमुख हैं.

    नाथूराम मिर्धा ने दो बार पीसीसी का नेतृत्व किया था. राज्य में जाटों के प्रभाव को देखें तो- 25 में से सात सांसद जाट हैं और 200 में से 30 विधायक इसी समुदाय से आते हैं. पार्टी ने भी तीन जाटों को मंत्रिमंडल में रखा था, जिसमें विश्वेंद्र सिंह भी शामिल थे, जिन्हें अब मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया गया है. सिंह के अलावा, पार्टी ने दो अन्य पायलट वफादारों को बर्खास्त कर दिया गया है. जो युवा कांग्रेस के राज्य प्रमुख मुकेश भाकर और राज्य एनएसयूआई प्रमुख अभिमन्यु पूनिया हैं.

    आदिवासी युवाओं को लुभाने की कांग्रेस सरकार की कोशिश
    इसलिए डोटासरा को पीसीसी प्रमुख नियुक्त कर कांग्रेस ने खाली जगह भरने और समुदाय को एक शक्तिशाली संदेश भेजने की कोशिश की है. एक अन्य महत्वपूर्ण नियुक्ति गणेश गोहरा की है, जो कि भील जनजाति का एक युवा चेहरा हैं, जिन्हें पार्टी ने अब अपने राज्य के युवा कांग्रेस के प्रमुख के रूप में नियुक्त किया है.

    गोहरा की नियुक्ति कई संकेत देती है, जो सबसे महत्वपूर्ण रूप से आदिवासी समुदाय के लिए है. गोहरा एक आदिवासी हैं और डूंगरपुर निर्वाचन क्षेत्र से चुने गये थे जो दक्षिण राजस्थान के आदिवासी इलाके में स्थित है. जहां छोटूभाई वसावा द्वारा स्थापित भारतीय ट्राइबल पार्टी पार्टी लगातार जमीन हासिल कर रही है. विधानसभा चुनाव से ठीक पहले स्थापित पार्टी ने इस बेल्ट से दो सीटें जीतीं थीं.

    आरएसएस से इस इलाके में कांग्रेस को खतरा
    इस क्षेत्र में कांग्रेस के लिए दूसरा खतरा, जो एक समय में हावी हुआ करता था, आरएसएस (RSS) है जो लगातार छात्रों के बीच काम कर रहा है. 27,000 से अधिक मतों से अपने प्रतिद्वंद्वी को हराने वाले गोहरा की नियुक्ति से कांग्रेस ने उन आदिवासी युवाओं को लुभाने की कोशिश की है, जिन्होंने दोनों राष्ट्रीय दलों के प्रति असहमति दिखाई है और आदिवासी बहुल क्षेत्र में बीटीपी और आरएसएस के प्रभाव को पैदा किया है.

    हेम सिंह शेखावत, जिन्हें पार्टी के सेवा दल के प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया है, एक राजपूत हैं जो एक कृषक परिवार से आते हैं. मुख्यमंत्री स्वयं एक ओबीसी हैं.

    सभी की नज़रें गुरुवार शाम को प्रस्तावित मंत्रिमंडल विस्तार पर
    अभी के लिए, सभी की नजरें गुरुवार की शाम 4:30 बजे प्रस्तावित मंत्रिमंडल विस्तार पर होंगी ताकि जाति गणित का संतुलन देखा जा सके. राजनीतिक पर्यवेक्षक, गुर्जर समुदाय से कई नेताओं को मंत्रिमंडल में समायोजित किए जाने की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि पायलट के शून्य को भरा जा सके.

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    साथ ही सभी राज्य पार्टी प्रकोष्ठों और इकाइयों के विघटन के साथ, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समक्ष नए चेहरों की नियुक्ति करके क्षेत्र और जाति संबंधी विचारों को और अधिक परिष्कृत करने का अवसर मौजूद होगा.

    Tags: Ashok gehlot, BJP, Congress, Jat reservation, Pilot, Rajasthan news

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