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वायुसेना के स्‍क्‍वाड्रन लीडर की हत्‍या में शामिल आतंकी गिरफ्तार, CBI कोर्ट ने दी जमानत

News18Hindi
Updated: October 18, 2019, 6:03 PM IST
वायुसेना के स्‍क्‍वाड्रन लीडर की हत्‍या में शामिल आतंकी गिरफ्तार, CBI कोर्ट ने दी जमानत
सीबीआई ने मलिक, मीर और चार अन्‍य के खिलाफ 1990 के आतंकी हमला मामले में जम्‍मू की आतंकरोधी अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया है.

सीबीआई (CBI) ने जावेद अहमद मीर उर्फ जावेद नलका को बुधवार को गिरफ्तार कर सीबीआई कोर्ट (CBI Court) में पेश किया. सीबीआई कोर्ट ने बुधवार को ही नलका को जमानत (Bail) पर रिहा कर दिया. 2 जनवरी, 1990 को एक आतंकी हमले (Terror Attack) में स्‍कवाड्रन लीडर (Squadron Leader) रवि खन्‍ना समेत चार वायुसेना (Air Force) कर्मी शहीद हो गए थे.

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  • Last Updated: October 18, 2019, 6:03 PM IST
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जम्‍मू. वायुसेना (IAF) के एक स्‍क्‍वाड्रन लीडर (Squadron Leader) समेत चार जवानों की हत्‍या के मामले में सीबीआई ने प्रतिबंधित संगठन जम्‍मू-कश्‍मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) में रहे आतंकी जावेद नलका को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद उसे सीबीआई कोर्ट में पेश किया गया. सीबीआई कोर्ट (CBI Court) ने उसे तुरंत जमानत (Bail) पर रिहा भी कर दिया. दरअसल, 25 जनवरी 1990 में एक आतंकी हमले (Terror Attack) में स्‍क्‍वाड्रन लीड (Squadron Leader) रवि खन्‍ना और वायुसेना (Air Force) के तीन अन्‍य जवान शहीद हो गए थे. मीर 80 के दशक में जेकेएलएफ में शामिल होने से पहले कश्‍मीर के जलापूर्ति विभाग (Water Works Department) में काम करता था. इसीलिए जावेद अहमद मीर का नाम जावेद नलका (टंकी या टोंटी) पड़ गया.



आतंकी हमले में महिलाओं समेत 40 अन्‍य लोग हुए थे घायल
25 जनवरी 1990 को हुए आतंकी हमले में चारों वायुसेना जवानों के अलावा 40 अन्‍य लोग बुरी तरह से जख्‍मी हुए थे. घायलों में कई महिलाएं भी थीं. इस मामले में जेकेएलएफ मुखिया (JKLF Chief) यासीन मलिक के साथ ही मीर का नाम भी आरोपी के तौर पर दर्ज था. यासीन मलिक (Yasin Malik) इस समय हिरासत में है. इसी मामले में सीबीआई ने मलिक, मीर और चार अन्‍य के खिलाफ जम्‍मू की आतंकरोधी अदालत (Anti-Terror Court) में आरोपपत्र (Chargesheet) दाखिल किया है. जम्‍मू-कश्‍मीर हाईकोर्ट (Jammu-Kashmir High Court) की एकल पीठ ने मीर के खिलाफ दायर मामले पर 1995 में स्‍टे दे दिया.

मलिक ने मामला श्रीनगर स्‍थानांतरित करने की मांग की
यासीन मलिक ने 2008 में एक विशेष अदालत (Specail Court) समक्ष दायर आवेदन में मामले को जम्‍मू से श्रीनगर स्‍थानांतरित करने की मांग की. उसने कहा कि अमरनाथ विवाद (Amarnath Row) के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन (Protest) के कारण उसे खतरा है. दरअसल, मलिक पर आरोप लगाया गया था कि उसने सालाना अमरनाथ यात्रा के दौरान बाहर के लोगों को राज्‍य की जमीन किराये पर दी. इस विरोध प्रदर्शन के चलते जम्‍मू और कश्‍मीर (Jammu and Kashmir) धार्मिक आधार पर दो धड़ों में बंट गया था. बता दें कि यासीन मलिक 1990 के मध्‍य में हथियार छोड़ने से पहले एक आतंकी था.

हाईकोर्ट ने कहा - श्रीनगर में ही चलेगा मलिक पर मुकदमा
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सीबीआई ने यासीन मलिक की मामला श्रीनगर स्‍थानांतरित करने की याचिका का विरोध किया. विशेष अदालत ने 20 अप्रैल 2009 को सीबीआई (CBI) की दलीलों को खारिज कर दिया. आखिर में अप्रैल, 2019 में तय हुआ कि मलिक के खिलाफ जम्‍मू में ही मुकदमा चलाया जाएगा. इससे पहले सीबीआई की ओर से पेश वकील मोनिका कोहली ने जम्‍मू-कश्‍मीर हाईकोर्ट में दलील दी कि जांच एजेंसी ने मलिक के मामले को श्रीनगर स्‍थानांतरित किए जाने का विरोध किया है, जिसे विशेष अदालत ने खारिज कर दिया है. इसके बाद हाईकोर्ट ने मामला श्रीनगर स्‍थानांतरित नहीं करने का फैसला दिया.

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First published: October 18, 2019, 6:01 PM IST
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