OPINION: CBI मामले में मोदी के खिलाफ मोर्चा खोल विपक्ष का चेहरा बनकर उभरीं ममता

ममता बनर्जी बखूबी जानती हैं कि किस घटना को जनता के सामने कैसे पेश करना है.

News18.com
Updated: February 5, 2019, 8:29 PM IST
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शुभजीत सेनगुप्ता

ममता बनर्जी वह मुख्यमंत्री हैं, जो एक वक्त अपनी ही पुलिस के खिलाफ धरने पर बैठ गईं थीं. बात साल 2011 की है, जब वह नई-नई मुख्यमंत्री बनी ही थीं लेकिन वह विपक्षी पार्टी की भूमिका को शायद भूल नहीं पाईं थीं.



मार्क्सवादियों के खिलाफ उनकी लड़ाई और 'माटी और मानुष' के लिए उनकी लड़ाई सबके ज़हन में जिंदा है. सिंगूर में उनके धरने को सभी जानते हैं, जो कि 25 दिनों तक चला और कहीं न कहीं ममता के लिए सत्ता की चाभी बनी.  25 दिनों के बाद ये धरना भी ममता ने तब खत्म किया, जब तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मामले में हस्तक्षेप किया.

विरोध प्रदर्शन ममता की राजनीति का हिस्सा रहा है. संसद में भी उन्होंने विरोध जताने के लिए स्पीकर के ऊपर एक बार काली शॉल फेंक दी थी. लेकिन जब वह पश्चिम बंगाल में सीएम बनीं, उसके बाद चीज़ें थोड़ी बदल गईं. सीएम बनने के बाद उन्होंने 'बंद' पर बैन लगा दिया जो कि मार्क्सवादियों का सबसे बड़ा हथियार माना जाता था और सत्ता में रहते हुए वह कभी धरने पर भी नहीं बैठी. अब लगता है कि वही 'दीदी' फिर से आ गईं हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि अब उनकी महत्त्वाकांक्षाएं कुछ अलग हैं.

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नए साल में उन्होंने एक काफी बड़ी रैली की, जिसमें करीब 20 विपक्षी पार्टियां उनके साथ एक मंच पर आईं. इस घटना को कुछ ही दिन बीते हैं और अब वह फिर से अपने पुलिस वालों के लिए सड़कों पर हैं. उनका आरोप है कि पीएम मोदी के इशारे पर सीबीआई उन्हें परेशान कर रही है. उनको ऐसा लग रहा था कि सीबीआई उनके पसंदीदा पुलिस अधिकारी राजीव कुमार को गिरफ्तार कर लेगी.

सूत्रों का कहना है कि कोलकाता में रैली करने के साथ ही उन्हें अनुमान हो गया था कि चिटफंड मामले में सीबीआई कोई कदम उठा सकती है. इसका ज़िक्र उन्होंने अपने कुछ जानने वालों से किया था, क्योंकि यूपी में भी सपा-बसपा गठबंधन के बाद बालू खनन मामले में सीबीआई ने कई छापे मारे थे. उनका ये अंदेशा काफी कुछ सही भी निकला जब सीबीआई राजीव कुमार से पूछताछ के लिए कोलकाता पहुंच गई.
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ममता बनर्जी इस मामले में कई विपक्षी पार्टियों को अपने साथ लेने में कामयाब रही हैं. पिछले 24 घंटों से अब सबकी निगाहें उन्हीं पर टिकी हुई हैं और यह सिर्फ बंगाल तक ही सीमित नहीं है. 'दीदी' अब एक राष्ट्रीय स्तर की नेता हैं. हर जगह ममता बनर्जी की ही चर्चा है.

माना जा रहा है कि उनका मुख्य उद्देश्य केंद्र के खिलाफ सभी विपक्षी पार्टियों को इकट्ठा करना है. केसीआर के अलावा राहुल गांधी, चंद्रबाबू नायडू और अरविंद केजरीवाल सहित तमाम विपक्षी नेताओं का इसका समर्थन मिला हुआ है.

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यह पहली बार नहीं है जब ममता ने मोदी सरकार पर हमला बोला हो. नोटबंदी के बाद उन्होंने उनकी ऑफिस के पास के टोल गेट पर सेना के जवानों को लगाए जाने पर सवाल उठाए थे और इस बात को कई जगहों पर कहा था कि सीबीआई और ईडी उनके लोगों को दिल्ली के इशारे पर टारगेट कर रही है. एनआरसी के मुद्दे पर उन्होंने बीजेपी का काफी विरोध किया था.

ममता इन बातों को लेकर भी काफी सतर्क हैं कि बीजेपी की पहुंच बंगाल में न बढ़े. इसीलिए हाल ही में बीजेपी नेताओं की सभी रैलियों को या तो कैंसिल कर दिया गया और या तो आगे के लिए टाल दिया गया. यह भी बात चौंकाने वाली थी कि जिस भी पार्क या ग्राउंड में बीजेपी रैली करने वाली थी वह पहले से ही बुक था, लेकिन ममता बनर्जी बखूबी जानती हैं कि किस घटना को जनता के सामने कैसे पेश करना है.

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