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Bipin Rawat Helicopter Crash: जब CDS बिपिन रावत ने उत्तराखंड में गांव का किया था दौरा... रखी थी ये डिमांड

Bipin Rawat Helicopter Crash: जब CDS बिपिन रावत ने उत्तराखंड में गांव का किया था दौरा... रखी थी ये डिमांड

बुधवार को तमिलनाडु में एक हेलिकॉप्टर हादसे में CDS बिपिन सिंह रावत का निधन हो गया.

बुधवार को तमिलनाडु में एक हेलिकॉप्टर हादसे में CDS बिपिन सिंह रावत का निधन हो गया.

CDS Bipin Rawat Helicopter crash: बिपिन रावत की मौत की खबर के बाद से उनके पैतृक गांव में सन्नााटा पसरा है. हर कोई उनके यूं अचानक चले जाने से दुखी है. बिपिन रावत के चाचा के अनुसार यह उनके परिवार के साथ साथ देश के लिए भी बड़ी क्षति है.जनरल बिपिन रावत के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने दुख जताया है. पीएम मोदी ने ट्वीट किया, ‘मैं तमिलनाडु में हुई हेलीकॉप्टर दुर्घटना से बहुत दुखी हूं जिसमें हमने जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और सशस्त्र बलों के अन्य कर्मियों को खो दिया है.'

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    नई दिल्ली. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत की मौत (GN Bipin Rawat Helicopter crash)  से पूरे देश में शोक की लहर है. रावत उत्तराखंड के रहने वाले थे. पौड़ी गढ़वाल जिले के सैंज गांव में 1958 में जन्मे जनरल बिपिन रावत सेना के अधिकारियों के परिवार से ताल्लुक रखते थे. उनके पिता लक्ष्मण सिंह रावत सेना में लेफ्टिनेंट जनरल के पद से रिटायर हुए थे. बता दें कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी का अंतिम संस्कार शुक्रवार को दिल्ली छावनी में किया जाएगा. उनके पार्थिव शरीर के आज शाम तक एक सैन्य विमान से राष्ट्रीय राजधानी पहुंचने की उम्मीद है.

    सैंज गांव जिला मुख्यालय से लगभग 42 किलोमीटर और यमकेश्वर से लगभग 4 किमी दूर है. साल 2011 की जनगणना के आंकड़ों से पता चलता है कि सैंज में 21 घर थे और 93 लोगों की आबादी थी. अब तक ज्यादातर लोग गांव से पलायन कर चुके हैं. रावत ने अपने पैतृक गांव में ज्यादा समय नहीं बिताया था. वो कम उम्र में ही स्कूली शिक्षा के लिए देहरादून चले गए थे. बिपिन रावत ने देहरादून के कैम्ब्रियन हिल स्कूल और बाद में शिमला के सेंट एडवर्ड स्कूल से पढ़ाई की. इसके बाद वो खडकवासला, पुणे में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और देहरादून चले गए.

    कुछ साल पहले आए थे गांव
    अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए यमकेश्वर के विधायक रितु खंडूरी ने बताया कि पौड़ी गढ़वाल को दिवंगत सीडीएस के कारण राष्ट्रीय महत्व मिला. कुछ साल पहले जब सीडीएस रावत ने जिले का दौरा किया था तब उन्होंने उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से अनुरोध किया था कि बेहतर संपर्क के लिए उनके गांव तक एक सड़क बनाई जाए.

    अब तैयार है सड़क
    विधायक ने आगे कहा, ‘गांव में उनके तत्काल परिवार से कोई नहीं रहता है. लेकिन कुछ साल पहले वो गांव गए थे और उस क्षेत्र में एक सड़क बनाना चाहते थे. उसके बाद, हमने लगभग 4.5 किमी लंबी सड़क बनाना शुरू किया. हर चीज की एक प्रक्रिया होती है और लगभग 3.5 किमी पहले ही पूरी हो चुकी है. जमीन को लेकर कुछ विवाद था, जिसके कारण देरी हुई.

    विमान दुर्घटना में जनरल रावत और अन्य की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पूर्व सेना प्रमुख उत्तराखंड के एक छोटे से गांव में पैदा हुए और पले-बढ़े और अपनी प्रतिभा के दम पर सेना में सर्वोच्च पद पर पहुंचे. उन्होंने कहा, ‘उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और सेना को एक नई दिशा दी है. उनके निधन से उत्तराखंड को गहरा झटका लगा है. हमें उन पर हमेशा गर्व रहेगा.’

    Tags: Air force, Cds bipin rawat death

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