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PMGAY से जुड़े घोटाले में CBI ने वाधवान बंधुओं के खिलाफ दर्ज किया मामला

CBI फाइल फोटो

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Dheeraj Wadhawan: नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2015 में प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत की थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 24, 2021, 8:31 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) ने बुधवार को प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना और लोन मामले (PM Gramin Awaas Yojana) से जुड़े एक और घोटाले का पर्दाफाश किया है. इस मामले में एजेंसी ने कपिल और धीरज वाधवान (Wadhawan Brothers) के खिलाफ मामला दर्ज किया है. ये दोनों भाई आर्थिक संकट में फंसी दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के प्रमोटर हैं और मनी लॉड्रिंग (Money laundering) के साथ धोखाधड़ी के मामले में जेल में हैं. सीबीआई के मुताबिक कपिल और धीरज वाधवान ने 14 हजार करोड़ का फर्जी होमलोन अकाउंट बनाकर केंद्र सरकार से 1,880 करोड़ की सब्सिडी हासिल की. नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2015 में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना की शुरुआत की थी.

इस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को हाउसिंग लोन दिए जाते हैं, जबकि निम्न और मध्य आय वर्ग वाले लोगों को क्रेडिड लिंक्ड ब्याज सब्सिडी की सुविधा मिलती है. इसी सब्सिडी के लिए डीएचएफएल ने पहले हजारों करोड़ का फर्जी लोन अकाउंट बनाया और फिर इसके एवज में सरकार से सब्सिडी हासिल की. सीबीआई के मुताबिक दिसंबर 2018 में डीएचएफएल ने निवेशकों को बताया कि उसने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत 88,651 खाताधारकों को लोन दिए हैं और सब्सिडी के तौर पर सरकार से 539.4 करोड़ रुपये हासिल किए हैं. इसके अलावा 1,347.8 करोड़ सब्सिडी के बकाया हैं.

हालांकि फोरेंसिक जांच में पता चला कि कपिल और धीरज वाधवान ने 2.6 लाख फर्जी लोन अकाउंट खोले हैं. इनमें से कई सारे लोन अकाउंट प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत खोले गए हैं और वाधवान बंधुओं ने नियमों के तहत इन फर्जी लोक अकाउंट के लिए सरकार से सब्सिडी भी हासिल की है. ये सारा मामला कंपनी के मुंबई स्थित बांद्रा ब्रांच से हुआ है. केंद्रीय एजेंसी के मुताबिक 2007 से 2019 के बीच वाधवान भाइयों द्वारा बनाए गए फर्जी लोन अकाउंट को 14,406 करोड़ की राशि आवंटित की गई. सीबीआई का आरोप है कि इनमें से 11,755.79 करोड़ संदिग्ध फर्म्स को ट्रांसफर किए गए हैं.



जून 2020 में सीबीआई ने वाधवान बंधुओं और यस बैंक के फाउंडर राणा कपूर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. ये मामला डीएचएफएल में निवेश करने के लिए कपूर परिवार को घूस देने का है. ये मामला अप्रैल-जून 2018 का है, जब यस बैंक ने जनता के 3,700 करोड़ रुपये शॉर्ट टर्म डिबेंचर के तौर पर डीएचएफएल में निवेश किए. बदले में वाधवान बंधुओं ने यस कपूर को लोन के रूप में 600 करोड़ दिए. ये रकम यस कपूर की पत्नी और बेटी के नियंत्रण वाली एक कंपनी को दी गई थी.

अप्रैल 2020 में वाधवान बंधुओं की गिरफ्तारी हुई, जबकि यस कपूर की गिरफ्तारी मार्च में हुई थी.
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