सीबीआई प्रकरण : वर्मा ने भ्रष्टाचार के आरोपों का खंडन किया, अस्थाना भी पहुंचे सीवीसी

सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा के खिलाफ आरोपों की सीवीसी जांच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस ए के पटनायक की निगरानी में होगी और यह एक बार का ‘अपवाद’ होगा. वर्मा ने उन्हें छुट्टी पर भेजने के सरकार के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है.

भाषा
Updated: November 9, 2018, 10:17 PM IST
सीबीआई प्रकरण : वर्मा ने भ्रष्टाचार के आरोपों का खंडन किया, अस्थाना भी पहुंचे सीवीसी
फाइल फोटो
भाषा
Updated: November 9, 2018, 10:17 PM IST
सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा केंद्रीय सतर्कता आयुक्त के वी चौधरी की अध्यक्षता वाली समिति के समक्ष शुक्रवार को उपस्थित हुए और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना द्वारा उनके ऊपर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों का लगातार दूसरे दिन खंडन किया. वर्मा के जांच समिति के समक्ष उपस्थित होने के कुछ ही घंटे बाद अस्थाना भी शुक्रवार को भ्रष्टाचार निरोधी संस्था के कार्यालय पहुंचे. हालांकि, उनकी किसी भी वरिष्ठ अधिकारी से मुलाकात नहीं हो सकी.

अधिकारियों ने बताया कि अस्थाना केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के कार्यालय में शाम पौने पांच बजे के करीब पहुंचे और वहां 10 मिनट के लिये रुके. हालांकि, वह किसी वरिष्ठ अधिकारी से नहीं मिल सके क्योंकि उन्होंने मुलाकात का पहले से समय नहीं लिया था.

यह भी पढ़ें:  ANALYSIS: क्‍या कमजोर CBI का फायदा उठाकर 2019 में चुनौती बन पाएगा महागठबंधन

अधिकारियों ने बताया कि समझा जाता है कि सतर्कता आयुक्त टी.एम. भसीन और शरद कुमार की सदस्यता वाली समिति के समक्ष पेश होकर वर्मा ने अस्थाना की ओर से लगाए गए सभी आरोपों को बिंदुवार तरीके से खारिज किया.

अधिकारियों ने बताया कि इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस ए.के.पटनायक भी मौजूद थे, क्योंकि शीर्ष अदालत ने उन्हें इस जांच की निगरानी करने का जिम्मा सौंपा है.

यह भी पढ़ें:  CBI में 'नेगेटिविटी खत्म' कर शांति लाएंगे श्री श्री रविशंकर, प्रशांत भूषण बोले- फिर भी आएंगे सपेरे

उन्होंने बताया कि वर्मा शुक्रवार की सुबह सीवीसी दफ्तर पहुंचे और करीब एक घंटे तक वहां रहे. उन्होंने सीवीसी दफ्तर के बाहर इंतजार कर रहे पत्रकारों से बात नहीं की.
Loading...
सुप्रीम कोर्ट ने 26 अक्टूबर को केंद्रीय सतर्कता आयोग से कहा था कि वह अस्थाना की ओर से वर्मा के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच दो हफ्ते के भीतर पूरी करे. यह समय-सीमा आगामी रविवार को पूरी हो रही है और सुप्रीम कोर्ट सोमवार को इस मामले की सुनवाई करेगा.

वर्मा और अस्थाना को केंद्र सरकार छुट्टी पर भेज चुकी है. अधिकारियों ने बताया कि वर्मा के अलावा अस्थाना ने भी गुरुवार को चौधरी से मुलाकात की थी. अस्थाना ने गुरुवार को सतर्कता आयुक्त शरद कुमार से भी मुलाकात की थी और ऐसा समझा जाता है कि उन्होंने वर्मा के खिलाफ लगाए गए अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेजी सबूत सौंपे थे.

यह भी पढ़ें:  CBI चीफ आलोक वर्मा ने भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज किया, कहा- मैने वहीं किया जो जरूरी था

शुक्रवार को विशेष सीबीआई निदेशक एक बार फिर सीवीसी कार्यालय पहुंचे. एक अधिकारी ने नाम नहीं जाहिर किये जाने की शर्त पर बताया, ‘‘वह केंद्रीय सतर्कता आयुक्त चौधरी या किसी सतर्कता आयुक्त--टी एम भसीन और शरद कुमार से नहीं मिल सके क्योंकि वे आयोग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में शामिल थे.’’

आयोग ने हाल में अहम मामलों की छानबीन कर रहे कुछ सीबीआई अधिकारियों से पूछताछ की थी. इन अधिकारियों का नाम वर्मा के खिलाफ अस्थाना की शिकायत में सामने आया था. अधिकारियों ने बताया कि इंस्पेक्टर से लेकर पुलिस अधीक्षक रैंक तक के सीबीआई अधिकारियों को बुलाया गया और सीवीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के समक्ष उनके बयान दर्ज कराए गए. इनमें वे अधिकारी शामिल थे जो मोइन कुरैशी रिश्वतखोरी मामले, पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद की कथित संलिप्तता वाले आईआरसीटीसी घोटाले और मवेशी तस्करी मामले सहित कई अन्य मामलों से जुड़े थे.

सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा के खिलाफ आरोपों की सीवीसी जांच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस ए के पटनायक की निगरानी में होगी और यह एक बार का ‘अपवाद’ होगा. वर्मा ने उन्हें छुट्टी पर भेजने के सरकार के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है.

यह भी पढ़ें: CBI डायरेक्टर आलोक वर्मा के समर्थन में SC पहुंचे मल्लिकार्जुन खड़गे, कहा- ये मनमानी है

वर्मा और अस्थाना के बीच झगड़ा हाल में अपने चरम पर पहुंच गया जब सीबीआई के विशेष निदेशक और सीबीआई के उपाधीक्षक देवेद्र कुमार समेत अन्य के खिलाफ हाल में प्राथमिकी दर्ज की गई. कुमार कथित रिश्वतखोरी के मामले में सीबीआई की हिरासत में है.

सीबीआई ने अस्थाना के खिलाफ हैदराबाद के व्यवसायी सना सतीश बाबू से दो करोड़ रुपये की कथित तौर पर रिश्वत लेने के लिये 15 अक्टूबर को प्राथमिकी दर्ज की थी. यह रकम दो बिचौलियों मनोज प्रसाद और सोमेश प्रसाद के जरिये दी गई थी ताकि मांस निर्यातक मोइन कुरैशी के खिलाफ जांच को कमजोर किया जा सके. गत 24 अगस्त को अस्थाना ने कैबिनेट सचिव को दी गई अपनी शिकायत में वर्मा पर आरोप लगाया था कि उन्होंने किसी मामले में पूछताछ से राहत दिलाने के लिये सना से रिश्वत के रूप में दो करोड़ रुपये लिये.

यह भी पढ़ें: OPINION: ...तोते के खौफ से निकला महागठबंधन!
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर