चंदा कोचर के खिलाफ FIR दर्ज करने वाले CBI अफसर का अगले दिन ही ट्रांसफर: रिपोर्ट

सुधांशु धर ने कथित भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के इस मामले में चंदा कोचर के अलावा अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर पर 22 जनवरी को हस्ताक्षर किए थे, जिसके अगले दिन उनका ट्रांसफर कर दिया गया.

News18Hindi
Updated: January 27, 2019, 4:25 PM IST
चंदा कोचर के खिलाफ FIR दर्ज करने वाले CBI अफसर का अगले दिन ही ट्रांसफर: रिपोर्ट
चंदा कोचर की फाइल फोटो
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Updated: January 27, 2019, 4:25 PM IST
आईसीआईसीआई (ICICI) बैंक की तरफ से वीडियोकॉन कंपनी को दिए गए 3,250 करोड़ रुपये के लोन से जुड़े मामले में बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने वाले सीबीआई अफसर सुधांशु धर मिश्रा का तबादला कर दिया गया है. सूत्रों ने बताया कि मिश्रा पर आईसीआईसीआई मामले में छापेमारी की जानकारी लीक करने का शक था. इसके बाद उनके खिलाफ जांच बैठाई गई. जांच के बाद उनकी जगह मोहित गुप्‍ता को जिम्‍मेदारी दी गई.

धर ने कथित भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के इस मामले में चंदा कोचर के अलावा उनके पति दीपक कोचर और वीडियोकॉन ग्रुप के मालिक वीएन धूत और अन्य के खिलाफ एफआईआर पर 22 जनवरी को हस्ताक्षर किए थे, जिसके अगले दिन उनका ट्रांसफर कर दिया गया.

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बैंकिंग सिक्योरिटी एंड फ्रॉड सेल (बीएसएफसी) में एसपी सुधांशु धर को अब रांची में सीबाआई की आर्थिक अपराध शाखा में भेज दिया गया है. उनकी जगह विश्वजीत दास को यह जिम्मेदारी दी गई है. इससे पहले दास कोलकाता में सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा में एसपी थे.


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दरअसल सीबीआई का आरोप है कि चंदा कोचर ने आपराधिक साजिश के तहत एक प्राइवेट कंपनी का लोन मंजूर किया, जबकि अन्य आरोपियों पर आईसीआईसीआई बैंक से धोखाधड़ी करने का आरोप है. इस मामले में CBI ने गुरुवार सुबह वीडियोकॉन, न्यूपॉवर के ऑफिसेज़ में छापेमारी भी की है. छापेमारी मुंबई और औरंगाबाद समेत 4 जगहों पर हुई है.

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चंदा कोचर मामले में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कुछ दिनों पहले सीबीआई को निशाने पर लिया था. अमेरिका में इलाज करा रहे जेटली ने ट्वीट किया कि भारत में दोषियों को सजा मिलने की बेहद खराब दर का एक कारण जांच और पेशेवर रवैये पर दुस्साहस एवं प्रशंसा पाने की आदत का हावी हो जाना है.

जेटली ने कहा, 'पेशेवर जांच और जांच के दुस्साहस में आधारभूत अंतर है. हजारों किलोमीटर दूर बैठा मैं जब आईसीआईसीआई मामले में संभावित लक्ष्यों की सूची पढ़ता हूं तो एक ही बात दिमाग में आती है कि लक्ष्य पर ध्यान देने के बजाय अंतहीन यात्रा का रास्ता क्यों चुना जा रहा है? यदि हम बैंकिंग उद्योग से हर किसी को बिना सबूत के जांच में शामिल करने लगेंगे तो हम इससे क्या हासिल करने वाले हैं या वास्तव में नुकसान उठा रहे हैं.'

क्या है पूरा मामला- चंदा कोचर पर मार्च 2018 में अपने पति को आर्थिक फ़ायदा पहुंचाने के लिए अपने पद के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था. मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि आईसीआईसीआई बैंक ने वीडियोकोन समूह को 3,250 करोड़ रुपये का लोन मुहैया कराया था.

वीडियोकॉन ग्रुप की पांच कंपनियों को आईसीआईसीआई बैंक ने अप्रैल 2012 में 3250 करोड़ रुपये का लोन दिया. ग्रुप ने इस लोन में से 86% यानी 2810 करोड़ रुपये नहीं चुकाए. 2017 में इस लोन को एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग असेट्स) में डाल दिया गया.मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीडियोकॉन समूह के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत के कोचर के पति दीपक कोचर के साथ व्यापारिक संबंध थे.

वीडियोकॉन ग्रुप की मदद से बनी एक कंपनी बाद में चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की अगुवाई वाली पिनैकल एनर्जी ट्रस्ट के नाम कर दी गई. यह आरोप लगाया गया कि धूत ने दीपक कोचर की सह स्वामित्व वाली इसी कंपनी के ज़रिए लोन का एक बड़ा हिस्सा स्थानांतरित किया था. आरोप है कि 94.99 फ़ीसदी होल्डिंग वाले ये शेयर्स महज 9 लाख रुपये में ट्रांसफ़र कर दिए गए.

आपको बता दें कि पिछले साल अक्टूबर में वीडियोकॉन समूह को लोन दिए जाने के मामले में आरोपों का सामना कर रही चंदा कोचर ने आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ, प्रबंध निदेशक और बैंक के सब्सिडिअरी के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर के पद को छोड़ दिया था.

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First published: January 27, 2019, 1:30 PM IST
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