रॉल्स रॉयस घोटाला: HAL, ONGC और GAIL के अधिकारियों के खिलाफ CBI ने दर्ज कराई FIR

CBI की FIR में इस घूस के मामले में रॉल्स रॉयल और HAL, ONGC और GAIL के कुछ अज्ञात अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं.

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Updated: July 30, 2019, 7:16 PM IST
रॉल्स रॉयस घोटाला: HAL, ONGC और GAIL के अधिकारियों के खिलाफ CBI ने दर्ज कराई FIR
CBI ने एक भ्रष्टाचार के मामले में रॉल्स रॉयस के खिलाफ FIR दर्ज कराई है (फाइल फोटो)
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Updated: July 30, 2019, 7:16 PM IST
सीबीआई ने रॉल्स रॉयस के खिलाफ एक FIR दर्ज कराई है. यह FIR रॉल्स रॉयस के जरिए HAL, ONGC और GAIL के कुछ अज्ञात अधिकारियों को 75 करोड़ रुपये का घूस देने के एक मामले में दर्ज की गई है. रॉल्स रॉयस ने इन कंपनियों को यह घूस M/s आशमोर प्राइवेट लिमिटेड के जरिए दिया था.

CBI की FIR में इस घूस के मामले में रॉल्स रॉयल और HAL, ONGC और GAIL के कुछ अज्ञात अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं.

रॉल्स रॉयस और HAL के बीच हुई थी यह 1.2 अरब डॉलर की डील
इस मामले में 1.2 अरब डॉलर की यह डील ब्रिटेन की रॉल्स रॉयस और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (HAL) के बीच हुई थी. इस डील में पांच अरब रुपये से भी ज्यादा की रिश्वत दिए जाने का आरोप लगा था. इस डील में ब्रिटिश कंपनी रॉल्स रॉयस होल्डिंग्स और सार्वजनिक क्षेत्र की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लि. (HAL) के बीच हुई तकरीबन 1.2 अरब डॉलर की डील में कथित तौर पर रिश्वत दिए जाने के मामले की जांच के आदेश दिए गये थे. अब इसी मामले में FIR दर्ज हुई है. HAL ने रॉल्स रॉयस से जेट इंजन खरीदने के लिए यह सौदा हुआ था. यह डील 2011 में फाइनल हुई थी.

5 अरब से ज्यादा रुपये की रिश्वत दिए जाने का लगा था आरोप
इस सौदे में 5 अरब रुपये से भी ज्यादा की रिश्वत दिए जाने का आरोप लगाया गया था. इस बीच, सूत्रों ने बताया था कि रक्षा मंत्रालय द्वारा रॉल्स रॉयस को काली सूची में डालने की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद इस कंपनी के साथ हुए अनुबंध पर अमल रोक दिया गया था. यही नहीं, भारत रॉल्स रॉयस के खिलाफ जांच के बारे में ब्रिटेन से सूचनाएं मांगने की बात भी कही थी. भाजपा ने इस सौदे में कथित रिश्वतखोरी को लेकर तत्कालीन कांग्रेस की केंद्र सरकार पर निशाना भी साधा था.

इस डील के दौरान 2007 से 2011 के बीच रिश्वत दिए जाने की जानकारी मिली थी
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इस मामले की जांच के दौरान रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया था कि देश की प्रमुख जांच एजेंसी सीबीआई कथित रिश्वतखोरी वाले इस मामले की पड़ताल कर रही है. भारत सरकार ने कहा था कि वह करीब 10,000 करोड़ रुपये की इस डील में कथित रिश्वतखोरी से जुड़े तथ्यों को जुटाने की कोशिश कर रही है. HAL के सतर्कता प्रकोष्ठ की आंतरिक जांच से पहली नज़र में इन आरोपों की पुष्टि होने की बात भी सामने आई थी. सूत्रों के मुताबिक, HAL के मुख्य सतर्कता अधिकारी की जांच में साल 2007 से वर्ष 2011 के बीच रिश्वत दिए जाने की जानकारी मिली है.

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First published: July 30, 2019, 7:05 PM IST
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