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सभी पुलिस स्टेशन में CCTV पर SC ने केंद्र से मांगी रिपोर्ट, अटॉर्नी जनरल से मदद करने को कहा

दुर्भावनापूर्ण हमलों के जरिये अदालतों की निष्पक्षता के प्रति विश्वास को कमजोर करने की इजाजत नहीं दी जा सकती: न्यायालय

अदालत ने अपने आदेश में कहा, "भारत संघ (Union of India) को 07 सितंबर, 2020 से पहले जवाब में अपना हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा जाता है. हम भारत के अटॉर्नी जनरल (Attorney General) जानकार श्री केके वेणुगोपाल (KK Venugopal) से अनुरोध करते हैं कि वे न केवल भारत संघ की ओर से इस मामले में पेश हों बल्कि इस मामले में हमारी सहायता भी करें.”

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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल (Attorney General KK Venugopal) से देश के सभी पुलिस स्टेशनों (Police Stations) में सीसीटीवी कैमरे (CCTV Cameras) लगाने और पुलिस अधिकारियों के सामने दिए गए बयानों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग सुनिश्चित किये जाने में हुई प्रगति से अवगत कराने के लिए सहायता मांगी है. 2018 में पारित अदालत के आदेशों (Court orders) को याद करते हुए, न्यायमूर्ति रोहिंटन एफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार से 7 सितंबर तक इस संबंध में एक विस्तृत हलफनामा (affidavit) दायर करने को कहा ताकि पता चल सके कि फैसले का कितना पालन हुआ.

अदालत ने अपने आदेश में कहा, "भारत संघ (Union of India) को 07 सितंबर, 2020 से पहले जवाब में अपना हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा जाता है. हम भारत के अटॉर्नी जनरल (Attorney General) जानकार श्री केके वेणुगोपाल (KK Venugopal) से अनुरोध करते हैं कि वे न केवल भारत संघ की ओर से इस मामले में पेश हों बल्कि इस मामले में हमारी सहायता भी करें.”

पंजाब पुलिस के डीएसपी के मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिया फैसला
अदालत पंजाब के डीएसपी परमवीर सिंह सैनी की एक अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिन पर एक आपराधिक मामले में दो लोगों को पांच दिनों के लिए पुलिस स्टेशन में अवैध हिरासत में रखने और एक हत्या के मामले में उन्हें प्रताड़ित करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था.

नवंबर 2016 में, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता के विभिन्न आरोपों के तहत सैनी और पांच अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया था.

2018 के एक फैसले में कोर्ट ने मानवाधिकार हनन की जांच के लिए किया था CCTV का समर्थन
कार्यवाही के दौरान, पीठ ने समस्या की जड़ और टेक्नोलॉजी के उपयोग पर अपना ध्यान केंद्रित किया था. जैसा कि इसके 2018 के फैसले में ऐसे मामलों की सच्चाई को उजागर करने के लिए जरूरी था.

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यह नोट किया गया कि 2018 के फैसले ने मानवाधिकारों के हनन की जांच के लिए सभी पुलिस स्टेशनों को सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में लाने की बात का समर्थन किया था.

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