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4 साल पहले ड्रेस पहन कर स्कूल पहुंच गए थे CDS रावत, दोस्त को आखिरी बार ना मिल पाने का मलाल

4 साल पहले ड्रेस पहन कर स्कूल पहुंच गए थे CDS रावत, दोस्त को आखिरी बार ना मिल पाने का मलाल

जनरल बिपिन रावत देश के पहले सीडीएस थे.

जनरल बिपिन रावत देश के पहले सीडीएस थे.

CDS Bipin Rawat News: वह हाल ही में निजी दौरे पर देहरादून आए थे. जनरल रावत की देहरादून में एक मौजूदा घर को फिर से बनवाने के अलावा अपने पैतृक गांव में एक घर बनाने की योजना थी. वह पहाड़ियों से पलायन को लेकर चिंतित थे और उन्होंने समय-समय पर राज्य सरकार के साथ जानकारी साझा की थी.

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    अनुपम त्रिवेदी
    नई दिल्ली.
     तमिलनाडु (Tamilnadu) स्थित कुन्नूर में हेलीकॉप्टर दुर्घटना (Helicopter Crash) में मारे गए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत (Bipin Rawat) ने उत्तराखंड के साथ खास रिश्ते थे. एक महीने पहले 9 नवंबर को उन्होंने देहरादून में एक आधिकारिक समारोह में भाग लिया. वह हाल ही में निजी दौरे पर देहरादून आए थे. जनरल रावत की देहरादून में एक मौजूदा घर को फिर से बनवाने के अलावा अपने पैतृक गांव में एक घर बनाने की योजना थी. वह पहाड़ियों से पलायन को लेकर चिंतित थे और उन्होंने समय-समय पर राज्य सरकार के साथ जानकारी साझा की थी. वह पौड़ी गढ़वाल जिले के बिरमोलीखाल गांव के निवासी थे. गांव में उनके परिवार के सदस्यों को उनके निधन की खबर पर विश्वास नहीं हुआ.

    बिरमोलीखाल, राज्य के उन सैकड़ों गांवों में शामिल है जहां बड़े पैमाने पर पलायन हुआ है. जनरल रावत के चाचा भरत रावत ने News18 को बताया ‘हम (जनरल) बिपिन के स्वस्थ्य होने की प्रार्थना कर रहे थे, लेकिन भाग्य में कुछ और लिखा था. वह 2018 में यहां एक धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने आए थे.’ गांव में केवल तीन सदस्य बचे हैं और जनरल रावत का परिवार अकेला है. उन्होंने कहा, ‘(जनरल) बिपिन ने रिटायर होने के बाद गांव में एक घर बनाने का वादा किया था.’

    यह भी पढ़ें: Gen. Bipin Rawat Passes Away : अधूरा सपने! रिटायरमेंट के बाद उत्तराखंड में बसना था, गांव तक सड़क चाही थी..

    पलायन को रोकने के लिए एक अलग आयोग बनाया
    उनके सलाह के बाद पहाड़ियों से पलायन को रोकने के लिए एक अलग आयोग बनाया गया. पूर्व मुख्यमंत्री टीएस रावत ने कहा कि चीन और नेपाल के साथ सीमावर्ती राज्य होने के नाते, जनरल रावत अक्सर उत्तराखंड में पलायन के तरीकों पर चर्चा करते थे. रावत ने कहा- ‘जनरल रावत ने मलारी (भारत-चीन सीमा के करीब) में एक अखरोट नर्सरी का उद्घाटन किया. वह इस बात को लेकर स्पष्ट थे कि अगर हम लोगों को गांवों में बसना चाहते हैं तो एक व्यावहारिक आजीविका मॉडल होना चाहिए.’

    सीडीएस ने साल 1972 तक शहर के कैम्ब्रियन हॉल से अपनी स्कूली शिक्षा की. उनके निधन की खबर के बाद स्कूल में सन्नाटा छा गया. स्कूल के प्रिंसिपल एससी बेला ने याद किया कि कैसे जनरल रावत साल 2017 में स्कूल ड्रेस पहनकर स्कूल आए थे.  कर्नल (सेवानिवृत्त) अजय कोठियाल जनरल रावत के लगातार संपर्क में थे.

    उन्होंने कहा कि सीडीएस सच्ची भावना से एक ‘पहाड़ी’ है. कर्नल कोठियाल ने कहा- ‘सीडीएस दो दिन पहले यहां (देहरादून में) निजी दौरे पर आए थे. वह अपने पुराने घर के नवीनीकरण की योजना पर काम कर रहे थे. मुझे खेद है कि मैं पहाड़ियों में था और उनसे नहीं मिल सका.’

    (देहरादून में भारती सकलानी और पौड़ी गढ़वाल में अनुपम भारद्वाज के इनपुट्स के साथ)

    Tags: Bipin Rawat, Indian army, Narendra modi, Rajnath Singh

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