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नाना पटोले बोले- होनी चाहिए जाति आधारित जनगणना, बीजेपी पर लगाया धर्म की राजनीति करने का आरोप

नाना पटोले ने देश में जाति आधारित जनगणना नहीं कराने का आरोप बीजेपी पर लगाया है (फोटो आभार- ANI)

नाना पटोले ने देश में जाति आधारित जनगणना नहीं कराने का आरोप बीजेपी पर लगाया है (फोटो आभार- ANI)

कांग्रेस नेता नाना पटोले ने जाति आधारित जनगणना पर पार्टी का स्टैंड साफ करते हुए कहा कि कांग्रेस की हमेशा से मांग रही है ...अधिक पढ़ें

नागपुर. देश में जाति आधारित जनगणना के मुद्दे पर महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा है. पटोले ने नागपुर में कहा कि भाजपा देश में जाति आधारित जनगणना इसलिए नहीं करना चाहती है क्योंकि वह धर्म के आधार पर राजनीति करती है. साथ ही उन्होंने इस मुद्दे पर कांग्रेस का स्टैंड स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी पार्टी का हमेशा से कहती रही है कि देश में जाति आधारित जनगणना जरूर होनी चाहिए. पटोले का मानना है कि इससे देश के कई मुद्दों को हल करने में मदद मिलेगी.

इससे पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में जाति आधारित जनगणना कराने की घोषणा की थी. बिहार में जनगणना के साथ ही आर्थिक सर्वेक्षण भी कराया जाएगा. 2 जून को सीएम नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई थी. बिहार सरकार यह काम अपने संसाधनों के बल पर करेगी. फरवरी 2023 तक इस गणना के आधार पर मसौदा तैयार किया जाएगा.

नीतीश कुमार ने कहा कि इसमें करीब एक महीने का वक्त लगेगा. संबंधित विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. जल्दी ही काम शुरू हो जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि इस बारे में दूसरे दलों को सूचित करते रहेंगे और उनसे सुझाव लेते रहेंगे. बिहार के सीएम ने जोर देकर कहा कि यह सभी समुदायों के हित में है.

नीतीश कुमार का तर्क
जातीय गणना के पीछे कई तर्क दिए जा रहे हैं. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की माने तो समाज कल्याण और विकास की योजनाओं का वास्तविक लाभ वंचित वर्ग तक पहुंचाने के मकसद से जातीय गणना करना जरूरी है. साथ ही योजनाओं की दशा और दिशा नए सिरे से तय करने के लिए भी जातीय जनगणना करवानी जरूरी है. जातीय गणना के आंकड़े नीतियों और कार्यक्रमों की दशा और दिशा बदलने के बड़े आधार बनेंगे. दावा किया जा रहा है कि जातीय जनगणना की उपलब्धि कई मिथकों को भी तोड़ेगी.

कर्नाटक में इस नाम से हुई थी जातीय जनगणना
जातीय जनगणना को लेकर कर्नाटक मॉडल का जिक्र होता रहा है. कर्नाटक में सिद्धारमैया सरकार ने 2014 में जातीय जनगणना शुरू की थी. इसका विरोध हुआ तो नाम बदलकर सामाजिक एवं आर्थिक सर्वे किया गया था. वर्ष 2017 में रिपोर्ट आई, लेकिन यह आज तक सार्वजनिक नहीं हुई. इसकी वजह मानी जा रही है कि इसमें 195 से अधिक नई जातियां सामने आ गईं.

1931 की जातीय जनगणना पर बनती हैं योजनाएं
बता दें कि देश में सबसे पहले जातीय जनगणना 1931 में कराई गई थी. 1944 में भी डाटा एकत्र किया गया था, लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया गया. वर्ष 2011 में जातीय और सामाजिक, आर्थिक गणना की गई थी; मगर इसमें कई तरह की विसंगतियां सामने आ गई थीं, जिसके चलते आंकड़े जारी ही नहीं किये गए.

Tags: Caste Based Census, CM Nitish Kumar, Maharashtra, Nana Patole

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