सावधान : केरल में कोविड-19 के 14,539 नए मामले, 124 लोगों की मौत

केरल में कोरोना संक्रमण की चिंताजनक स्थिति है. (प्रतीकात्‍मक फोटो)

केरल में मंगलवार को कोविड-19 के 14,539 नए मामले सामने आए, जिसके बाद कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 30,87,673 हो गई. वहीं, पिछले 24 घंटे में 124 और मरीजों की मौत के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 14,810 हो गई. स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने एक बयान में बताया कि मालापुरम में सबसे ज्यादा 2,115 मामले सामने आए हैं. इसके बाद एर्नाकुलम में 1,624 और कोल्लम में 1,404 मामले सामने आए.

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    तिरुवनंतपुरम . केरल में मंगलवार को कोविड-19 के 14,539 नए मामले सामने आए, जिसके बाद कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 30,87,673 हो गई. वहीं, पिछले 24 घंटे में 124 और मरीजों की मौत के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 14,810 हो गई. स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने एक बयान में बताया कि मालापुरम में सबसे ज्यादा 2,115 मामले सामने आए हैं. इसके बाद एर्नाकुलम में 1,624 और कोल्लम में 1,404 मामले सामने आए.

    बयान के मुताबिक, मंगलवार को 10,331 मरीज संक्रमण मुक्त भी हो गए, जिसके बाद कुल स्वस्थ हुए लोगों की संख्या बढ़कर 29,57,201 हो गई. राज्य में 1,15,174 मरीजों का उपचार चल रहा है. ऐसे में आने वाले त्योहारों के मौसम में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से वायरस के तेजी से फैलने का खतरा फिर बन सकता है. ऐसे में एक्सपर्ट्स भी पाबंदियों में ढील देने के खिलाफ नजर आ रहे हैं.

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    इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने वैश्विक साक्ष्य और महामारियों के इतिहास को देखते हुए सोमवार को कहा था कि तीसरी लहर अटल है और यह नजदीक है. चिकित्सकों की शीर्ष संस्था ने लोगों के ढुलमुल रवैये और सरकार द्वारा ऐसी घटनाओं को अनुमति देने पर चिंता व्यक्त की है जो सुपर-स्प्रेडर्स में बदल सकती हैं.

    हैदराबाद विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति रहे एक वरिष्ठ भौतिकशास्त्री ने भी भारत में कोविड-19 के संक्रमण के प्रसार का विस्तार से विश्लेषण कर कहा कि संभवत: चार जुलाई से ही संक्रमण की तीसरी लहर शुरू हो चुकी है. देश में पिछले 463 दिन में संक्रमण के मामलों और उससे मौतों की संख्या के आंकड़ों का अध्ययन करने का एक विशेष तरीका विकसित करने वाले डॉ विपिन श्रीवास्तव ने सोमवार को कहा कि चार जुलाई की तारीख, इस साल फरवरी के पहले सप्ताह जैसी लगती है जब दूसरी लहर शुरू हुई थी. वैज्ञानिक के विश्लेषण के अनुसार जब भी संक्रमण से रोजाना मृत्यु के मामलों के बढ़ने की प्रवृत्ति से घटने की प्रवृत्ति की ओर बढ़ते हैं या इसके विपरीत बढ़ते हैं तो ‘डेली डैथ लोड’ (डीएलएल) में तेजी से उतार-चढ़ाव होता है.

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