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इस्लामिक बैंक के नाम पर अरबों का घोटाला, जूलर मंसूर खान की तीन पत्नियों के घर छापा

अरबों रुपये लेकर फरार आईएमए  ज्वेलर मंसूर खान की तीन पत्नियों के घर पर सीसीबी का छापा
अरबों रुपये लेकर फरार आईएमए ज्वेलर मंसूर खान की तीन पत्नियों के घर पर सीसीबी का छापा

मोहम्मद मंसूर खान ने इस्लामिक बैंक के नाम पर मुस्लिम लोगों को बड़े रिटर्न का वादा कर एक फर्जी स्कीम कि शुरुआत की थी और अब 200 करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला करके फरार है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 19, 2019, 10:00 AM IST
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धर्म के नाम पर लोगों से अरबों रुपये की ठगी करने वाले आई मॉनेटरी एडवाइजरी (आईएमए) ज्वेल्स के मालिक मोहम्मद मंसूर खान की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. मंसूर खान की तीन पत्नियों के घरों पर केंद्रीय अपराध शाखा (सीसीबी) ने छापा मारकर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, जूलरी और नकदी जब्त की है.

सीसीबी ने मंसूर खान की पहली पत्नी के शिवाजी नगर स्थित आवास पर छापा मारा, जबकि उनकी दूसरी और तीसरी पत्नी के तिलक नगर स्थित आवास पर छापा मारा. अभी तक की जानकारी के मुताबिक सीसीबी के अधिकारियों ने इस दौरान मंसूर की पत्नियों के घर से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज के साथ ही 1.5 किलोग्राम सोना और 2.7 लाख रुपये नकदी जब्त की है.

गौरतलब है कि इस्लामिक बैंक के नाम पर करीब 30 हजार मुस्लिमों के साथ धोखाधड़ी करने वाले मोहम्‍मद मंसूर खान ने 200 करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला किया है. आईएमए के खिलाफ अब तक 38 हजार निवेशकों ने शिकायत दर्ज करा दी है. कर्नाटक सरकार ने मामले की जांच के लिए 11 सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआइटी) का गठन किया है. आईएमए मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर भी निवेशकों का प्रदर्शन तेज होता जा रहा है. बताया जाता है कि हाईकोर्ट में अबतक 18 याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं. कंपनी में निवेश करने वालों में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु के भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हैं.



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ज्‍यादा रिटर्न के लालच में लोगों को फंसाया
कर्नाटक पुलिस ने एसआईटी का गठन कर इस मामले की जांच शुरू कर दी है. बता दें कि मोहम्मद मंसूर खान ने इस्लामिक बैंक के नाम पर मुस्लिम लोगों को बड़े रिटर्न का वादा कर एक फर्जी स्कीम कि शुरुआत की थी. मंसूर ने 2006 में आई मॉनेटरी अडवाइजरी (IMA) के नाम से एक कंपनी बनाई. जिसमें उसने इनवेस्टर्स को बताया कि यह संस्था बुलियन में निवेश करेगी और निवेशकों को 7-8 प्रतिशत रिटर्न देगी. चूंकि इस्लाम में ब्याज से मिली रकम को इस्लाम विरोधी माना जाता है इसलिए उसने धर्म का कार्ड खेलते हुए निवेशकों को ‘बिजनेस पार्टरनर’ का दर्ज दिया.

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धर्म को बनाया फंसाने का हथकंडा
आईएमए में पांच लाख रुपये लगा चुके नाविद ने बताया कि उसने मुसलमानों को धार्मिक भावनाओं के जरिए फंसाने का हथकंडा अपनाया. हालांकि उसके इस फ्रॉड का अंदाजा साल 2017 से ही निवेशकों को होने लगा था, जब लोगों का रिटर्न गिरकर पहले 9 से 5 फीसदी तक आया और फिर 2018 आते-आते सिर्फ 3 फीसदी रह गया. इस साल फरवरी में रिटर्न घटकर मात्र 1 फीसदी रह गया. लेकिन तगड़ा झटका तो निवेशकों को मई में लगा जब एक फीसदी रिटर्न भी खत्म हो गया. इसके बाद लोगों का सब्र का बांध टूट गया और अपनी पूंजी वापस लेने की मांग की.

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