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गलत ढंग से निवेश के मामलों में व्यक्तिगत पेशी से छूट की जगन की याचिका खारिज

भाषा
Updated: November 1, 2019, 11:48 PM IST
गलत ढंग से निवेश के मामलों में व्यक्तिगत पेशी से छूट की जगन की याचिका खारिज
आंध्र प्रदेश के सीएम वाईएस जगन मोहन रेड्डी की फाइल फोटो

सीबीआई की विशेष अदालत ने उनकी जमानत मंजूर करते हुए आदेश दिया था कि वह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे और सुनवाई के दौरान अदालत में हाजिर होंगे.

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हैदराबाद. सीबीआई (CBI) की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी (YS Jagan Reddy) की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी कंपनियों में कथित रूप से ‘‘गलत ढंग से फायदा पहुंचाने वाले’’ निवेश से संबंधित मामलों की सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेशी से छूट मांगी थी.

जगन के दिवंगत पिता वाई एस राजशेखर रेड्डी (YS Rajshekhar Reddy) के मुख्यमंत्री रहते हुए 2004 और 2009 के बीच जगन की कंपनियों में विभिन्न कंपनियों द्वारा निवेश किया गया था. आरोप है कि ये निवेश कथित रूप से इन कंपनियों को पहुंचाए गए फायदे के बदले किया गया.

जगन ने इस आधार पर मांगी थी छूट
जगन के वकील अशोक रेड्डी ने ‘पीटीआई भाषा’ से कहा कि वे आदेश की प्रति मिलने के बाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने के बारे में फैसला करेंगे. जगन ने इस आधार पर छूट मांगी थी कि एक मुख्यमंत्री के रूप में विभिन्न कारणों से हमेशा अदालत में पेश होना संभव नहीं है. उनके वकीलों ने अदालत को सूचित किया था कि अदालत में उनकी हर पेशी से राजकोष पर बोझ बढ़ेगा.

सीबीआई ने अभियुक्त की दलील को खारिज करते हुए कहा कि हैदराबाद जाने में बताई गई मुश्किल सप्ताह में उन्हें व्यक्तिगत पेशी से छूट को न्यायोचित ठहराने का उचित आधार नहीं हो सकती.

सीबीआई ने लगाया आरोप
सीबीआई ने याचिका का कड़ा विरोध करते हुए आरोप लगाया कि अदालत में उनके पेश नहीं होने से उन्हें ‘‘राजनीति, धन एवं बाहुबल की ताकत की लौह दीवार के पीछे गवाहों को प्रभावित करने और मनचाहा काम करने की आजादी मिलेगी’’.
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सीबीआई ने कहा कि जगन इस समय उस लाभ के पद पर हैं जहां वह गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं, जिनमें से अधिकतर सरकारी कर्मी हैं. जगन को इस मामले में 15 महीने तक जेल में रहने के बाद सितंबर 2013 में जमानत पर रिहा किया गया था.

सीबीआई की विशेष अदालत ने उनकी जमानत मंजूर करते हुए आदेश दिया था कि वह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे और सुनवाई के दौरान अदालत में हाजिर होंगे.

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First published: November 1, 2019, 11:48 PM IST
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