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फेनी तूफान की मार से नहीं उबर पा रहे किसान, 50 फीसदी उत्पादन कम होने का बताया दर्द

News18Hindi
Updated: September 20, 2019, 6:12 PM IST
फेनी तूफान की मार से नहीं उबर पा रहे किसान, 50 फीसदी उत्पादन कम होने का बताया दर्द
गंगाधर विश्वाल (परिवार के सथ ) जो एक समय सबसे ज्यादा नारियल बेंचते थे आज वह एक मजदूर बनकर रह गए हैं.

105 साल में ओडिशा को 93वें बार आपदाग्रस्त राज्य घोषित किया गया, 50 बार बाढ़, 32 बार सूखे और 11 बार तूफान ने मचाई तबाही.

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  • Last Updated: September 20, 2019, 6:12 PM IST
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भुवनेश्वर. ओडिशा (Odisha) को सबसे ज्यादा नारियल बेचने वाले राज्य का खिताब मिलने के पांच महीने बाद ही वहां के किसान नाखुश नजर आ रहे हैं. एक 48 साल के किसान गंगाधर विश्वाल ने बताया समय उनकी दुकान में भीड़ हुआ करती थी, लेकिन ओडिशा में फेनी तूफान (Storm) आने के बाद से उनकी जिंदगी में काफी बदलाव आया है और उनके सामने आर्थिक संकट (Economic Crisis) खड़ा हो गया है. गंगाधर का आरोप है कि किसानों की सहायता के लिए मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कोई मदद नहीं की.

विश्वाल ने कहा कि नवीन पटनायक (Naveen Patnaik)देश के तीसरे मुख्यमंत्री हैं , जिसने पांच बार विधानसभा चुनाव जीता है. विश्वाल ने बताया कि एक बार चुनाव प्रचार के दौरान पटनायक ने सड़क किनारे रेहिड़यों से नारियल खरीदा था, जो सभी अखबारों में पहले पन्ने की खबर बनी थी. इसके बाद नारियल की बिक्री ने आसमान छू लिया था.

200 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से चलीं. हवाएं
विश्वाल कहते हैं कि फेनी तूफान ने सब कुछ तबाह कर दिया है. तीन जुलाई 2019 को ओडिशा में 1999 के बाद से सबसे भयानक तूफान फेनी तूफान आया था, जिसमें 200 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं थीं. इससे पेंड-पौधे उखड़ गए और मकानों को भी भारी क्षति पहुंची थी. फेनी तूफान से देश भर में 72 और ओडिशा में 64 लोगों की मौत हो गई. साल 1999 में आए फेनी तूफान से देशभ में 10 हजार लोगों की मौत हो ई थी.

मई में आए फेनी तूफान के बाद तबाही का दृश्य.


क्या कहते हैं तबाही के आंकड़े
ओडिशा के उद्यान विभाग के डिप्टी डायरेक्टर नबा किशोर टाड ने बताया कि इस साल आए तूफान में करीब 5 फीसदी नारियल का उत्पादन प्रभावित हुआ है. करीब 14 लाख नारियल के पेड़ नष्ट हुए हैं. अकेले पुरी में 11.59 लाख नारियल के पेड़ के नष्ट हुए हैं. खुर्दा जिले में 1.96 लाख पेड़ उखड़ गए हैं. वहीं जाजपुर जिले में 14,910 पेड़ गिर गए हैं. बता दें कि ओडिशा में नारियल की खेती अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है. मुख्यमंत्री नवीन पटनायक इस बारे में 6 अगस्त को बोल चुके हैं कि फेनी तूफान के कारण राज्य को 24,176 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.
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दिल्ली विश्वविद्यालय में भूलोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर प्रीति तिवारी ने कहा कि ओडिशा में जलवायु परिवर्तन से समुद्री सतह का तापमान बढ़ रहा है, जिसके चलते वहां हालात खराब होते जा रहे हैं, फिलहाल जिसके सुधरने के आसार समझ नहीं आ रहे.

ओडिशा के दर्द को ऐस समझें
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार 105 साल में ओडिशा को 93वे बार आपदाग्रस्त राज्य घोषित जा चुका है. 50 बार बाढ़, 32 बार सूखे और 11 बार तूफान ने तबाही मचाई है. 1970 से 79 तक दो बार और 1990 से 99 के बीच दो सात बार गर्म हवाओं ने तबाही मचाई. एक शोध में यह बात सामने आई है कि ओडिशा के अधिकत मानसून के दिनों में मौसम प्रतिकूल रहा है. इसके चलते प्राकृतिक आपदा ज्यादा आती है.

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First published: September 20, 2019, 5:36 PM IST
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