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General Rawat Helicopter Crash: हेलिकॉप्टर का ब्लैक बॉक्स मिला, खुलेंगे दुर्घटना के राज

General Rawat Helicopter Crash: हेलिकॉप्टर का ब्लैक बॉक्स मिला, खुलेंगे दुर्घटना के राज

Black Box of Helicopter Crash: तमिलनाडु के किन्नूर में  दुर्घटनाग्रस्त हेलिकॉप्टर का ब्लैक बॉक्स मिल गया है. ब्लैक बॉक्स मिलने के बाद अब इस पूरी घटना के राज का खुलासा हो सकेगा. ब्लैक बॉक्स का वजन लगभग 10 पाउंड (4.5 किलो) होता है और इसमें चार मुख्य भाग होते हैं. अंतरिम रिपोर्ट एक महीने के बाद प्रकाशित होती है. पूरी तरह से जांच को पूरा होने में एक साल या उससे अधिक समय लगता है.

Black Box of Helicopter Crash: तमिलनाडु के किन्नूर में दुर्घटनाग्रस्त हेलिकॉप्टर का ब्लैक बॉक्स मिल गया है. ब्लैक बॉक्स मिलने के बाद अब इस पूरी घटना के राज का खुलासा हो सकेगा. ब्लैक बॉक्स का वजन लगभग 10 पाउंड (4.5 किलो) होता है और इसमें चार मुख्य भाग होते हैं. अंतरिम रिपोर्ट एक महीने के बाद प्रकाशित होती है. पूरी तरह से जांच को पूरा होने में एक साल या उससे अधिक समय लगता है.

Black Box of Helicopter Crash: तमिलनाडु के किन्नूर में दुर्घटनाग्रस्त हेलिकॉप्टर का ब्लैक बॉक्स मिल गया है. ब्लैक बॉक्स मिलने के बाद अब इस पूरी घटना के राज का खुलासा हो सकेगा. ब्लैक बॉक्स का वजन लगभग 10 पाउंड (4.5 किलो) होता है और इसमें चार मुख्य भाग होते हैं. अंतरिम रिपोर्ट एक महीने के बाद प्रकाशित होती है. पूरी तरह से जांच को पूरा होने में एक साल या उससे अधिक समय लगता है.

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    नई दिल्ली. तमिलनाडु के किन्नूर में दुर्घटनाग्रस्त हेलिकॉप्टर का ब्लैक बॉक्स (Helicopter Black Box) मिल गया है. ब्लैक बॉक्स मिलने के बाद अब इस पूरी घटना के राज का खुलासा हो सकेगा. घटना के बाद से ही ब्लैक बॉक्स की खोज जारी थी. सूत्रों ने कहा कि  Mi-17V5 हेलिकॉप्टर का फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर साइट से बरामद किया गया है. रक्षा विशेषज्ञ शैलेंद्र सिंह ने कहा कि जांच के लिहाज से ब्लैक बॉक्स, महत्वपूर्ण है. जांच के दौरान यह पता चलेगा कि आखिर पैरामीटर क्या थे. पायलट ने आखिरी बार क्या कहा था… इमरजेंसी लगाने की कोशिश की… वह लग पाई या नहीं.

    दुर्घटना का पता लगाने के लिए ब्लैक बॉक्स का इस्तेमाल होता है. यह हवाई जहाज की उड़ान के दौरान उड़ान की सारी गतिविधियों को रिकॉर्ड करता है. इसी वजह से इसे फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर (FDR) भी कहते हैं.  इसे  टाइटेनियम से बनाया जाता है. साथ ही भीतर की तरफ इस तरह से सुरक्षित दीवारें बनी होती हैं कि कभी किसी दुर्घटना के होने पर भी ब्लैक बॉक्स सेफ रहे और उससे जांच के दौरान यह पता चल सके कि आखिर उड़ान के आखिरी वक्त में क्या हुआ होगा.

    ब्लैक बॉक्स में क्या होता है?
    ब्लैक बॉक्स का वजन लगभग 10 पाउंड (4.5 किलो) होता है और इसमें चार मुख्य भाग होते हैं: एक चेसिस या इंटरफ़ेस जिसे डिवाइस को ठीक करने और रिकॉर्डिंग और प्लेबैक की सुविधा के लिए डिज़ाइन किया गया है; लोकेटर बीकन; स्टेनलेस स्टील या टाइटेनियम से बना कोर हाउसिंग या ‘क्रैश सर्वाइवेबल मेमोरी यूनिट’, जिसमें सर्किट बोर्ड पर नाखून के आकार के रिकॉर्डिंग चिप्स होते हैं. इसमें दो रिकॉर्डर होते हैं- पहला  पायलट वायस रिकॉर्डिंग और एक फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (एफडीआर).

    अंतरिम रिपोर्ट एक महीने के बाद प्रकाशित होती है. पूरी तरह से जांच को पूरा होने में एक साल या उससे अधिक समय लगता है. साल 2010 में इथियोपियन एयरलाइंस के दुर्घटनाग्रस्त होने की एक लेबनानी जांच में दो साल लग गए थे.

    Tags: Bipin Rawat, Indian army

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